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US-Canada ट्रेड बातचीत से पहले बड़ा बयान: कार्नी ने ट्रंप को बताया “मजबूत सौदेबाज़”

टैरिफ और व्यापार शर्तों पर होने वाली अहम बातचीत से पहले डोनाल्ड ट्रंप की नेगोशिएशन स्किल्स की खुलकर तारीफ

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US-Canada ट्रेड वार्ता से पहले डोनाल्ड ट्रंप की नेगोशिएशन स्किल्स पर टिप्पणी करते मार्क कार्नी
US-Canada ट्रेड वार्ता से पहले डोनाल्ड ट्रंप की नेगोशिएशन स्किल्स पर टिप्पणी करते मार्क कार्नी

अमेरिका और कनाडा के बीच होने वाली अहम व्यापार वार्ताओं से पहले एक दिलचस्प राजनीतिक बयान सामने आया है। कनाडा के प्रभावशाली नेता Mark Carney ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump को “मजबूत नेगोशिएटर” बताया है।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब United States और Canada के बीच व्यापार शर्तों, टैरिफ और सप्लाई चेन से जुड़े मुद्दों पर बातचीत फिर से तेज़ होने वाली है।

“ट्रंप जानते हैं कब दबाव बनाना है”

मार्क कार्नी ने अपने बयान में कहा कि डोनाल्ड ट्रंप की पहचान एक ऐसे नेता के रूप में रही है, जो बातचीत की मेज़ पर दबाव बनाना अच्छी तरह जानते हैं।
कार्नी के मुताबिक, ट्रंप अक्सर कड़े रुख से शुरुआत करते हैं, ताकि सामने वाला पक्ष अपनी सीमाएँ स्पष्ट कर दे। यही रणनीति उन्हें बाकी नेताओं से अलग बनाती है।

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US-Canada रिश्तों के लिए क्यों अहम है यह टिप्पणी

अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक रिश्ते दशकों पुराने हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में टैरिफ, डेयरी सेक्टर और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री जैसे मुद्दों पर तनाव देखने को मिला है।
ऐसे में कार्नी की टिप्पणी को सिर्फ तारीफ नहीं, बल्कि आने वाली बातचीत का संकेत माना जा रहा है — कि कनाडा अब ज्यादा व्यावहारिक और रणनीतिक रवैया अपनाने को तैयार है।

US-Canada ट्रेड वार्ता से पहले डोनाल्ड ट्रंप की नेगोशिएशन स्किल्स पर टिप्पणी करते मार्क कार्नी


ट्रंप स्टाइल नेगोशिएशन का असर

डोनाल्ड ट्रंप का नेगोशिएशन स्टाइल हमेशा चर्चा में रहा है। वे अक्सर सार्वजनिक बयानों, सोशल मीडिया और सख्त भाषा के ज़रिए दबाव बनाते हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यही तरीका कई बार सामने वाले देश को जल्दी फैसले लेने पर मजबूर करता है, हालांकि इससे रिश्तों में तनाव भी बढ़ सकता है।

कनाडा की रणनीति क्या होगी?

कार्नी के बयान से यह साफ संकेत मिलता है कि कनाडा, ट्रंप की रणनीति को अच्छी तरह समझता है।
कनाडाई नीति-निर्माताओं का फोकस इस बार टकराव से ज्यादा संतुलन पर रहने वाला है — ताकि व्यापारिक हित सुरक्षित रहें और रिश्तों में अनावश्यक खटास न आए।

आगे की राह

अब सबकी नजर US-Canada ट्रेड टॉक्स पर है। अगर दोनों देश टैरिफ और बाजार पहुंच जैसे मुद्दों पर सहमति बनाते हैं, तो इसका असर नॉर्थ अमेरिकन इकोनॉमी से लेकर ग्लोबल ट्रेड तक दिख सकता है।
कार्नी का बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि आने वाली बातचीत आसान नहीं होगी, लेकिन रणनीतिक रूप से बेहद अहम जरूर होगी।