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“नर्क में आपका स्वागत है” — ईरानी अखबार का अमेरिका को खुला चेलैंज: ‘जो सैनिक आएगा, वो ताबूत में जाएगा’

तेहरान टाइम्स का वो फ्रंट पेज जिसने पूरी दुनिया को हिला दिया — अमेरिका के 10,000 अतिरिक्त सैनिक भेजने की खबरों के बीच ईरान ने दो-टूक कहा: ज़मीनी जंग हुई तो बॉडी बैग में लौटेंगे फौजी

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"Welcome To Hell": ईरान का अमेरिका को खुला चेलैंज — ज़मीनी जंग में आए तो ताबूत में जाओगे | Dainik Diary
28 मार्च 2026 को ईरान के अंग्रेज़ी अखबार तेहरान टाइम्स का वो फ्रंट पेज जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया — "WELCOME TO HELL" की हेडलाइन के साथ सैनिकों की तस्वीर और ताबूत की चेतावनी। (फोटो: X/सोशल मीडिया)

तेहरान/वॉशिंगटन — शनिवार की सुबह जब दुनिया भर के लोगों ने ईरान के अंग्रेज़ी अखबार तेहरान टाइम्स का फ्रंट पेज देखा, तो एक पल के लिए सबकी साँस रुक गई। बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा था — “WELCOME TO HELL” (नर्क में आपका स्वागत है)।

इस चेतावनी के साथ एक तस्वीर भी थी — भारी हथियारों से लैस सैनिक एक सैन्य विमान की ओर बढ़ रहे हैं। यह सब एक साथ देखकर संदेश बिल्कुल साफ था: ईरान की धरती पर कदम रखने वाला कोई भी अमेरिकी सैनिक “ताबूत में” वापस जाएगा।

यह कोई आम अखबारी बयानबाज़ी नहीं थी। यह उस वक्त आया जब पूरी दुनिया की निगाहें मध्य पूर्व पर टिकी हैं और जंग का पाँचवाँ हफ्ता चल रहा है।

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10,000 सैनिकों की तैनाती की खबरों से भड़का ईरान

यह चेतावनी उस समय सामने आई जब वॉल स्ट्रीट जर्नल समेत कई अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में यह दावा किया जा रहा था कि अमेरिका मध्य पूर्व में 10,000 अतिरिक्त सैनिक भेजने पर विचार कर रहा है। इस खबर ने अटकलों को हवा दी कि वॉशिंगटन ईरान के अंदर ज़मीनी ऑपरेशन की तैयारी में है।

पेंटागन एक नए चरण की योजना बना रहा है जिसमें पूर्ण युद्ध की जगह सीमित ज़मीनी ऑपरेशन शामिल हैं — और इसी बीच हज़ारों अमेरिकी सैनिक और मरीन पश्चिम एशिया में पहुँच रहे हैं।

"Welcome To Hell": ईरान का अमेरिका को खुला चेलैंज — ज़मीनी जंग में आए तो ताबूत में जाओगे | Dainik Diary


ईरान की बड़ी चेतावनी — हूती भी मैदान में आएंगे

ईरान सिर्फ अखबार से ही नहीं बोला। एक ईरानी अधिकारी ने इससे पहले ही कह दिया था कि अगर अमेरिकी सेना ईरानी ज़मीन पर कदम रखती है, तो तेहरान अपने यमन के हूती सहयोगियों को सक्रिय कर देगा — जो लाल सागर में जहाज़ों पर हमले फिर से शुरू कर देंगे। यह एक नया मोर्चा खुल जाएगा।

इसी बीच शनिवार को ईरान समर्थित हूतियों ने यमन से इज़राइल पर मिसाइल हमला भी किया — जो इस जंग में लाल सागर के शिपिंग मार्गों पर खतरे की आशंका को और गहरा कर रहा है।

ईरान की भौगोलिक ताकत — जिसे नज़रअंदाज़ करना मुश्किल

ईरानी सेना के ब्रिगेडियर जनरल अली जहानशाही ने भी खुलेआम कहा है कि अमेरिकी ज़मीनी घुसपैठ “उनके लिए बेहद खतरनाक और महँगी” साबित होगी। और इतिहास भी यही कहता है — 1980 में सद्दाम हुसैन की ईरान पर चढ़ाई ज़ागरोस पहाड़ों में जाकर रुक गई थी, हज़ारों जानें गई थीं।

ट्रंप का दावा — जंग जल्द खत्म होगी

इस सबके बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि ईरान के साथ शांति वार्ता “बहुत अच्छी तरह” चल रही है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा है कि यह ऑपरेशन “हफ्तों में, महीनों में नहीं” खत्म होगा। ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ ने बताया कि अमेरिका ने तेहरान को युद्धविराम के लिए 15 बिंदुओं की सूची सौंपी है।

लेकिन ज़मीन पर हकीकत कुछ और ही नज़र आ रही है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने शनिवार को खाड़ी देशों को साफ चेतावनी दी कि वे अपनी ज़मीन अमेरिका और इज़राइल को हमले के लिए इस्तेमाल न करने दें — वरना क्षेत्र की स्थिरता खतरे में पड़ जाएगी।

भारत पर असर — तेल और राशन दोनों की चिंता

होर्मुज़ जलडमरूमध्य पहले से ही आंशिक रूप से बंद है जिससे भारत जैसे देशों को तेल की आपूर्ति में दिक्कत हो रही है। अगर लाल सागर में भी हूती हमले फिर शुरू हो गए, तो यह दोहरी मार होगी।

मध्य पूर्व में एक तरफ अमेरिकी सैनिकों के जूते, दूसरी तरफ ईरान के “नर्क में आपका स्वागत” वाले बैनर — और बीच में फँसी दुनिया की वो अर्थव्यवस्था जिसे बस एक शांति की ज़रूरत है।

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