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अमेरिका का बड़ा प्लान: ईरान से छीन लेगा परमाणु यूरेनियम? स्पेशल फोर्स भेजने पर विचार
ट्रंप प्रशासन ईरान के समृद्ध यूरेनियम को जब्त करने के लिए विशेष सैन्य अभियान की तैयारी में — संयुक्त राष्ट्र निरीक्षकों को 9 महीने से नहीं मिली यूरेनियम की सही लोकेशन
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बेहद संवेदनशील और साहसी सैन्य योजना पर विचार कर रहे हैं — ईरान की धरती पर स्पेशल फोर्स भेजकर उसके समृद्ध यूरेनियम (Enriched Uranium) को जब्त करना। यह खुलासा अमेरिकी मीडिया संस्थान Bloomberg ने तीन राजनयिक अधिकारियों के हवाले से किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन के भीतर इस बात को लेकर गहरी चिंता बढ़ती जा रही है कि ईरान का अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम का भंडार कहाँ है और क्या उसे किसी गुप्त स्थान पर स्थानांतरित किया जा चुका है। अमेरिकी अधिकारियों की नींद इसलिए उड़ी हुई है क्योंकि पिछले करीब नौ महीनों से संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निरीक्षकों ने इस यूरेनियम की स्थिति की पुष्टि नहीं की है।
जून 2024 के युद्ध के बाद से हालात बदले
यह स्थिति तब से और जटिल हो गई जब पिछले साल जून में अमेरिका और इज़राइल ने संयुक्त रूप से ईरान की प्रमुख परमाणु सुविधाओं पर हमले किए थे। उस 12 दिनों के युद्ध के बाद से IAEA (अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) के निरीक्षक ईरान के परमाणु ठिकानों तक पूरी तरह पहुंच नहीं बना पाए हैं। इसी कारण ईरान के यूरेनियम भंडार की असली तस्वीर अभी तक धुंधली बनी हुई है।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि ईरान ने इस दौरान अपने परमाणु ईंधन को किसी अज्ञात और सुरक्षित जगह छुपा दिया होगा, जिससे भविष्य में परमाणु हथियार बनाने का रास्ता खुला रह सके।
स्पेशल फोर्स ऑपरेशन — कितना जोखिम भरा?
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, ईरान जैसे देश में ग्राउंड स्पेशल फोर्स ऑपरेशन चलाना बेहद जोखिम भरा कदम होगा। ऐसे किसी भी अभियान से अमेरिका और ईरान के बीच सीधे सैन्य टकराव की संभावना बढ़ जाती है, जिसके क्षेत्रीय और वैश्विक परिणाम बहुत गंभीर हो सकते हैं। इसके बावजूद ट्रंप प्रशासन इस विकल्प को पूरी तरह खारिज करने को तैयार नहीं दिख रहा।

ट्रंप पहले भी ईरान पर “अधिकतम दबाव” की नीति अपनाते आए हैं और हाल के हफ्तों में उन्होंने ईरान को परमाणु वार्ता में शामिल होने के लिए कड़ी चेतावनियाँ दी हैं।
ईरान का रुख और परमाणु वार्ता की स्थिति
ईरान लंबे समय से यह कहता आया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। लेकिन पश्चिमी देश और इज़राइल यह मानते हैं कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। 2015 में हुई JCPOA परमाणु डील के टूटने के बाद से ईरान ने यूरेनियम संवर्धन की गति काफी बढ़ा दी है।
Bloomberg की रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब ट्रंप प्रशासन और ईरान के बीच नई परमाणु वार्ता की कोशिशें चल रही हैं, लेकिन दोनों पक्षों में अविश्वास का माहौल बेहद गहरा है।
दुनिया की नज़रें टिकी हैं
यह मामला केवल अमेरिका-ईरान तक सीमित नहीं है। पूरी दुनिया की नज़रें इस पर टिकी हैं। मध्य-पूर्व में पहले से ही अस्थिरता का माहौल है और ऐसे में किसी भी सैन्य कदम के व्यापक असर पड़ सकते हैं। रूस और चीन जैसे देश भी इस घटनाक्रम पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं।
फिलहाल व्हाइट हाउस ने इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
