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कैसे स्कैम और फेक ऐड्स से मेटा ने कमाए 1.3 लाख करोड़ रुपये
नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप की पेरेंट कंपनी Meta ने पिछले साल धोखाधड़ी वाले विज्ञापनों से करीब ₹1.3 लाख करोड़ की कमाई की।
Reuters की एक नई जांच रिपोर्ट ने सोशल मीडिया दिग्गज Meta को मुश्किल में डाल दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, मेटा ने साल 2024 में अपने प्लेटफ़ॉर्म्स Facebook, Instagram और WhatsApp पर चल रहे फ्रॉडulent (धोखाधड़ी वाले) विज्ञापनों से करीब $16 बिलियन (₹1.33 लाख करोड़) की कमाई की
इन विज्ञापनों में फेक इन्वेस्टमेंट स्कीम्स, गैरकानूनी ऑनलाइन जुआ, प्रतिबंधित मेडिकल प्रोडक्ट्स, और AI द्वारा जनरेट किए गए फेक चेहरों का इस्तेमाल किया गया था, जिससे लाखों यूज़र्स ठगी का शिकार बने।
मेटा का सिस्टम — स्कैम रोकने की बजाय उनसे कमाई
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मेटा का एक इंटरनल एल्गोरिदम विज्ञापनों को “फ्रॉड होने की संभावना” के आधार पर स्कोर देता है। लेकिन समस्या ये है कि—

अगर किसी विज्ञापन के 95% तक फ्रॉड होने की संभावना होती है, तभी उसे ब्लॉक किया जाता है।- अगर संभावना 80-90% के बीच है, तो मेटा उसे रोकने की बजाय अधिक शुल्क वसूलता है।
इस तरह, कई संदिग्ध विज्ञापनदाता प्लेटफ़ॉर्म पर बने रहते हैं और Meta उनके विज्ञापनों से पैसे कमाता रहता है।
तीन साल से जारी फेक ऐड्स का खेल
Reuters के मुताबिक, मेटा पिछले तीन सालों से इन विज्ञापनों को रोकने में नाकाम रहा है। इन ऐड्स में शामिल हैं —
- गैरकानूनी ऑनलाइन जुआ प्रचार
- फर्जी निवेश और बीमा स्कीम्स
- प्रतिबंधित दवाइयां और हेल्थ प्रोडक्ट्स
- सरकारी संस्थानों की नकल करने वाले ठगी अभियान
ऐसे विज्ञापन खासतौर पर वरिष्ठ नागरिकों और आर्थिक रूप से कमजोर यूज़र्स को निशाना बनाते हैं।
मेटा की सफाई
रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए मेटा के प्रवक्ता एंडी स्टोन ने कहा कि यह रिपोर्ट “चयनात्मक और भ्रामक” है और यह कंपनी के प्रयासों को गलत ढंग से प्रस्तुत करती है।

उन्होंने यह भी बताया कि —
- पिछले डेढ़ साल में स्कैम ऐड्स की यूज़र रिपोर्टिंग 58% घटी है।
- इसी अवधि में 134 मिलियन फेक ऐड्स मेटा ने हटाए हैं।
हालांकि, ये आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि समस्या अब भी विस्तृत और गंभीर है।
क्यों बढ़ रहा है खतरा
AI तकनीक के आने के बाद ठग अब AI-जनरेटेड चेहरे, फर्जी सेलिब्रिटी प्रमोशन, और क्लोन की गई आवाज़ों का उपयोग कर रहे हैं। इससे यूज़र्स को असली और नकली विज्ञापन में फर्क करना मुश्किल हो गया है।

अगर प्लेटफ़ॉर्म संदिग्ध विज्ञापनदाताओं से पैसा कमाते रहें और उन्हें हटाने के लिए सख्ती न करें, तो यह रुझान भविष्य में और खतरनाक साबित हो सकता है।
निष्कर्ष
मेटा की इस रिपोर्ट ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है — क्या आपकी सोशल मीडिया फीड सचमुच सुरक्षित है?
कहीं ऐसा तो नहीं कि जिन विज्ञापनों पर आप क्लिक कर रहे हैं, वे वही हैं जिन्हें मेटा “संदिग्ध” मानते हुए भी कमाई का जरिया बना रहा है।
