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ईरान ने कुवैत एयरपोर्ट पर दागे ड्रोन, दुबई में अमेरिकी अड्डों पर दावा — खाड़ी देशों को चेतावनी: “हमारे दुश्मनों को अपनी जमीन मत दो”
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दुबई में 500 अमेरिकी सैनिकों पर हमले का दावा किया, लेकिन अमेरिका ने बताया “झूठ” — कुवैत एयरपोर्ट का रडार सिस्टम ड्रोन हमले में क्षतिग्रस्त।
मध्य-पूर्व में जंग का दायरा अब और फैलता जा रहा है। ईरान ने इस बार सीधे खाड़ी देशों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। कुवैत के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ड्रोन हमला हुआ, दुबई में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल दागने का दावा किया गया — और इस सबके बीच ईरानी राष्ट्रपति ने खाड़ी देशों को सीधी चेतावनी दे डाली।
कुवैत एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला
कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कई ड्रोन हमले हुए जिसमें हवाई अड्डे का रडार सिस्टम क्षतिग्रस्त हो गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस हमले में कोई जनहानि नहीं हुई। कुवैत के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के प्रवक्ता ने बाद में स्पष्ट किया कि यह हमला ईरान, उसके प्रॉक्सी संगठनों और उसके समर्थित सशस्त्र गुटों द्वारा किया गया था।
सोचिए — अगर भारत के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का रडार सिस्टम किसी हमले में बंद हो जाए, तो दिल्ली की हवाई सुरक्षा का क्या हाल होगा। कुवैत के साथ कुछ ऐसा ही हुआ।
दुबई में अमेरिकी अड्डों पर ईरान का दावा
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने दुबई में अमेरिकी सेना के दो “छुपे हुए अड्डों” पर सटीक मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जहां 500 से अधिक अमेरिकी सैनिक मौजूद थे। ईरानी प्रवक्ता ने यहां तक कहा कि दुबई में घंटों तक एंबुलेंसें मृत और घायल अमेरिकियों को ले जाती रहीं।
ईरान के इस हमले में Qadr 380 क्रूज़ मिसाइलें इस्तेमाल की गईं — ये स्वदेशी बैलिस्टिक मिसाइलें हैं जिनकी मारक क्षमता 1,000 किलोमीटर तक है।
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अमेरिका ने कहा — सब झूठ है
लेकिन अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इन सभी दावों को सिरे से नकार दिया। US Central Command ने अपने आधिकारिक X अकाउंट पर लिखा कि दुबई में कोई भी अमेरिकी सैनिक हमले का शिकार नहीं हुआ। अमेरिका ने कहा —

“ईरानी शासन सोशल मीडिया पर झूठ फैला रहा है ताकि इस सच्चाई को छुपाया जा सके कि उनकी सैन्य क्षमताएं निर्विवाद रूप से कमज़ोर और बर्बाद हो चुकी हैं।”
यानी दो परमाणु शक्तियों के बीच न सिर्फ मिसाइलें चल रही हैं — बल्कि सूचना युद्ध भी पूरे जोरों पर है।
ईरानी राष्ट्रपति की खाड़ी देशों को खुली चेतावनी
इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात है ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान का वह बयान जो उन्होंने X पर पोस्ट किया। उन्होंने खाड़ी देशों को सीधे शब्दों में कह दिया —
“हम पहले हमला नहीं करते, लेकिन अगर हमारे बुनियादी ढांचे या आर्थिक केंद्रों को निशाना बनाया गया तो हम कड़ा जवाब देंगे।”
और फिर जोड़ा — “क्षेत्र के देशों से कहना चाहता हूं: अगर आप विकास और सुरक्षा चाहते हैं, तो हमारे दुश्मनों को अपनी जमीन से युद्ध चलाने मत दीजिए।”
यह चेतावनी साफ तौर पर सऊदी अरब, UAE, कुवैत, बहरीन और कतर जैसे उन देशों के लिए है जहां अमेरिकी सैन्य अड्डे मौजूद हैं। IRGC प्रवक्ता ने तो यहां तक कह दिया कि यह क्षेत्र “अमेरिकी सैनिकों का कब्रगाह” बन जाएगा।
भारत के लिए खतरे की घंटी
भारत के लिए इस सबका मतलब बेहद गंभीर है। खाड़ी देशों में करीब 90 लाख भारतीय काम करते हैं। दुबई, कुवैत, बहरीन और सऊदी अरब — ये सभी देश अब सीधे तौर पर इस जंग के करीब आते जा रहे हैं। कुवैत एयरपोर्ट पर हमला इसका सबसे ताज़ा उदाहरण है।
इसके अलावा, भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा करता है। अगर होर्मुज़ जलडमरूमध्य या खाड़ी देशों के बंदरगाह प्रभावित हुए तो कच्चे तेल की कीमतें भारत में भी आग लगा सकती हैं।
विदेश मंत्रालय की नज़रें इस पूरी स्थिति पर टिकी हैं — और लाखों भारतीय परिवार बस यही दुआ कर रहे हैं कि उनके अपने सुरक्षित घर लौट सकें।
