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Lionel Messi के इंडिया टूर पर Abhinav Bindra का दर्द, बोले – क्या हम खेल संस्कृति बना रहे हैं या सिर्फ सितारों को दूर से पूज रहे हैं
Messi mania के बीच Olympic Gold Medallist Abhinav Bindra ने उठाया बड़ा सवाल, भारत के खेल भविष्य पर जताई गहरी चिंता
भारत में इन दिनों Lionel Messi का नाम हर जुबान पर है। चार शहरों के दौरे, वीआईपी इवेंट्स, सेलिब्रिटी मुलाकातें और भारी मीडिया कवरेज के बीच अर्जेंटीना के इस दिग्गज फुटबॉलर को देखने के लिए फैंस की भारी भीड़ उमड़ी। लेकिन इसी ‘Messi mania’ के बीच भारत के ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट Abhinav Bindra ने एक ऐसा सवाल खड़ा कर दिया, जिसने खेल प्रेमियों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
Abhinav Bindra, जिन्होंने भारत को शूटिंग में पहला व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण पदक दिलाया, ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबा और भावुक पोस्ट लिखा। इसमें उन्होंने साफ किया कि उनकी बात Lionel Messi के खिलाफ नहीं है। Bindra ने Messi को एक असाधारण खिलाड़ी बताया, जिसकी यात्रा खेल से कहीं आगे जाती है।
Bindra ने लिखा कि Messi जैसे खिलाड़ी का संघर्ष, उसकी मेहनत और उसकी उपलब्धियां दुनियाभर के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि आधुनिक खेलों में ब्रांडिंग, कमर्शियल वैल्यू और ग्लोबल आइकॉन्स की अहम भूमिका होती है। लेकिन इसके बावजूद, Messi के भारत दौरे का पैमाना उन्हें अंदर से बेचैन कर गया।
उनका सवाल सीधा और कड़ा था – क्या भारत सच में खेलों की मजबूत संस्कृति बना रहा है या फिर हम सिर्फ बड़े अंतरराष्ट्रीय सितारों की झलक पाने तक सीमित रह गए हैं? Bindra ने चिंता जताई कि जिस समय करोड़ों रुपये चार शहरों के इस दौरे पर खर्च हो रहे हैं, उसी वक्त देश में जमीनी स्तर पर खेल ढांचा अब भी जूझ रहा है।
उन्होंने लिखा कि भारत में आज भी कई बच्चे ऐसे हैं, जिनके पास खेलने के लिए सही मैदान नहीं हैं। कई जगहों पर योग्य कोचों की कमी है और टैलेंट को पहचानने व निखारने की व्यवस्थित व्यवस्था कमजोर है। Bindra के मुताबिक, अगर इसी ऊर्जा और निवेश का एक छोटा हिस्सा भी ग्राउंड लेवल स्पोर्ट्स पर लगाया जाए, तो तस्वीर कहीं ज्यादा मजबूत हो सकती है।

Abhinav Bindra ने यह भी कहा कि महान खेल राष्ट्र किसी एक बड़े इवेंट या चमकदार पल से नहीं बनते। वे मजबूत सिस्टम, धैर्य और उस आम बच्चे पर भरोसे से बनते हैं, जिसके पास असाधारण सपना होता है। उनके शब्दों में, खेल को तमाशा नहीं बल्कि रोजमर्रा की आदत, शिक्षक और आत्मसम्मान का जरिया बनाना होगा।
Bindra ने माना कि Lionel Messi जैसे खिलाड़ी पूरी पीढ़ी को प्रेरित करते हैं और यह प्रेरणा बेहद जरूरी है। लेकिन सिर्फ प्रेरणा काफी नहीं है। अगर उस प्रेरणा को सही दिशा, संसाधन और दीर्घकालिक सोच न मिले, तो वह खोखली साबित होती है।
अपने पोस्ट के अंत में Bindra ने कहा कि अगर हम सच में Messi जैसे दिग्गजों का सम्मान करना चाहते हैं, तो इसका सबसे सही तरीका बड़े आयोजनों से ज्यादा यह सुनिश्चित करना है कि भारत के किसी कोने में एक बच्चे को खेलने का मैदान मिले, एक कोच मिले जो उस पर भरोसा करे और सपने देखने का मौका मिले। वहीं से असली खेल संस्कृति जन्म लेती है और वहीं से विरासत आगे बढ़ती है।

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