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Vijay की सरकार क्यों नहीं बनी? Kasthuri Shankar ने बताई असली वजह “यहीं हुई बड़ी गलती”
107 सीटें जीतकर भी राज्यपाल के दरबार से खाली हाथ लौटे Vijay — BJP की Kasthuri ने खोला राज़
Tamil Nadu में Vijay की Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) की जीत का जश्न ज़्यादा देर नहीं टिका। 107 सीटें जीतने के बावजूद राज्यपाल Rajendra Vishwanath Arlekar ने TVK को सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया — और इसकी एक बेहद ठोस वजह सामने आई है।
अब इस पूरे विवाद पर अभिनेत्री और Bharatiya Janata Party की सदस्य Kasthuri Shankar ने खुलकर बात की है।
Kasthuri ने बताई वो गलती जो Vijay को भारी पड़ी
ANI से बात करते हुए Kasthuri Shankar ने पहले Vijay को मिले “शानदार जनादेश” के लिए बधाई दी। लेकिन इसके बाद उन्होंने उस बड़ी चूक की तरफ इशारा किया जिसने Vijay की राह में रोड़ा अटका दिया।
उन्होंने कहा, “जब Vijay राज्यपाल के पास सरकार बनाने का अवसर माँगने गए, तो वो खुद को और TVK को 107 सीटों वाली सबसे बड़ी पार्टी के रूप में नहीं, बल्कि एक दो-पार्टी गठबंधन के रूप में लेकर गए। वो Congress के पाँच MLA की सीटें साथ लेकर राज्यपाल के सामने पेश हुए। और यहीं समस्या हुई। क्योंकि अगर आप गठबंधन हैं, तो आपको बहुमत साबित करना होगा — अन्यथा आप राज्यपाल के पास नहीं जा सकते।”
समझिए पूरा खेल — संवैधानिक पेंच
यह पूरा मामला दरअसल संवैधानिक नियमों का है। अगर कोई पार्टी single largest party के रूप में राज्यपाल के पास जाती है, तो उसे बहुमत साबित करने का मौका मिल सकता है। लेकिन अगर वो खुद को coalition के रूप में पेश करे, तो उसे पहले ही बहुमत के आँकड़े दिखाने होते हैं।
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Tamil Nadu में बहुमत का आँकड़ा है 118 — और TVK के पास थीं सिर्फ 107 सीटें। Congress के 5 MLA जोड़ने पर भी कुल 112 बनते हैं — जो बहुमत से 6 कम है।
इस तरह Vijay की strategy ने उन्हें फायदे की जगह नुकसान पहुँचाया।
Tamil Film Industry कर रही है Vijay का समर्थन
इस पूरे विवाद के बीच Tamil फिल्म जगत से आवाज़ें उठ रही हैं। कई कलाकार और हस्तियाँ माँग कर रही हैं कि Vijay को या तो सरकार बनाने का मौका दिया जाए या फिर विधानसभा में floor test कराया जाए। जनता ने जिसे जनादेश दिया, उसे दरकिनार करना लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है — यही तर्क उनके समर्थक दे रहे हैं।

आगे क्या होगा?
Tamil Nadu की राजनीति अभी सबसे दिलचस्प और उलझे हुए दौर से गुज़र रही है। एक तरफ DMK और AIADMK के बीच अभूतपूर्व गठजोड़ की कोशिश, दूसरी तरफ Vijay का अपने बहुमत जुटाने का संघर्ष — और बीच में राज्यपाल का संवैधानिक रुख।
Kasthuri Shankar की यह बात एक बात तो साफ करती है — राजनीति में सिर्फ जनादेश काफी नहीं होता, रणनीति भी उतनी ही ज़रूरी होती है।
