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एशियन बैडमिंटन में बड़ा धमाका: आयुष शेट्टी ने वर्ल्ड नंबर 7 ली शिफेंग को हराकर सबको चौंकाया

20 साल के युवा भारतीय शटलर का कमाल—शानदार स्मैश और बेहतरीन नियंत्रण से चीन के दिग्गज खिलाड़ी को सीधे गेम में दी मात

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एशियन बैडमिंटन चैंपियनशिप में ली शिफेंग के खिलाफ शानदार स्मैश लगाते आयुष शेट्टी

भारतीय बैडमिंटन के लिए एक और गर्व का पल सामने आया है। युवा खिलाड़ी आयुष शेट्टी ने एशियन बैडमिंटन चैंपियनशिप के पहले ही राउंड में दुनिया के नंबर 7 खिलाड़ी ली शिफेंग को हराकर बड़ा उलटफेर कर दिया।

सिर्फ 20 साल की उम्र में आयुष ने जिस आत्मविश्वास और आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया, उसने यह साबित कर दिया कि भारत की नई पीढ़ी अब किसी भी बड़े खिलाड़ी को चुनौती देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

दमदार शुरुआत, मजबूत पकड़

मैच की शुरुआत में ली शिफेंग ने बढ़त बना ली थी और स्कोर 7-5, 8-5 तक पहुंच गया था। लेकिन आयुष ने घबराने के बजाय धैर्य दिखाया और धीरे-धीरे मैच पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली।

पहला गेम उन्होंने 21-13 से अपने नाम किया, जिसमें उनके तेज और गहरे स्मैश ने चीनी खिलाड़ी को संभलने का मौका ही नहीं दिया।

स्मैश बने सबसे बड़ा हथियार

इस मुकाबले में आयुष के “deep travelling smashes” यानी लंबी दूरी तक जाने वाले तेज स्मैश सबसे बड़ा अंतर साबित हुए। ली शिफेंग जैसे आक्रामक खिलाड़ी भी इन शॉट्स के सामने बेबस नजर आए।

एक लंबी रैली के दौरान, जब शिफेंग ने स्कोर 13-19 पर वापसी की कोशिश की, तब आयुष ने धैर्य बनाए रखते हुए शानदार रिट्रीवल किया और अंत में एक जोरदार स्मैश के साथ पॉइंट खत्म किया—जिसने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया।

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दूसरा गेम भी रहा नियंत्रण में

दूसरे गेम में भी आयुष ने अपना दबदबा बनाए रखा और 21-16 से जीत दर्ज की। कुल मिलाकर 55 मिनट चले इस मुकाबले में भारतीय खिलाड़ी ने अनुभव और रणनीति दोनों में खुद को बेहतर साबित किया।

कोच इरवांस्याह का योगदान

आयुष की इस जीत के पीछे उनके कोच इरवांस्याह की रणनीति भी अहम रही। उन्होंने आयुष को आक्रामक लेकिन नियंत्रित खेल खेलने की सलाह दी, जिसका असर कोर्ट पर साफ दिखा।

भारतीय बैडमिंटन का सुनहरा दौर

हाल ही में लक्ष्य सेन ने ऑल इंग्लैंड में शानदार प्रदर्शन कर चीन के खिलाड़ियों को चुनौती दी थी। अब आयुष शेट्टी की यह जीत दिखाती है कि भारतीय बैडमिंटन में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास आ चुका है।

यह जीत सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि एक संकेत है कि आने वाले समय में भारत के युवा खिलाड़ी विश्व बैडमिंटन पर राज कर सकते हैं।

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