Business & Economy
बैंकिंग सिस्टम में राहत: दिसंबर 2025 में NPAs गिरकर 2% पर, सालों में सबसे कम
RBI रिपोर्ट के अनुसार खराब कर्ज में सुधार, रिटेल, इंडस्ट्री और एग्रीकल्चर सेक्टर सभी में गिरावट
भारतीय बैंकिंग प्रणाली के लिए एक सकारात्मक संकेत सामने आया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की बुधवार को जारी Monetary Policy Report के अनुसार, दिसंबर 2025 में शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों के ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग असेट्स (NPAs) का अनुपात 2 प्रतिशत पर पहुंच गया, जो पिछले साल इसी समय 2.5 प्रतिशत था।
NPAs, यानी 90 दिनों से अधिक समय तक अप्राप्त कर्ज, भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण संकेतक होते हैं। इस गिरावट का मतलब है कि बैंकिंग सेक्टर में कर्ज की रिकवरी बेहतर हुई और कर्ज की गुणवत्ता में सुधार आया।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सुधार कई सेक्टर्स में देखने को मिला है। रिटेल लोन, सर्विस सेक्टर, इंडस्ट्री और एग्रीकल्चर सभी क्षेत्रों में खराब कर्ज की दर में कमी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकेत भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और बैंकिंग सिस्टम के सुधार की दिशा में सकारात्मक कदम है।

विशेषज्ञों के अनुसार, बैंकिंग क्षेत्र में NPAs का कम होना निवेशकों और आम लोगों दोनों के लिए भरोसे का संकेत है। यह कदम बैंकों को नए लोन देने और विकासशील परियोजनाओं में निवेश बढ़ाने में मदद करेगा।
RBI की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बैंकिंग सेक्टर में सुधार लगातार बना हुआ है, और अगले कुछ महीनों में वित्तीय स्थिरता को और मजबूत करने की उम्मीद है।
इस रिपोर्ट के आने के बाद वित्तीय बाजारों में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला, और निवेशकों ने भारतीय बैंकिंग शेयरों में उत्साह के साथ बढ़त दर्ज की।
