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“काश वह हमारी फिल्म देखने मौजूद होते” Ikkis के बाद Dharmendra की कमी पर भावुक हुए Jaideep Ahlawat
Dharmendra के साथ आखिरी बार काम करने की यादों को Jaideep Ahlawat ने बताया अनमोल, बोले पूरे देश ने महसूस किया खालीपन
भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता Dharmendra के निधन के बाद जो खालीपन बना, वह आज भी महसूस किया जाता है। उनकी आखिरी फिल्म Ikkis में उनके साथ काम करने वाले अभिनेता Jaideep Ahlawat ने हाल ही में अपनी भावनाओं को खुलकर साझा किया।
Jaideep Ahlawat ने कहा कि Dharmendra के जाने के बाद सिर्फ वह ही नहीं, बल्कि पूरा देश और सिनेमा से प्रेम करने वाला हर व्यक्ति उस कमी को महसूस कर रहा है। उन्होंने बताया कि Ikkis के प्रचार के दौरान उन्हें बार-बार Dharmendra की अनुपस्थिति खलती रही।
Jaideep के शब्दों में, काश Dharmendra उस समय हमारे साथ होते, फिल्म देखते और अपने काम को खुद महसूस करते। उन्हें उन पलों का हिस्सा होना चाहिए था, लेकिन यह नियति का फैसला था, जिसे कोई बदल नहीं सकता।
Dharmendra के साथ बिताए पल हमेशा खास रहेंगे
Dharmendra के साथ काम करने के अनुभव को याद करते हुए Jaideep Ahlawat ने कहा कि किसी भी कलाकार के लिए यह सौभाग्य की बात होती है कि उसे ऐसे महान अभिनेता के साथ काम करने का अवसर मिले। उन्होंने बताया कि Dharmendra अपनी महान पहचान के बावजूद कभी यह एहसास नहीं होने देते थे कि सामने कोई बहुत बड़ा सितारा खड़ा है।
उनका व्यवहार बिल्कुल परिवार के किसी बुजुर्ग की तरह था। वह अक्सर हंसी-मज़ाक करते, खूबसूरत कविताएं सुनाते और पुराने किस्से साझा करते थे, जिससे पूरा चलचित्र स्थल जीवंत हो उठता था।

Jaideep ने बताया कि Ikkis की शूटिंग के दौरान उनका सबसे ज्यादा समय Dharmendra के साथ ही बीता। जब भी Dharmendra चलचित्र स्थल पर आते थे, उनकी सकारात्मक ऊर्जा से पूरा माहौल हल्का और सहज हो जाता था।
उन्होंने एक खास पल को याद करते हुए बताया कि Dharmendra ने प्यार से उनके गाल पर हाथ रखकर कहा था, “Kinna sona munda hai।” Jaideep के लिए यह शब्द किसी भी बाहरी तारीफ या पुरस्कार से कहीं ज्यादा मायने रखते हैं।
Ikkis एक वीर गाथा को श्रद्धांजलि
फिल्म Ikkis का निर्देशन Sriram Raghavan ने किया है और इसका निर्माण Dinesh Vijan ने Maddock Films के बैनर तले किया है।
यह फिल्म 1971 के भारत-पाक युद्ध के नायक Arun Khetpal के जीवन पर आधारित है, जिन्हें भारत के सबसे कम उम्र के परमवीर चक्र विजेता होने का गौरव प्राप्त है।
फिल्म में Agastya Nanda ने Arun Khetpal की भूमिका निभाई है, जबकि Simar Bhatia और Jaideep Ahlawat भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आते हैं। Dharmendra की मौजूदगी इस फिल्म को गहरी भावनात्मक मजबूती देती है।
Jaideep Ahlawat की बातें इस बात का प्रमाण हैं कि Dharmendra केवल एक महान अभिनेता ही नहीं थे, बल्कि एक ऐसे इंसान भी थे जिनकी सादगी, अपनापन और सकारात्मकता हमेशा याद की जाती रहेगी।
