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G7 देशों की कड़ी चेतावनी रूस का तेल खरीदने वालों पर गिरेगी गाज़

भारत और चीन पर अप्रत्यक्ष दबाव, G7 वित्त मंत्रियों ने कहा – रूस से राजस्व खत्म करने के लिए उठाएंगे ठोस कदम

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G7 देशों की चेतावनी – रूस का तेल खरीदने वालों पर कड़े कदम, भारत और चीन पर बढ़ा दबाव
G7 वित्त मंत्रियों ने रूस का तेल खरीदने वाले देशों को दी चेतावनी, भारत और चीन पर भी बढ़ा दबाव

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच G7 देशों ने एक बार फिर मास्को पर दबाव बढ़ाने का ऐलान किया है। बुधवार को हुई वर्चुअल बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में G7 वित्त मंत्रियों ने कहा कि वे उन देशों को निशाना बनाएंगे जो रूस से तेल की खरीद में इज़ाफा कर रहे हैं और उन कंपनियों या मध्यस्थों को भी, जो इस प्रक्रिया को आसान बना रहे हैं।

बयान में साफ कहा गया –
“हम उन लोगों को टारगेट करेंगे जो फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद भी रूसी तेल खरीदना बढ़ा रहे हैं। साथ ही उन पर भी कार्रवाई होगी जो प्रतिबंधों को दरकिनार करने में मदद कर रहे हैं।”

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क्यों है अहम?

रूस पर पहले ही कई दौर के प्रतिबंध और आर्थिक सैंक्शन लगाए जा चुके हैं। लेकिन उसके ऊर्जा निर्यात से उसे अब भी भारी राजस्व मिल रहा है। यही वजह है कि G7 देश तेल और गैस जैसे हाइड्रोकार्बन उत्पादों पर निर्भरता खत्म करने का संकल्प ले रहे हैं।

अमेरिका ने पहले भी अपने सहयोगियों से अपील की थी कि वे भारत और चीन जैसे देशों पर दबाव डालें, जो रूसी तेल खरीदते रहे हैं। हालाँकि, इस बयान में सीधे तौर पर किसी देश का नाम नहीं लिया गया, लेकिन संकेत साफ़ हैं।

G7 देशों की चेतावनी – रूस का तेल खरीदने वालों पर कड़े कदम, भारत और चीन पर बढ़ा दबाव


India और China रूस से सस्ते दाम पर तेल खरीदकर अपने घरेलू बाज़ार की ज़रूरतें पूरी कर रहे हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump की प्रशासन ने हाल ही में भारत के निर्यात पर अतिरिक्त टैरिफ भी लगाया था, जबकि चीन पर वैसा सीधा दबाव नहीं डाला गया।

G7 की रणनीति

G7 वित्त मंत्रियों ने यह भी कहा कि वे आने वाले समय में रूस से आयात को धीरे-धीरे खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाएंगे।
“हम ठोस कदम उठाएंगे ताकि रूस से हमारी बची हुई ऊर्जा आयात को भी चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जा सके।”

साथ ही यह भी संकेत दिया गया कि वे उन देशों पर अतिरिक्त व्यापारिक प्रतिबंधों और टैरिफ पर विचार कर रहे हैं जो रूस की युद्ध मशीनरी को आर्थिक रूप से मज़बूत कर रहे हैं।

पृष्ठभूमि

रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर बड़ा हमला किया था, जबकि क्राइमिया को उसने पहले ही 2014 में अपने साथ मिला लिया था। तब से पश्चिमी ताकतें लगातार मास्को की फंडिंग को रोकने के नए-नए रास्ते तलाश रही हैं।

लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर भारत और चीन जैसे बड़े बाज़ार रूसी तेल खरीदते रहेंगे, तो रूस पर दबाव पूरी तरह असरदार नहीं हो पाएगा।

निष्कर्ष

G7 का यह नया बयान रूस और उसके तेल ग्राहकों दोनों के लिए एक सख्त संदेश है। आने वाले समय में भारत, चीन और अन्य देशों को कूटनीतिक दबाव और आर्थिक नतीजों का सामना करना पड़ सकता है।

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