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IndiGo फ्लाइट कैंसिलेशन कांड: सिर्फ DGCA का मुआवज़ा ही नहीं, यात्री उससे कहीं ज़्यादा हक़दार – जानिए अपने पूरे अधिकार
DGCA के नियम सिर्फ़ ‘न्यूनतम राहत’ हैं, छत नहीं – Justice Sangita Dhingra Sehgal के मुताबिक़ यात्री मानसिक पीड़ा, मिस्ड डील, होटल लॉस और हर असली नुकसान की भरपाई तक दावा कर सकते हैं।
देश की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo जबरदस्त संकट से गुजर रही है। दिसंबर 2025 में हज़ारों फ्लाइट्स के कैंसिल और देरी ने यात्रियों को एयरपोर्ट पर घंटों फंसा दिया, शादियाँ बिगड़ीं, बिज़नेस मीटिंग छूट गईं और लोग मानसिक तनाव से गुजरते रहे। इस बीच Directorate General of Civil Aviation (DGCA) के नियमों के तहत जो मुआवज़ा तय है, उसी को अंतिम मानकर बहुत से यात्री चुपचाप घर लौट आए।
लेकिन दिल्ली स्टेट कंज्यूमर कमीशन की अध्यक्ष और पूर्व हाई कोर्ट जज Justice Sangita Dhingra Sehgal ने साफ कहा है – “DGCA का मुआवज़ा न्यूनतम राहत है, इसकी जगह यहीं बातचीत ख़त्म नहीं होती।”
DGCA क्या देता है? और लोग यहीं रुक क्यों जाते हैं?
DGCA के Civil Aviation Requirements (CAR) के तहत अगर आपकी फ्लाइट कैंसिल या काफी देरी से है, तो एयरलाइन की ज़िम्मेदारी है कि:
- पूरा रिफंड दे या
- बिना अतिरिक्त पैसे के दूसरी फ्लाइट में रीरूट करे
- लंबी देरी पर भोजन, रिफ्रेशमेंट, होटल स्टे और एयरपोर्ट–होटल ट्रांसफर की व्यवस्था करे
अगर फ्लाइट 24 घंटे से ज़्यादा पहले कैंसिल की गई है, तो विकल्प यात्री चुनता है – रिफंड या दूसरी फ्लाइट।
लेकिन अगर उड़ान से 24 घंटे के भीतर कैंसिल/डिले होती है, तो एयरलाइन पर और ज़िम्मेदारियाँ बढ़ जाती हैं।
ये सब ज़रूरी है, पर यहीं कहानी खत्म नहीं होती।
“फ्लोर, नॉट सीलिंग” – यानी यह सिर्फ़ बेसिक शुरूआत है
Justice Sangita Dhingra Sehgal का साफ कहना है कि DGCA के तहत जो मुआवज़ा मिलता है, वह सिर्फ़ statutory minimum relief है। इसके ऊपर भी आप दावा कर सकते हैं, अगर –
- आपकी बिज़नेस डील छूट गई
- नॉन–रिफंडेबल होटल बुकिंग या टूर पैकेज का नुकसान हुआ
- आगे की कनेक्टिंग फ्लाइट मिस हो गई
- आप मानसिक पीड़ा, तनाव, अपमान या हैरसमेंट साबित कर सकें
यानी अगर एयरलाइन की लापरवाही से आपका असली नुकसान हुआ है, तो आप सिर्फ़ “टिकट का पैसा वापस” तक सीमित नहीं हैं।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कंज्यूमर फोरम पहले भी एयरलाइंस के खिलाफ कड़ा रुख़ अपना चुकी हैं – जैसे:
- Kingfisher Airlines Ltd. v. Praveen Kumar (2014) – यहाँ मानसिक उत्पीड़न और आर्थिक नुकसान दोनों के लिए मुआवज़ा दिया गया।
- Jet Airways v. Inderjeet Singh (2017) – कनेक्टिंग फ्लाइट मिस होने पर अतिरिक्त क्षतिपूर्ति दी गई।
इन केसों ने ये सिद्धांत मज़बूत किया कि DGCA मुआवज़ा = फ़्लोर (नींव), सीलिंग (ऊपरी सीमा) नहीं।
Consumer Protection Act 2019: यात्री सिर्फ “पैसेंजर” नहीं, कंज्यूमर भी हैं
Consumer Protection Act, 2019 के तहत एयरलाइन सर्विस साफ–साफ “service” की परिभाषा में आती है।
इसलिए यात्री:
- Deficiency in service
- Unfair trade practice
- Overcharging
- Negligence
जैसे आधारों पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
मतलब अगर:
- फ्लाइट कैंसिल हुई,
- कस्टमर केयर फोन नहीं उठा,
- एयरपोर्ट पर सही जानकारी नहीं दी गई,
- मुआवज़े की प्रक्रिया में जान–बूझकर देरी की गई,
तो ये सब मिलकर “deficiency in service” बन सकता है – और इसके लिए आप District / State / National Consumer Commission में केस कर सकते हैं।

क्या IndiGo की तरफ़ से रिफंड और होटल देना ही काफी है?
IndiGo ने हज़ारों फ्लाइट्स कैंसिल होने के बाद:
- टिकट रिफंड,
- दूसरी फ्लाइट की व्यवस्था,
- कई जगह होटल और स्टे की सुविधा
जैसे कदम उठाए। ये सब DGCA के बेसिक नियमों के दायरे में तो आता है, लेकिन Justice Sehgal के मुताबिक़ “काफी” नहीं है।
क्योंकि:
- एयरपोर्ट पर घंटों लाइनों में लगे यात्री
- हेल्पलाइन पर घंटों होल्ड पर रहने वाले लोग
- लास्ट-मिनट में महंगे टिकट लेकर, फिर भी समय पर ना पहुंच पाने वाले परिवार
- पिता की अंत्येष्टि, शादी, इंटरव्यू, एग्ज़ाम, सर्जरी जैसी ज़रूरी घटनाएं मिस होने वाली कहानियाँ
इन सबका कोई सरल “रिफंड फॉर्मूला” नहीं होता।
क्या मिल सकता है यात्रियों को ‘अतिरिक्त’ मुआवज़ा?
यदि आप ये साबित कर दें कि –
- एयरलाइन ने समय रहते सूचना नहीं दी,
- जान–बूझकर या लापरवाही के कारण आपकी हानि हुई,
- आपको उचित विकल्प, सहायता या पारदर्शी जानकारी नहीं मिली,
तो कंज्यूमर फोरम:
- टिकट से कई गुना ज़्यादा राशि तक compensation
- मानसिक पीड़ा, तनाव, हैरसमेंट के लिए अलग–से damages
- कोर्ट कॉस्ट और वकील फीस तक दिला सकता है।
पूर्व मुख्यमंत्री Prithviraj Chavan ने तो यहां तक सुझाव दिया कि IndiGo को यात्रियों के लिए 1000 करोड़ का compensation fund बनाना चाहिए, ताकि बड़े पैमाने पर हुए नुकसान की भरपाई हो सके।
National Air Passenger Rights Charter की ज़रूरत क्यों?
Justice Sehgal ने साफ कहा कि अब समय आ गया है कि भारत में एक National Air Passenger Rights Charter बने, जिसमें:
- फ्लाइट डिले/कैंसिलेशन पर क्लियर, एक समान नियम
- सभी एयरलाइंस के लिए एक जैसी न्यूनतम सुविधाएँ
- मुआवज़ा और अतिरिक्त दावा करने की पारदर्शी प्रक्रिया
लिखित और कानूनन बाध्यकारी हो।
इसके साथ ही कुछ व्यावहारिक सुझाव भी दिए गए:
- रीयल–टाइम SMS, WhatsApp, ईमेल अलर्ट
- कैंसिलेशन की असली वजह का सार्वजनिक खुलासा
- होटल लॉस, कनेक्टिंग फ्लाइट लॉस जैसे consequential losses के लिए क्लेम पोर्टल
- लंबी वैधता वाले क्रेडिट वाउचर
- बुज़ुर्ग, दिव्यांग और छोटे बच्चों वाले परिवारों के लिए प्रायोरिटी असिस्टेंस
- एयरपोर्ट पर डेडिकेटेड हेल्प डेस्क
Consumer Forums की हालत: मामले ज़्यादा, स्टाफ कम
Justice Sehgal के मुताबिक़ देश भर में कंज्यूमर फोरम्स ने अब तक लगभग 29 लाख से ज़्यादा केस निपटाए हैं, लेकिन फिर भी करीब 5.4–5.5 लाख केस पेंडिंग हैं।
कारण:
- कई राज्य और ज़िला आयोग बिना पूरे स्टाफ के चल रहे हैं
- कोर्ट रूम, रिकॉर्ड मैनेजमेंट और डिजिटल सिस्टम की कमी
- लगातार तारीख़ें मिलना, आदेशों की execution में देरी
इसके बावजूद, उन्होंने माना कि कंज्यूमर सिस्टम ने आम उपभोक्ता को न्याय के लिए एक मजबूत मंच दिया है—बस स्ट्रक्चरल सुधार की ज़रूरत है।
मेडिकल और लीगल सर्विसेज़ पर चल रही बहस
Consumer Protection Act, 2019 में मेडिकल सर्विस का नाम अलग से नहीं लिखा, जिससे कई लोगों को भ्रम हो गया कि अब मेडिकल नेग्लिजेंस की शिकायत कंज्यूमर फोरम में नहीं हो सकती।
Justice Sehgal ने स्पष्ट किया कि “service” की परिभाषा “but not limited to” शब्दों के साथ दी गई है, यानी लिस्ट एक्सक्लूसिव नहीं, सिर्फ़ उदाहरण है।
हाल ही में Bar of Indian Lawyers vs. D.K. Gandhi केस में सुप्रीम कोर्ट ने लीगल सर्विस को एक्ट से बाहर माना और साथ ही पुराने फैसले Indian Medical Association vs. V.P. Shantha पर पुनर्विचार की बात कही। इससे यह बहस फिर तेज़ हो गई कि मेडिकल नेग्लिजेंस के लिए सबसे सही मंच कौनसा हो।
लेकिन फिलहाल, मेडिकल मामलों में भी कई फोरम अभी शिकायतें सुन रहे हैं—कानून की अंतिम स्थिति आने वाले समय में और स्पष्ट होगी।
आम यात्रियों और युवा वकीलों के लिए संदेश
Justice Sehgal का संदेश काफ़ी साफ है:
- यात्रियों के लिए:
- अपने अधिकार जानें
- टिकट, ईमेल, मैसेज, बिल – हर चीज़ का रिकॉर्ड रखें
- सिर्फ़ “जो मिल गया, ठीक है” कहकर हार न मानें
- अगर आपके साथ अन्याय हुआ है, तो आवाज़ उठाएँ – लिखित शिकायत करें, कंज्यूमर फोरम जाएँ
- युवा वकीलों और खासकर महिलाओं के लिए:
- न्यायपालिका को संतुलित नज़रिया चाहिए – और महिलाएँ इसमें अहम भूमिका निभा सकती हैं
- अपनी आवाज़ को हल्का न समझें, बेंच पर बैठना भी आपके लिए उतना ही संभव है
- मेहनत, ईमानदारी और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें, इंतज़ार न करें कि कोई आपको जगह दे – खुद जगह बनाइए
निष्कर्ष: IndiGo का संकट, लेकिन सबक पूरे देश के लिए
2025 IndiGo disruption ने साफ दिखा दिया कि जब एक बड़ी एयरलाइन प्लानिंग में गड़बड़ी करती है, तो उसका असर लाखों यात्रियों पर पड़ता है।
सरकार ने किराया कैप, रिफंड आदेश और DGCA की विशेष छूट जैसे कदम उठाए, पर असली सवाल बना रहता है –
क्या हमारे एयर पैसेंजर राइट्स आज की जटिल हवाई यात्रा के लिए काफी मज़बूत हैं?
Justice Sehgal की बात एक लाइन में समझी जा सकती है:
“कानून आपके साथ है, बशर्ते आप खुद भी अपने अधिकारों के साथ खड़े होने को तैयार हों।”
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