cricket
जैक्स कैलिस ने गौतम गंभीर का पूरा समर्थन किया—कहते हैं “हर फॉर्मेट में ऑलराउंडर टीम की रीढ़ होते हैं”
भारत की 0–2 सीरीज़ हार के बाद गंभीर पर उठे सवालों के बीच जैक्स कैलिस का बड़ा बयान—“100% सही रणनीति, ऑलराउंडर ही दिलाते हैं बैलेंस।”
भारतीय क्रिकेट में पिछले कुछ महीनों से एक ही बहस जोर पकड़ रही है—क्या गौतम गंभीर अपने ऑलराउंडर-आधारित अप्रोच के साथ टीम को आगे ले जा रहे हैं या पीछे धकेल रहे हैं?
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शर्मनाक 0–2 की हार के बाद आलोचना तेज़ हुई, लेकिन इसी बीच दुनिया के महानतम ऑलराउंडरों में शुमार जैक्स कैलिस ने गंभीर की रणनीति का खुलकर समर्थन किया है।
SA20 लीग से पहले Hindustan Times से बातचीत में कैलिस ने कहा कि आधुनिक क्रिकेट में ‘‘ऑलराउंडर सिर्फ विकल्प नहीं, बल्कि जीत का असली बैलेंस’’ हैं।
“Yes, 100 per cent” — कैलिस का गंभीर को सीधा समर्थन
जैक्स कैलिस ने कहा:
“ऑलराउंडर आपकी टीम को गहराई देते हैं, बैटिंग ऑर्डर लंबा करते हैं और शुरुआत व मिडल में आक्रामक खेलने की आज़ादी देते हैं। किसी भी फॉर्मेट में ऑलराउंडर बेहद महत्वपूर्ण हैं।”
कैलिस के इस बयान से गंभीर को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि भारतीय क्रिकेट समुदाय का एक बड़ा वर्ग गंभीर के “ऑलराउंडर-ओवर-स्पेशलिस्ट” अप्रोच को विफल बता रहा था।

आलोचना क्यों बढ़ी?
भारत ने 12 महीनों में दूसरी बार घर में टेस्ट सीरीज़ गंवाई, और इसके बाद गंभीर पर आरोप लगाए गए कि:
- वे टीम में बहुत ज़्यादा ऑलराउंडर चुन रहे हैं
- कई खिलाड़ियों को गलत पोज़ीशन में बैटिंग करवा रहे हैं
- टीम में लगातार बदलाव हो रहे हैं
- स्पेशलिस्ट बैट्समैन और स्पेशलिस्ट गेंदबाज़ नज़रअंदाज़ किए जा रहे हैं
इसी माहौल में पूर्व भारतीय कप्तान अनिल कुंबले ने कहा था:
“टेस्ट मैच क्रिकेट एक अलग मानसिकता मांगता है। इतने ऑलराउंडर और इतना chopping-changing काम नहीं करता।”
वहीं वेंदतेश प्रसाद ने गंभीर के अप्रोच को ‘‘brain-fade obsession’’ कहा था।
नितीश रेड्डी—सबसे बड़ा विवाद
सारी बहस का सबसे बड़ा केंद्र रहा नितीश कुमार रेड्डी।
गंभीर और चयनकर्ताओं ने उन्हें अगला हार्दिक पंड्या बताकर तेज़ी से टेस्ट सेटअप में धकेला।
उन्होंने MCG पर शतक लगाया, लेकिन उसके बाद रिटर्न्स लगातार गिरते गए:
नितीश के आँकड़े (10 टेस्ट):
- बल्लेबाज़ी औसत: 26
- सिर्फ 1 शतक, जो औसत को बचा रहा है
- गेंदबाज़ी: 15 पारियों में सिर्फ 86 ओवर
- प्रति पारी औसतन केवल 5.7 ओवर, यानी उपयोग भी कम
गुवाहाटी और अहमदाबाद टेस्ट में उनका सीमित उपयोग ही आलोचना को और बढ़ाता गया।
Washington Sundar — ‘फ्लोटर’ की नई परिभाषा
वॉशिंगटन सुंदर टीम में एक और महत्वपूर्ण ऑलराउंडर बनकर उभरे हैं।
गंभीर की रणनीति में:
- वे कभी No. 3 पर
- कभी No. 6 पर
- कभी No. 8 पर
बल्लेबाज़ी कर रहे हैं।
कॉलकाता टेस्ट में:
- सुंदर ने सबसे ज्यादा गेंदें खेलीं
- यशस्वी जायसवाल के बाद भारत के लिए सर्वाधिक रन बनाए
- गेंद से विकेट भी नियमित रूप से ले रहे हैं
इस फ्लेक्सिबिलिटी को गंभीर सबसे बड़ी ताकत मानते हैं।
सफेद गेंद क्रिकेट में ऑलराउंडर्स—गंभीर की जीत
ODI और T20 में भारत लगातार खेलता है:
- अक्षर पटेल
- रवींद्र जडेजा
- वॉशिंगटन सुंदर
- हार्दिक पंड्या
इनसे बैटिंग भी लंबी होती है और गेंदबाज़ी विकल्प भी बढ़ते हैं।
कैलिस कहते हैं कि ‘‘टी20 में जितने अधिक ऑलराउंडर हों, उतना अच्छा।’’

लेकिन सवाल ये—क्या टेस्ट में भी यही फॉर्मूला चलेगा?
टेस्ट क्रिकेट:
- लंबा फॉर्मेट
- तकनीकी चुनौती
- पिच पढ़ने की क्षमता
- स्पेशलिस्ट लाल गेंद कौशल
सबसे ऊपर रखता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को:
- स्पेशलिस्ट स्पिन बैटर चाहिए
- स्पेशलिस्ट लाल-गेंद तेज़ गेंदबाज़ चाहिए
- लाइनअप में स्थिरता चाहिए
क्योंकि इस समय अभिमन्यु ईश्वरन, सरफराज खान, रजत पाटीदार जैसे लाल गेंद विशेषज्ञ लगातार इंतज़ार में बैठे हैं।
कैलिस का बयान क्यों महत्वपूर्ण है?
क्योंकि:
- वह दुनिया के सबसे सफल ऑलराउंडर हैं
- उनका अनुभव 166 टेस्ट और 328 ODIs का है
- वे जानते हैं कि कौन सा कौशल किस स्थिति में चल सकता है
उनका कहना है कि आधुनिक क्रिकेट इतनी तेज़ है कि ‘‘बैलेंस’’ अब लक्ज़री नहीं, जरूरत है।
गंभीर के दबाव को यह सबसे बड़ा बाहरी समर्थन माना जा रहा है।
निष्कर्ष — बहस जारी रहेगी, लेकिन विचार बदलने होंगे
- गंभीर का ऑलराउंडर मॉडल सीमित-ओवर क्रिकेट में सफल है
- टेस्ट क्रिकेट में उसका मिश्रित असर दिखा है
- कैलिस का समर्थन भारत के लिए रणनीतिक संकेत देता है
- लेकिन स्पेशलिस्ट खिलाड़ियों की अनदेखी लंबे समय में महंगी पड़ सकती है
भारतीय क्रिकेट अभी बदलाव की दहलीज पर है—
और सवाल वही है:
क्या बैलेंस स्पेशलिस्टों से आता है, या ऑलराउंडर्स से?
