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जोहरान ममदानी और सादिक खान पर ट्रंप का हमला – आस्था को लेकर बढ़ी बहस
न्यूयॉर्क के नए मेयर जोहरान ममदानी और लंदन के मेयर सादिक खान बने इस्लामोफोबिक टिप्पणियों के निशाने पर, दोनों नेताओं ने दिया सशक्त जवाब
न्यूयॉर्क: अमेरिका के नए मेयर जोहरान ममदानी और ब्रिटेन के लंदन के मेयर सादिक खान इन दिनों अपने धार्मिक विश्वास को लेकर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में हैं। दोनों ही नेता अपनी प्रगतिशील नीतियों और मुस्लिम पहचान के कारण ट्रोल्स और कट्टरपंथी आलोचकों के निशाने पर हैं। यहां तक कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी दोनों पर तीखे बयान दिए हैं, जिससे एक बार फिर राजनीति में धर्म आधारित भेदभाव पर चर्चा छिड़ गई है।
ट्रंप के ताने और खान का जवाब
ट्रंप ने सादिक खान को “स्टोन कोल्ड लूज़र” और “टेरेबल मेयर” कहकर निशाना बनाया था। इतना ही नहीं, उन्होंने उन पर शरिया कानून लागू करने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया था। इसके जवाब में सादिक खान ने कहा – “ट्रंप नस्लवादी, सेक्सिस्ट और इस्लामोफोबिक हैं। उनके बयान नफरत को बढ़ावा देते हैं।”
खान, जो खुद एक शौकिया बॉक्सर हैं, ने कहा कि “हम जैसे नेता, जो विविधता और एकता की बात करते हैं, वे उन लोगों के लिए खतरा हैं जो नफरत की राजनीति में विश्वास रखते हैं।”
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जोहरान ममदानी को भी झेलनी पड़ी धार्मिक घृणा
34 वर्षीय डेमोक्रेट जोहरान ममदानी, जिन्होंने हाल ही में न्यूयॉर्क के मेयर चुनाव में जीत दर्ज की, को भी अपने धर्म को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। उनके विरोधियों ने उन्हें “जिहादी” और “हमास समर्थक” तक कह दिया। यहां तक कि एक रेडियो शो में पूर्व गवर्नर एंड्रयू कुओमो ने भी मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि “ममदानी शायद 9/11 जैसे हमले पर खुश होंगे।”
इन सबके बावजूद ममदानी ने डटे रहकर जवाब दिया – “मैं अपने होने पर गर्व करता हूं। न मैं अपना धर्म बदलूंगा, न अपनी पहचान छिपाऊंगा।” उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य न्यूयॉर्क को एक समावेशी और समानता आधारित शहर बनाना है।

साझा संघर्ष, साझा विज़न
दोनों नेताओं की कहानी में कई समानताएं हैं — दोनों मुस्लिम, प्रवासी पृष्ठभूमि से आते हैं, और दोनों ही विविधता, सामाजिक न्याय और एकता की राजनीति के प्रतीक हैं। सादिक खान, एक बस ड्राइवर के बेटे हैं जिन्होंने सार्वजनिक आवास में परवरिश पाई, जबकि ममदानी, भारतीय मूल की प्रसिद्ध फिल्म निर्माता मीरा नायर और समाजशास्त्री महमूद ममदानी के पुत्र हैं।
दोनों नेताओं को उनके “प्रो-पैलेस्टिनियन स्टैंड” के लिए भी आलोचना झेलनी पड़ी, जिसके बाद उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वे यहूदी और मुस्लिम समुदायों के बीच सौहार्द बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं।
सत्ता की सीमाएं और उम्मीदों का बोझ
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों ही मेयरों की राह आसान नहीं है। लंदन के मेयर सादिक खान के पास सीमित अधिकार हैं, जबकि न्यूयॉर्क के मेयर ममदानी को भी कई शक्तिशाली राजनीतिक विरोधियों से निपटना होगा।
राजनीतिक विश्लेषक डैरेन रीड के अनुसार, “चुनाव जीतना एक बात है, लेकिन वादों को पूरा करना दूसरी। ममदानी के सामने बड़ी चुनौती यह होगी कि वे फ्री चाइल्डकेयर, सस्ती हाउसिंग और ट्रांसपोर्ट सुधार जैसे अपने वादों को कैसे निभाते हैं।”
सकारात्मक राजनीति की मिसाल
दोनों ही नेता नफरत और विभाजन की राजनीति के विपरीत खड़े हैं। खान ने लंदन की हवा साफ करने के लिए Ultra Low Emission Zone (ULEZ) जैसी नीतियां लागू कीं, जिसे लेकर उन्हें कड़ी आलोचना झेलनी पड़ी, लेकिन उन्होंने साबित किया कि नेतृत्व का मतलब सिर्फ सत्ता नहीं, बल्कि समाज के लिए कठिन फैसले लेना भी है।
इसी तरह ममदानी ने अपनी डिजिटल-सेवी और युवा-केंद्रित मुहिम के ज़रिए अमेरिकी राजनीति में एक नई सोच लाई है। उन्होंने दिखाया है कि किसी की पहचान उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत हो सकती है।
निष्कर्ष
सादिक खान और जोहरान ममदानी सिर्फ दो राजनेता नहीं, बल्कि दुनिया के उन नेताओं में से हैं जो आस्था और राजनीति के बीच सम्मानजनक संतुलन बनाते हैं। उनके खिलाफ उठने वाली आवाज़ें यह बताती हैं कि आज भी समाज को विविधता को अपनाने की लंबी यात्रा तय करनी है।
