Connect with us

World News

ईरानी राष्ट्रपति ने पड़ोसी देशों से माँगी माफी लेकिन रखी एक कड़ी शर्त, अमेरिका के सामने झुकने से किया साफ इनकार

ईरानी राष्ट्रपति ने पड़ोसी देशों से माँगी माफी — लेकिन रखी एक कड़ी शर्त, अमेरिका के सामने झुकने से किया साफ इनकार

Published

on

ईरानी राष्ट्रपति ने पड़ोसियों से माँगी माफी, लेकिन रखी शर्त — समर्पण से किया इनकार | Dainik Diary
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्किान ने राजकीय टीवी पर पड़ोसी देशों से माफी माँगी — लेकिन शर्त रखी कि जब तक उन देशों से हमला न हो, ईरान नहीं मारेगा।

युद्ध शुरू हुए ठीक एक हफ्ता बीता था। ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई मारे जा चुके थे, सेना की कमान बिखरी हुई थी, और खाड़ी देशों पर मिसाइलें और ड्रोन बरस रहे थे। ऐसे में शनिवार की सुबह एक बिना तैयारी के, जल्दी में बनाया गया वीडियो ईरानी राजकीय टेलीविज़न पर आया — और दुनिया ठहरकर देखने लगी।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्किान ने शनिवार को क्षेत्रीय देशों पर हुए हमलों के लिए माफी माँगी — लेकिन साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की “बिना शर्त समर्पण” की माँग को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि “यह एक ऐसा सपना है जिसे वे अपनी कब्र में साथ ले जाएँ।”

माफी — लेकिन एक कड़ी शर्त के साथ

पेज़ेश्किान ने अपने वीडियो संदेश में कहा — “अंतरिम नेतृत्व परिषद ने कल यह तय किया कि पड़ोसी देशों को अब निशाना नहीं बनाया जाएगा और उन पर मिसाइलें नहीं दागी जाएँगी — जब तक कि उन देशों से ईरान पर हमला न हो।”

और भी पढ़ें : “क्यूबा जल्द गिरने वाला है” ईरान से निपटते हुए Trump की नज़र अब अगले शिकार पर

उन्होंने आगे कहा — “मैं अपनी तरफ से उन पड़ोसी देशों से माफी माँगता हूँ जिन पर ईरान ने हमला किया। अब से उन पर हमले या मिसाइलें तब तक नहीं होंगी जब तक वे देश हम पर हमला न करें। मेरे विचार से अब इसे कूटनीति से सुलझाना चाहिए।”

यह माफी सुनने में सरल लगती है — लेकिन इसकी शर्त बड़ी पेचीदा है। खाड़ी के ज़्यादातर देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डे हैं। अगर अमेरिका उन्हीं अड्डों से ईरान पर हमला करे, तो ईरान उन देशों को भी “हमलावर” मानेगा।

IRGC ने बढ़ाई और उलझन

पेज़ेश्किान के बयान के ठीक बाद IRGC ने अपना बयान जारी करते हुए कहा कि “सेना पड़ोसी देशों के हितों और राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान करती है और उन पर अब तक कोई हमला नहीं किया गया।” — लेकिन ज़मीन पर हकीकत कुछ और थी।

ईरानी राष्ट्रपति ने पड़ोसियों से माँगी माफी, लेकिन रखी शर्त — समर्पण से किया इनकार | Dainik Diary


पेज़ेश्किान के बयान के कुछ ही घंटों बाद दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ईरानी ड्रोन ने हमला किया और कतर ने एक ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल को रोका। माफी के बावजूद मिसाइलें रुकी नहीं थीं।

राष्ट्रपति बोलते हैं, IRGC करती है अपनी मर्जी

यह पूरा वाकया एक बड़े सच को उजागर करता है — ईरान में राष्ट्रपति की ताकत की सीमाएँ।

Al Jazeera के विश्लेषक रसूल सरदार ने कहा — “ईरान में सामरिक मामलों में — जैसे विदेश और सुरक्षा नीति — राजनेताओं की कोई भूमिका नहीं होती। IRGC अब पूरी तरह नियंत्रण में है और वही तय करेगी कि हमला हो या नहीं। पेज़ेश्किान या अन्य नेताओं का सुरक्षा राजनीति में कोई प्रभाव नहीं होगा।”

पेज़ेश्किान ने खुद भी स्वीकार किया कि “हमारे कमांडर और नेता मारे गए, और हमारी सेना बिना कमांड के, अपनी मर्जी से लड़ती रही — और उन्होंने गर्व के साथ मातृभूमि की रक्षा की।”

यानी राष्ट्रपति की माफी तो आ गई, लेकिन उस माफी में कितना दम है — यह IRGC के अगले कदम से तय होगा।

नए सर्वोच्च नेता की खोज जारी

इस राजनीतिक उलझन के बीच ईरान के एक वरिष्ठ धर्मगुरु अयातुल्लाह नासिर मकारेम शिराज़ी ने विशेषज्ञ परिषद से जल्द से जल्द नए सर्वोच्च नेता के नाम का ऐलान करने की अपील की बिना सुप्रीम लीडर के ईरान की यह तीन सदस्यीय अंतरिम परिषद कितने दिन चल सकती है — यह बड़ा सवाल है।

भारत की नज़र इस “शर्त” पर

भारत के लिए यह बयान अहम है। ईरान ने कहा है कि वह पड़ोसियों पर हमला तब करेगा जब उनकी ज़मीन से ईरान पर हमला हो। भारत के करोड़ों नागरिक खाड़ी में रहते हैं — और यह शर्त ही तय करेगी कि उनकी सुरक्षा का रास्ता कितना साफ है।

एक माफी, एक शर्त, एक नेता जिसकी अपनी सेना उसकी बात नहीं सुन रही — यह है आज के ईरान की तस्वीर।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *