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ईरान के विदेश मंत्री और स्पीकर ‘किल लिस्ट’ से बाहर क्यों? 5 दिन की राहत के पीछे छिपी बड़ी डील
ट्रंप की बातचीत पहल के बाद बदला रुख, पाकिस्तान-तुर्की-इजिप्ट की चेतावनी ने टाला बड़ा हमला
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। United States और Israel ने ईरान के दो बड़े नेताओं—विदेश मंत्री Abbas Araghchi और संसद अध्यक्ष Mohammad Ghalibaf—को अपनी ‘किल लिस्ट’ से अस्थायी तौर पर हटा दिया है।
यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब Donald Trump ने ईरान के साथ बातचीत का रास्ता खोलने का संकेत दिया है।
5 दिन की राहत, लेकिन खतरा टला नहीं
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अराघची और ग़ालिबाफ को केवल 4 से 5 दिनों के लिए इस लिस्ट से हटाया गया है। इसका मतलब साफ है—यह कोई स्थायी राहत नहीं, बल्कि कूटनीतिक बातचीत के लिए एक छोटा सा “विंडो” है।
अगर इस दौरान बातचीत आगे नहीं बढ़ती, तो हालात फिर से खतरनाक मोड़ ले सकते हैं।
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क्यों हटाए गए टारगेट से?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Pakistan, Turkey और Egypt जैसे देशों ने अमेरिका को साफ चेतावनी दी थी।
उनका कहना था कि अगर ईरान के इन शीर्ष वार्ताकारों को मार दिया गया, तो शांति वार्ता की कोई संभावना नहीं बचेगी। एक सूत्र के मुताबिक,
“अगर ये दोनों भी खत्म हो जाते, तो बातचीत करने के लिए कोई बचता ही नहीं।”
यही कारण था कि अमेरिका ने इजरायल से पीछे हटने को कहा।

ट्रंप की रणनीति: पहले दबाव, फिर बातचीत
डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति को लेकर विशेषज्ञों की अलग-अलग राय है। कुछ का मानना है कि यह “प्रेशर एंड नेगोशिएशन” का खेल है—पहले दबाव बनाओ, फिर बातचीत का रास्ता खोलो।
ट्रंप का दावा है कि ईरान समझौते के लिए बेताब है, लेकिन Iran ने इसे खारिज करते हुए कहा है कि वह किसी भी दबाव में बातचीत नहीं करेगा।
शांति की उम्मीद क्यों कम?
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच कई बड़े मुद्दों पर मतभेद हैं—
- परमाणु कार्यक्रम
- प्रतिबंधों में ढील
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण
ईरान पहले ही अमेरिका के 15-पॉइंट प्रस्ताव को “एकतरफा और अन्यायपूर्ण” बता चुका है।
क्या हो सकता है आगे?
आने वाले 4-5 दिन इस पूरे संकट के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।
- अगर बातचीत शुरू होती है, तो युद्ध रुक सकता है
- अगर असफल रही, तो टकराव और बढ़ सकता है
दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति इस युद्ध को रोक पाएगी या नहीं।
