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बांग्लादेश में उबाल के बीच यूनुस सरकार का बड़ा बयान, भीड़ हिंसा की निंदा और न्याय का वादा
शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद ढाका समेत कई शहरों में प्रदर्शन, पत्रकारों और अल्पसंख्यकों पर हमलों को लेकर सरकार सख्त
बांग्लादेश एक बार फिर राजनीतिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद देश की राजधानी ढाका समेत कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए भीड़ हिंसा की कड़ी निंदा की और साफ कहा कि “नए बांग्लादेश” में नफरत, उकसावे और हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है।
अपने टेलीविज़न संबोधन में मुहम्मद यूनुस ने कहा कि यह समय लोकतांत्रिक परिवर्तन का है और आने वाले चुनाव व जनमत संग्रह देश के भविष्य से जुड़े हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी प्रक्रिया उन बलिदानों से जुड़ी है, जो हाल के दिनों में देश ने देखे हैं। सरकार ने भरोसा दिलाया कि पत्रकारों पर हमले और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के मामलों में दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
हादी की मौत के बाद माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। बताया जा रहा है कि वह पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की नीतियों के मुखर आलोचक थे और भारत के साथ उनकी नजदीकियों का भी विरोध करते थे। इसी पृष्ठभूमि में चटगांव में भारत के सहायक उच्चायुक्त के आवास पर हमला हुआ, जिसने हालात को और संवेदनशील बना दिया।
ढाका में हालात तब और बिगड़ गए जब देर रात आगजनी की कई घटनाएं सामने आईं। देश के दो प्रमुख अखबारों—प्रथम आलो और डेली स्टार—के दफ्तरों को निशाना बनाया गया। इसके अलावा हसीना सरकार में मंत्री रह चुके मोहीबुल हसन चौधरी नऊफेल के घर में भी आग लगा दी गई। इन घटनाओं ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक असहमति की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

छात्र संगठनों की सक्रियता भी इस आंदोलन का बड़ा चेहरा बनकर उभरी है। ढाका यूनिवर्सिटी कैंपस में कई छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किए। जातीय छात्र शक्ति नामक संगठन ने शोक जुलूस निकाला, जो शाहबाग से होते हुए मुख्य प्रदर्शन स्थल तक पहुंचा। इस दौरान छात्रों ने गृह सलाहकार और सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल जहांगीर आलम चौधरी का पुतला फूंका और हादी पर हुए हमले के आरोपियों की गिरफ्तारी में कथित विफलता को लेकर उनके इस्तीफे की मांग की।
यूनुस सरकार ने विशेष तौर पर मयमनसिंह में एक हिंदू व्यक्ति की कथित लिंचिंग की निंदा की। सरकार का कहना है कि अल्पसंख्यकों पर हमला बांग्लादेश की मूल भावना के खिलाफ है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और कई संदिग्धों की गिरफ्तारी भी हुई है।
फिलहाल बांग्लादेश एक नाजुक मोड़ पर खड़ा है। एक तरफ लोकतांत्रिक बदलाव की उम्मीदें हैं, तो दूसरी ओर हिंसा और असंतोष का खतरा। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यूनुस सरकार अपने वादों पर कितनी तेजी और मजबूती से अमल कर पाती है।
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