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“मैं डॉक्टर नहीं, लेकिन क्वैक भी नहीं” – Sonali Bendre ने कैंसर रिकवरी पर उठे विवाद पर तोड़ी चुप्पी, दिया बड़ा बयान
Autophagy को लेकर मिली आलोचनाओं के बीच Sonali Bendre ने कहा – “यह मेरी जिंदगी का अनुभव है, इलाज का नुस्खा नहीं”
कैंसर सर्वाइवर और बॉलीवुड अभिनेत्री Sonali Bendre एक बार फिर चर्चा में हैं। हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर autophagy और naturopathy को अपनी कैंसर रिकवरी में सहायक बताते हुए एक पोस्ट साझा की थी, जिसके बाद कई मेडिकल एक्सपर्ट्स ने उन्हें निशाने पर ले लिया। डॉक्टरों ने उनके बयान को “quackery प्रोमोट करना” बताया और कहा कि यह लोगों को गुमराह कर सकता है।
लेकिन अब Sonali ने एक लंबा बयान जारी कर साफ कर दिया है कि न तो उन्होंने खुद को डॉक्टर बताया है और न ही वह किसी तरह का झूठा इलाज बेच रही हैं।
Sonali का स्पष्टीकरण: “मैं क्वैक नहीं हूँ”
अपने आधिकारिक X अकाउंट पर Sonali ने लिखा:
“मैंने कभी दावा नहीं किया कि मैं डॉक्टर हूं, लेकिन मैं क्वैक भी नहीं हूं। मैं एक कैंसर सर्वाइवर हूं, जिसने इस बीमारी का डर, दर्द, अनिश्चितता और रिकवरी का सफर खुद जिया है।”
उन्होंने कहा कि उन्होंने जो भी साझा किया है, वह सिर्फ उनका निजी अनुभव है, न कि किसी के लिए इलाज का फॉर्मूला।
“Autophagy ने मेरी मदद की”
Sonali ने बताया कि उन्होंने गहरी रिसर्च और मेडिकल गाइडेंस के बाद autophagy को अपनी रिकवरी रूटीन में शामिल किया, जिससे उन्हें सकारात्मक बदलाव महसूस हुआ।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया:
“हर कैंसर एक जैसा नहीं होता, हर मरीज का इलाज भी अलग होता है। मैंने जो अपनाया, वह मेरे लिए सही था, लेकिन यह किसी और के लिए नहीं भी हो सकता।”
डॉक्टरों की आलोचना बढ़ी
सोशल मीडिया पर कई डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने उनके बयान पर कड़ा विरोध जताया। हेपेटोलॉजिस्ट Cyriac Abby Philips, जिन्हें ऑनलाइन The Liver Doc के नाम से जाना जाता है, ने लिखा कि:
- naturopathy को कैंसर इलाज बताना खतरनाक है
- इससे मरीज सही मेडिकल ट्रीटमेंट में देरी करते हैं
- कई लोग आर्थिक और स्वास्थ्य नुकसान झेलते हैं
उन्होंने यह भी कहा कि FDA ने कई फर्जी कैंसर ट्रीटमेंट्स को लेकर चेतावनी जारी की है।

कैंसर जर्नी: 2018 से 2021 तक का सफर
गौरतलब है कि Sonali को 2018 में स्टेज-4 मेटास्टेटिक कैंसर का पता चला था। उन्होंने New York में आधुनिक मेडिकल उपचार करवाया और 2021 में कैंसर-फ्री घोषित हुईं।
तब से वह लगातार:
- कैंसर अवेयरनेस
- सर्वाइवर सपोर्ट
- मानसिक स्वास्थ्य
को बढ़ावा देने का काम कर रही हैं।
नई बहस: क्या वैकल्पिक उपचार सुरक्षित हैं?
यह विवाद भारत में बढ़ती उस बहस को फिर सामने लाता है जिसमें लोग:
- आयुर्वेद
- naturopathy
- डाइट थेरेपी
- होम्योपैथी
को गंभीर बीमारियों के इलाज के रूप में अपनाने लगे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि:
सहायक उपचार लाभ दे सकते हैं
लेकिन वे आधुनिक चिकित्सा का विकल्प नहीं बन सकते
उदाहरण: हाल ही का विवाद
कुछ महीने पहले भी एक फिटनेस इन्फ्लुएंसर ने कच्चा डाइट और हर्बल जूस से कैंसर ठीक होने का दावा किया था, जिसके बाद उनकी मौत हो गई। इस घटना ने भी सोशल मीडिया पर बड़ा सवाल खड़ा किया था कि गलत जानकारी कितनी घातक हो सकती है।
Sonali का संदेश
Sonali ने अंत में लिखा:
“मैं हमेशा अपनी कहानी ईमानदारी से साझा करती रहूंगी, लेकिन यह कभी भी इलाज लिखने जैसा नहीं होगा। हर व्यक्ति को वही चुनना चाहिए जो उसके लिए सुरक्षित और सही महसूस हो।”
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