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अमेरिका ने भी माना — पाकिस्तान अभी भी आतंकियों का गढ़, भारत को निशाना बनाने वाले संगठन वहीं पल रहे हैं

अमेरिकी संसद की रिपोर्ट में खुलासा — लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद आज भी पाकिस्तानी जमीन पर सक्रिय, और 2025 में आतंकवाद से मरने वालों की संख्या पहुंची 11 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर।

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पाकिस्तान अभी भी आतंकियों की पनाहगाह — अमेरिकी संसद की रिपोर्ट में लश्कर-जैश का जिक्र | Dainik Diary
फाइल फोटो: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी प्रशिक्षण शिविर का प्रतीकात्मक चित्र। अमेरिकी संसदीय रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठन आज भी पाकिस्तानी जमीन पर सक्रिय हैं।

पाकिस्तान बरसों से यह दावा करता आया है कि उसने आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठाए हैं। लेकिन अब खुद अमेरिका की संसद की एक आधिकारिक रिपोर्ट ने इस दावे की हवा निकाल दी है।

अमेरिकी कांग्रेस की शोध संस्था Congressional Research Service (CRS) ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में साफ कहा है कि पाकिस्तान अभी भी कई आतंकवादी संगठनों को अपनी जमीन पर पनाह दे रहा है — और इनमें वे संगठन भी शामिल हैं जो सीधे भारत और कश्मीर को निशाना बनाते हैं।

मुंबई हमले के दोषी अभी भी आजाद

रिपोर्ट में दो नाम खास तौर पर सामने आए हैं — लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद

लश्कर-ए-तैयबा वही संगठन है जिसने नवंबर 2008 में मुंबई पर वह खौफनाक हमला किया था जिसमें 166 निर्दोष लोगों की जान गई थी। ताज होटल से लेकर छत्रपति शिवाजी टर्मिनस तक — उस रात पूरा मुंबई दहल गया था। और जैश-ए-मोहम्मद वह संगठन है जिसने 2001 में भारतीय संसद पर हमले की साजिश रची थी — यानी देश की लोकतंत्र की सबसे बड़ी इमारत पर आतंकी हमला।

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CRS की रिपोर्ट कहती है कि ये दोनों संगठन आज भी पाकिस्तानी धरती पर सक्रिय हैं। वर्षों की सैन्य कार्रवाइयों और नीतिगत उपायों के बावजूद ये समूह “पाकिस्तानी जमीन पर काम करना जारी रखते हैं।”

पाकिस्तान — आतंक का अड्डा भी, निशाना भी

रिपोर्ट में एक और दिलचस्प बात कही गई है — पाकिस्तान खुद भी आतंक का शिकार है। यानी जिस जमीन पर आतंकी संगठनों को पाला जा रहा है, वही जमीन अब उन्हीं के निशाने पर भी आ गई है।

पाकिस्तान अभी भी आतंकियों की पनाहगाह — अमेरिकी संसद की रिपोर्ट में लश्कर-जैश का जिक्र | Dainik Diary


पाकिस्तान में आतंकवाद से जुड़ी मौतों का आंकड़ा एक भयावह तस्वीर पेश करता है। 2019 में यह संख्या गिरकर 365 पर आ गई थी — उम्मीद थी कि हालात सुधर रहे हैं। लेकिन उसके बाद से हर साल यह संख्या बढ़ती रही। और 2025 में यह आंकड़ा 4,001 पर पहुंच गया — जो पिछले 11 सालों का सबसे ऊंचा स्तर है। यानी पाकिस्तान ने जो आग दूसरों के लिए जलाई, उसकी लपटें अब खुद उसे भी झुलसा रही हैं।

भारत के लिए क्या मायने रखती है यह रिपोर्ट?

यह रिपोर्ट ऐसे वक्त आई है जब भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बढ़ाया है और अब खुद अमेरिका जैसे पाकिस्तान के पुराने मित्र देश की संसदीय रिपोर्ट यह मान रही है कि भारत की चिंताएं बेबुनियाद नहीं हैं।

भारत दशकों से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह बात कहता आया है कि पाकिस्तान आतंकवाद को राज्य प्रायोजित तरीके से बढ़ावा देता है। अब जब अमेरिका की अपनी संसद की संस्था यह बात कह रही है, तो पाकिस्तान के पास बचाव के लिए शब्द कम पड़ रहे हैं।

पाकिस्तान की दोहरी नीति कब तक?

यह कोई पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान पर इस तरह की उंगली उठाई गई हो। FATF की ग्रे लिस्ट हो, या संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टें — पाकिस्तान का नाम बार-बार सामने आता रहा है। लेकिन हर बार वह कूटनीति और वादों से काम चलाता रहा।

अब सवाल यह है कि जब अमेरिका जैसा पाकिस्तान का पुराना सहयोगी भी यह मानने लगा है कि आतंकी संगठन वहां सुरक्षित बैठे हैं — तो क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब पाकिस्तान पर और कड़ा दबाव बनाएगा? भारत की नजरें इसी सवाल के जवाब पर टिकी हैं।