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अंतरिक्ष में सोलर एनर्जी से चलेंगे डेटा सेंटर्स Elon Musk के दावे पर क्यों उठ रहे हैं सवाल
Elon Musk का बड़ा विज़न या तकनीकी चुनौती, स्पेस में डेटा सेंटर्स चलाने के विचार ने छेड़ी नई बहस
तकनीक और भविष्य की सोच की बात हो और Elon Musk का नाम न आए, ऐसा शायद ही कभी होता है। एक बार फिर मस्क अपने एक ऐसे आइडिया को लेकर चर्चा में हैं, जिसने टेक वर्ल्ड के साथ-साथ वैज्ञानिकों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। मस्क का दावा है कि आने वाले समय में डेटा सेंटर्स को अंतरिक्ष में स्थापित किया जा सकता है और वे पूरी तरह सोलर पावर से चलेंगे।
मस्क के मुताबिक, धरती पर बढ़ते डेटा सेंटर्स से ऊर्जा की खपत और पर्यावरण पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में स्पेस में सोलर एनर्जी का उपयोग कर डेटा सेंटर्स चलाना एक साफ-सुथरा और लंबे समय का समाधान हो सकता है। अंतरिक्ष में सूरज की रोशनी बिना रुकावट के उपलब्ध रहती है, जिससे ऊर्जा उत्पादन कहीं ज़्यादा स्थिर हो सकता है।
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हालांकि, इस दावे पर कई एक्सपर्ट्स ने शंकाएं भी जताई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरिक्ष में डेटा सेंटर्स भेजने और वहां उन्हें मेंटेन करने की लागत बेहद ज़्यादा होगी। हार्डवेयर की मरम्मत, तापमान नियंत्रण और रेडिएशन से सुरक्षा जैसी चुनौतियां इस योजना को जटिल बना देती हैं।
इसके अलावा, डेटा को धरती तक वापस भेजने की प्रक्रिया भी आसान नहीं होगी। हाई-स्पीड और सुरक्षित डेटा ट्रांसमिशन के लिए अत्याधुनिक सैटेलाइट नेटवर्क की ज़रूरत पड़ेगी, जो फिलहाल बेहद महंगा और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण माना जाता है। कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि धरती पर ही ग्रीन एनर्जी से डेटा सेंटर्स को अपग्रेड करना ज्यादा व्यावहारिक विकल्प हो सकता है।

फिर भी, Elon Musk के समर्थक इसे भविष्य की दिशा में एक साहसिक कदम मानते हैं। इससे पहले भी मस्क इलेक्ट्रिक कार, प्राइवेट स्पेस ट्रैवल और सैटेलाइट इंटरनेट जैसे विचारों को हकीकत में बदल चुके हैं। ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि उनका यह विज़न सिर्फ एक कल्पना है या आने वाले दशकों में तकनीकी क्रांति की शुरुआत।
कुल मिलाकर, स्पेस में सोलर पावर से डेटा सेंटर्स चलाने का विचार जितना रोमांचक है, उतना ही विवादास्पद भी। आने वाला समय बताएगा कि यह सोच एक क्रांतिकारी समाधान बनती है या सिर्फ चर्चा का विषय बनकर रह जाती है।
