India News
अनंत अंबानी के फिटनेस ट्रेनर विनोद चन्ना ने बताया असली Fat Loss का विज्ञान—सिर्फ वजन घटाना नहीं, शरीर को सही तरीके से बदलना सीखें
“कार्डियो सिर्फ कैलोरी जलाता है, लेकिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग शरीर को बदलती है”—जानिए क्यों लगातार बढ़ता–घटता वजन आपके मेटाबॉलिज़्म को नुकसान पहुंचा सकता है
वजन कम करने की कोशिश लगभग हर किसी ने कभी न कभी की है। कभी कुछ हफ्तों में वजन कम हो जाता है, फिर अचानक बढ़ जाता है। यह बार-बार वजन बढ़ने–घटने का सिलसिला सिर्फ निराशाजनक नहीं होता, बल्कि शरीर पर भी गहरा असर डालता है।
इस बारे में अनंत अंबानी और नीता अंबानी के फिटनेस कोच विनोद चन्ना ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट (21 नवंबर) में फैट लॉस से जुड़ी वैज्ञानिक प्रक्रिया को बेहद सरल भाषा में समझाया है।
फैट लॉस वास्तव में कैसे होता है?
विनोद चन्ना कहते हैं—
“इसमें कोई रॉकेट साइंस नहीं है। शरीर तब बदलता है जब वह ऊर्जा के लिए स्टोर की हुई चर्बी का इस्तेमाल करने लगता है।”

वे बताते हैं कि जब लोग:
- वेट ट्रेनिंग बढ़ाते हैं,
- हाई-इंटेंसिटी वर्कलोड पर जाते हैं,
- ज्यादा वजन उठाते हैं,
- और कार्डियो को कम कर देते हैं,
तो शरीर में बड़ा बदलाव शुरू होता है।
कार्डियो क्या करता है?
- कार्डियो सिर्फ उस समय कैलोरी जलाता है, जब आप कर रहे होते हैं।
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग क्या करती है?
- यह शरीर को ऐसा स्टिमुलस देती है, जिससे मेटाबॉलिज़्म तेज होता है
- शरीर घंटों बाद तक कैलोरी जलाता रहता है
- मसल्स बढ़ती हैं और बॉडी टोन होती है
इसी वजह से लोग ज्यादा मस्कुलर दिखने लगते हैं।
संतुलन ही है असली फैट लॉस की कुंजी
विनोद चन्ना के अनुसार—
“जब ज़रूरत हो, तब स्ट्रेंथ ट्रेनिंग बढ़ाई जाती है। इससे शरीर जल्दी प्रतिक्रिया देता है और फैट तेजी से घटता है।”
लेकिन शरीर हमेशा एक जैसी प्रतिक्रिया नहीं देता।
ऐसे में:
- वर्कआउट पैटर्न बढ़ाया या घटाया जाता है
- एक्सरसाइज की तीव्रता बदली जाती है
- रिपीटेशन, सेट्स, वॉल्यूम और रेस्ट टाइम समायोजित किए जाते हैं
इसे ही असली फिटनेस बैलेंसिंग कहा जाता है।
पोषण—आधे से ज़्यादा खेल
विनोद कहते हैं—
“फैट लॉस सिर्फ जिम पर निर्भर नहीं करता, बल्कि डाइट पर भी उतना ही निर्भर करता है।”
इसमें शामिल है:
- कैलोरी बैलेंस
- प्रोटीन बढ़ाना
- सही कार्ब्स
- हेल्दी फैट्स
- समय पर भोजन
जब शरीर की प्रतिक्रिया के अनुसार डाइट को बढ़ाया–घटाया जाता है, तभी असली ट्रांसफॉर्मेशन होता है।
उनके मुताबिक—
“यह पूरा सिस्टम विज्ञान पर आधारित है और अब तक इससे कोई साइड इफेक्ट नहीं देखा गया है।”

क्यों लगातार बढ़ता–घटता वजन नुकसानदेह है?
बार-बार वेट फ्लक्चुएशन से:
- मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है
- मसल लॉस बढ़ सकता है
- शरीर तनाव में रहता है
- हार्मोनल असंतुलन पैदा होता है
इसलिए सिर्फ वजन नहीं, बल्कि फैट प्रतिशत कम करना ही असली फिटनेस है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
फिटनेस इंडस्ट्री के अनुसार, लंबे समय तक टिकाऊ परिणाम तभी मिलते हैं जब:
- वर्कआउट और पोषण का सही संतुलन बना रहे
- मसल्स मजबूत हों
- नींद और रिकवरी को प्राथमिकता दी जाए
- कार्डियो और वेट ट्रेनिंग दोनों का सही इस्तेमाल हो
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी फिटनेस या मेडिकल सलाह के लिए अपने डॉक्टर या प्रमाणित ट्रेनर से संपर्क करें।
