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1 डॉलर की कीमत 90 रुपये के पार—भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा, इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई?
अमेरिका–भारत ट्रेड डील में देरी, विदेशी निवेश की निकासी और RBI की सीमित दखलअंदाज़ी ने रुपये को किया कमजोर; 2025 के सबसे खराब फॉरेक्स परफॉर्मर्स में शामिल
भारतीय रुपये ने बुधवार को इतिहास में पहली बार 90 INR प्रति डॉलर का स्तर छू लिया। विदेशी मुद्रा बाज़ार में लगातार दबाव और ट्रेड डील की अनिश्चितता ने रुपये को रिकॉर्ड निचले स्तर तक धकेल दिया है।
बुधवार सुबह रुपये ने 90.13/USD का निचला स्तर छुआ, जो मंगलवार के पिछले रिकॉर्ड 89.9475 से भी नीचे था। सुबह 8:04 AM UTC तक, रुपया ₹90.26 प्रति डॉलर पर ट्रेड कर रहा था।
अंतरराष्ट्रीय एजेंसी AFP ने भारतीय रुपये को 2025 के सबसे कमजोर फॉरेक्स परफॉर्मर्स में से एक बताया है।

रुपये में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई?
विशेषज्ञ इसके तीन बड़े कारण मानते हैं—
1. भारत–अमेरिका ट्रेड डील में देरी
भारत–अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील लंबे समय से अटकी हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार,
- हर दिन डील में देरी
- व्यापार घाटा बढ़ने
- और डॉलर की मांग में बढ़ोतरी
से रुपये पर भारी दबाव बना हुआ है।
HSBC सिंगापुर की एशिया FX प्रमुख जोई च्यू के अनुसार—
“ट्रेड डील न होने से डॉलर की मांग बढ़ रही है और सप्लाई घट रही है, जिससे USD/INR ऊपर जा रहा है।”
2. फॉरेन फंड आउटफ्लो और मांग–आपूर्ति का असंतुलन
HDFC Securities के विश्लेषक दिलीप परमार कहते हैं कि रुपये की कमजोरी का सबसे बड़ा कारण मांग और आपूर्ति का असंतुलन है।
- विदेशी निवेशक लगातार पैसा निकाल रहे हैं
- अक्टूबर में इनफ्लो दिखा था, लेकिन तब से फ्लो लगभग फ्लैट है
- डॉलर की मांग बढ़ रही है, जबकि सप्लाई अनियमित है
यह स्थिति रुपये को लगातार कमजोर कर रही है।
3. RBI की सीमित दखलअंदाज़ी
रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया इस बार पहले की तरह आक्रामक तरीके से हस्तक्षेप नहीं कर रहा।
SAMCO Securities के विश्लेषक राज गैकर के अनुसार—
“मुद्रास्फीति उम्मीद से कम है, इसलिए RBI अब ग्रोथ को सपोर्ट करने पर ध्यान दे रहा है, न कि डॉलर बेचकर मुद्रा को मजबूती देने पर।”
RBI ने इस वर्ष कई मौकों पर डॉलर बेचकर रुपये को संभाला, लेकिन उसने मुद्रा को अधिक लचीला रहने देने का संकेत भी दिया है।

विदेशी निवेशकों का धैर्य टूट रहा
HSBC की रिपोर्ट के अनुसार—
- अक्टूबर में एक महीने तक नेट इनफ्लो था
- लेकिन ट्रेड डील पर नई खबरें न आने से निवेशक धीरे–धीरे बाहर निकल रहे हैं
इससे रुपये पर और दबाव बढ़ गया है।
CEA का बयान—“रुपये की कमजोरी चिंता का विषय नहीं”
भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि रुपये की कमजोरी से
- न तो मंहगाई बढ़ेगी
- और न ही एक्सपोर्ट पर बड़ा असर पड़ेगा
उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25% दंडात्मक टैरिफ को जल्द वापस ले सकता है।
उन्होंने भरोसा जताया—
“अगले कुछ महीनों में इस विवाद का समाधान हो जाएगा।”
क्या रुपये के लिए आगे और गिरावट संभव?
विशेषज्ञ मानते हैं कि—
- अगर ट्रेड डील पर जल्द प्रगति नहीं हुई
- विदेशी फंड आउटफ्लो जारी रहा
- और RBI ने सीमित हस्तक्षेप जारी रखा
तो रुपये पर दबाव बना रह सकता है।
हालाँकि,
- IMF प्रोजेक्शंस
- और भारत की स्थिर मुद्रास्फीति
कुछ राहत देने वाले कारक हैं।
