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बेंगलुरु टेक्की ने AI से बनाया असली जैसा PAN-Aadhar कार्ड! सोशल मीडिया पर मचा हड़कंप
Google के Nano Banana फीचर से बने नकली पहचान पत्र पर उठे सुरक्षा सवाल, यूज़र्स बोले– “अब कौन करेगा वेरिफाई?”
बेंगलुरु हमेशा से टेक्नोलॉजी और इनोवेशन का हब माना जाता है, लेकिन इस बार यहां के एक टेक्की ने ऐसा प्रयोग किया कि सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। बेंगलुरु के सॉफ्टवेयर इंजीनियर Harveen Singh Chadha ने दावा किया कि उन्होंने Google की नई AI क्षमता Nano Banana (अब Gemini Imaging) का इस्तेमाल करते हुए बेहद वास्तविक दिखने वाले PAN कार्ड और Aadhaar कार्ड तैयार किए।
इस पूरी प्रक्रिया में उन्होंने एक काल्पनिक नाम “Twitterpreet Singh” जोड़कर तस्वीरें साझा कीं, जो पहली नजर में बिल्कुल असली लगती थीं। लेकिन करीब से देखने पर इन कार्ड्स पर छोटा-सा Gemini AI watermark दिखाई देता है, जिससे पता चलता है कि ये AI-जेनरेटेड हैं।
चाधा ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा:
“Nano Banana अच्छा है, लेकिन यहीं समस्या भी है। यह बेहद सटीक नकली पहचान पत्र बना सकता है। पुराने इमेज वेरिफिकेशन सिस्टम फेल हो जाएंगे।”
सोशल मीडिया पर मचा विवाद
AI से बने नकली पहचान पत्रों को लेकर लोगों की प्रतिक्रिया दो हिस्सों में बंट गई।
एक यूज़र ने लिखा:
“Gemini अब SynthID नाम की हिडन फिंगरप्रिंट तकनीक जोड़ता है, जिससे इमेज की असलियत चेक की जा सकती है।”
इसी बीच, Google के नए Gemini 3 अपडेट में एक फीचर भी जोड़ा गया है, जिसमें उपयोगकर्ता किसी तस्वीर को अपलोड करके पूछ सकते हैं कि क्या वह Gemini से बनाई गई है। हालांकि चाधा का कहना था:
“कोई हर डॉक्यूमेंट को Gemini ऐप में स्कैन नहीं करेगा।”

बढ़ती सुरक्षा चिंताएँ
कई लोगों का मानना है कि AI-जनरेटेड पहचान पत्र भविष्य में बड़े सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकते हैं। एक यूज़र ने लिखा:
“जल्द ही होटल, एयरपोर्ट और प्राइवेट संस्थान Aadhaar QR को स्कैन करके वेरिफाई करना शुरू कर देंगे।”
दूसरे यूज़र ने मजाक में कहा:
“Aadhaar कार्ड पर अगर फोटो साफ दिख रही है, तो समझ जाओ नकली है।”
एक अन्य टिप्पणी ने बड़ा मुद्दा उठाया:
“तकनीकी बदलाव हमेशा नुकसान भी लाते हैं। यह सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनेगा।”
क्या बदल जाएगा भविष्य?
AI इमेजिंग तकनीक तेज़ी से विकसित हो रही है। पहले जहां नकली ID बनाना मुश्किल था, अब कोई भी बेसिक जानकारी के आधार पर कुछ सेकंड में पहचान पत्र जैसा डिज़ाइन बना सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि:
- पहचान सत्यापन के नियम बदलेंगे
- QR और ऑनलाइन वेरिफिकेशन अनिवार्य होंगे
- होटल, बैंक और ट्रैवल सेक्टर अपनी प्रक्रिया अपडेट करेंगे
भारत में पहले ही UIDAI Aadhaar वेरिफिकेशन को मजबूत बनाने पर काम कर रहा है।
निष्कर्ष
यह मामला मजाकिया अंदाज़ में शुरू हुआ, लेकिन उसने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है—
क्या AI तकनीक पहचान सुरक्षा के लिए खतरा बन रही है?
सोशल मीडिया पर चल रही बहस बताती है कि आने वाले वर्षों में AI जनरेटेड डॉक्यूमेंट्स से निपटना सरकार और संस्थाओं के लिए बड़ी चुनौती होगी।
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