Connect with us

Politics

देश में आने वाला है सबसे बड़ा राजनीतिक बदलाव! वोटर लिस्ट में बड़ा हटाव, 2027 की जनगणना, ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ और नई सीमांकन प्रक्रिया से बदल जाएगी पूरी तस्वीर

2025 से 2034 के बीच भारत में होने वाले 4 बड़े फैसले—SIR वोटर लिस्ट संशोधन, राष्ट्रीय जनगणना 2027, एकसाथ चुनाव की तैयारी और नए सीमांकन से कई राज्यों की सीटें बदलेंगी।

Published

on

India to See Major Changes: Census 2027, Delimitation, Voter List Revision & One Nation One Election | Dainik Diary
“भारत की चुनावी तस्वीर में बड़ा बदलाव—वोटर लिस्ट, जनगणना, वन नेशन वन इलेक्शन और सीमांकन से बदल जाएगा राजनीतिक नक्शा।”

नई दिल्ली — भारत अगले दस सालों में अपनी राजनीतिक संरचना में बड़े बदलावों से गुजरने वाला है। वोटर लिस्ट से लाखों नाम हटाए जाने की संभावना, 2027 की जनगणना, वन नेशन वन इलेक्शन की तैयारी और सीमांकन (Delimitation) की नई प्रक्रिया—ये चार बड़े कदम देश की चुनावी व्यवस्था को पूरी तरह बदल सकते हैं।

1. 12 राज्यों में वोटर लिस्ट का बड़ा बदलाव—SIR प्रक्रिया शुरू

27 अक्टूबर 2025 को चुनाव आयोग (ECI) ने Special Intensive Revision (SIR) की घोषणा की। यह प्रक्रिया 1 नवंबर 2025 से शुरू हो चुकी है और इसमें 12 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की वोटर लिस्ट दोबारा छानबीन की जा रही है।

योग्यता की तारीख: 1 जनवरी 2026

सबसे बड़ा मामला तब सामने आया जब बिहार में SIR के दौरान 60 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए
अब विपक्ष को डर है कि अगर ऐसा ही उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान जैसे राज्यों में हुआ, तो चुनावी हार-जीत का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।

SIR प्रक्रिया में शामिल राज्य हैं:

  • उत्तर प्रदेश
  • गुजरात
  • राजस्थान
  • मध्य प्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • गोवा

साथ ही
अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप भी शामिल हैं।

हर राज्य के CEO ऑफिस ने इसकी विस्तृत चरणबद्ध टाइमलाइन जारी कर दी है।


2. 2027 में होने जा रही ऐतिहासिक जनगणना—13 साल बाद अपडेट होंगे आंकड़े

2011 के बाद देश में जनगणना दो बार टल चुकी थी। अब सरकार ने 16वीं राष्ट्रीय जनगणना 1 मार्च 2027 को कराने का फैसला लिया है।

बर्फ़ीले/कठिन इलाकों के लिए अलग तारीखें तय की गई हैं:

  • लद्दाख
  • जम्मू-कश्मीर के कठिन क्षेत्र
  • हिमाचल प्रदेश
  • उत्तराखंड

इन क्षेत्रों में जनगणना की तिथि: 1 अक्टूबर 2026

सबसे महत्वपूर्ण बात—
सरकार की योजना के अनुसार इस बार जाति आधारित जनगणना (Caste Census) भी शामिल की जा सकती है, जिससे राजनीति की दिशा पर गहरा असर पड़ेगा।

PTI11 01 2025 000110B

3. ‘वन नेशन वन इलेक्शन’—कब संभव होगा एकसाथ चुनाव?

सरकार लंबे समय से लोकसभा और सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव एकसाथ कराने का लक्ष्य रखती है।

नई रिपोर्टों के अनुसार:

  • सबसे पहले संभावित वर्ष: 2034
  • 2029 के बाद बनने वाली विधानसभा की अवधि कम की जा सकती है, ताकि सभी राज्यों में चुनाव एक साथ हो सकें।

यह कदम:

  • बड़े संवैधानिक संशोधन
  • राज्यों की सहमति
  • बड़े प्रशासनिक सुधार

की मांग करता है।
सरकार को लगता है कि मौजूदा राजनीतिक स्थिति में यह संभव हो सकता है।


4. 2028 से बदल जाएगी राज्यों की लोकसभा सीटें—नया सीमांकन (Delimitation)

भारत में लोकसभा और विधानसभा सीटों का सीमांकन 1976 से फ्रीज रहा है।
42वें और 84वें संविधान संशोधन के बाद तय किया गया था कि 2026 के बाद होने वाली अगली जनगणना के बाद ही सीमांकन खुलेगा।

अब जब जनगणना 2027 में तय हो गई है, तो सीमांकन प्रक्रिया 2028 में शुरू होगी।

इसका सबसे बड़ा असर:

  • उत्तरी राज्यों की सीटें बढ़ेंगी
  • दक्षिणी राज्यों की सीटें घट सकती हैं

क्योंकि:

  • उत्तर भारत में जनसंख्या तेजी से बढ़ी
  • दक्षिण भारत ने जनसंख्या को नियंत्रित रखा

यह आने वाले चुनावों के शक्ति संतुलन को गहराई से बदल सकता है।


भारत में एक ‘नई राजनीतिक रूपरेखा’ की शुरुआत

2025 से 2034 के बीच भारत जिन बदलावों से गुज़रेगा, वे सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि चुनावी और राजनीतिक ढांचे को पूरी तरह नए रूप में ढाल देंगे।

  • वोटर लिस्ट सुधार तय करेंगे किसे वोट का अधिकार मिलेगा
  • जनगणना 2027 एक नई जनसांख्यिकीय तस्वीर पेश करेगी
  • एकसाथ चुनाव से देश की राजनीति का कैलेंडर बदल जाएगा
  • सीमांकन से संसद और राज्यों की सीटों का स्वरूप नया बन जाएगा

यह दशक भारत की लोकतांत्रिक संरचना में सबसे बड़े बदलावों वाला साबित हो सकता है।

अधिक अपडेट के लिए DAINIK DIARY

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *