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सम्मान नहीं मिला तो टूट गया मन, Yuvraj Singh ने बताई संन्यास की असली वजह
क्रिकेट से दूर होने का फैसला सिर्फ फिटनेस नहीं, बल्कि दिल से जुड़ा दर्द भी था
भारतीय क्रिकेट के सबसे जुझारू और भावुक खिलाड़ियों में गिने जाने वाले Yuvraj Singh ने अपने करियर को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि क्रिकेट से संन्यास लेने की वजह सिर्फ खराब फॉर्म या फिटनेस नहीं थी, बल्कि वह मानसिक पीड़ा थी, जो उन्हें लगातार अंदर से तोड़ रही थी।
Yuvraj Singh ने साफ शब्दों में कहा कि एक समय ऐसा आया जब उन्हें टीम के भीतर सम्मान की कमी महसूस होने लगी थी। उन्होंने माना कि यह अहसास उनके लिए बेहद तकलीफदेह था और धीरे-धीरे क्रिकेट का वही खेल, जिससे उन्हें प्यार था, बोझ बनने लगा।
सम्मान की कमी ने बढ़ाया मानसिक दबाव
Yuvraj ने कहा कि एक खिलाड़ी के लिए रन बनाना या विकेट लेना जितना जरूरी होता है, उतना ही जरूरी होता है भरोसा और सम्मान। जब बार-बार खुद को साबित करने के बाद भी उस सम्मान की अनुभूति न हो, तो वह इंसान को अंदर से तोड़ देता है।
उन्होंने स्वीकार किया कि वे मानसिक रूप से थक चुके थे। हर सीरीज में यह सोचना कि अब मौका मिलेगा या नहीं, चयन होगा या नहीं—यह सब उनके आत्मविश्वास को धीरे-धीरे खत्म कर रहा था।
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कैंसर से लड़ाई के बाद बदला नजरिया
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझने के बाद Yuvraj Singh ने क्रिकेट में शानदार वापसी की थी। उन्होंने कई अहम पारियां खेलीं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें लगा कि टीम मैनेजमेंट और सिस्टम में उनकी भूमिका पहले जैसी नहीं रही।
Yuvraj के मुताबिक, बीमारी से लड़कर लौटने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि उन्हें अनुभव और योगदान के आधार पर देखा जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यही निराशा उनके फैसले की सबसे बड़ी वजह बनी।
संन्यास का फैसला आसान नहीं था
Yuvraj Singh ने माना कि क्रिकेट छोड़ना उनके लिए सबसे मुश्किल फैसलों में से एक था। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे इस तरह खेल से दूर जाएंगे। लेकिन जब हर दिन दर्द और अनदेखी का एहसास होने लगा, तब उन्होंने खुद के लिए खड़े होने का फैसला किया।
उनके शब्दों में, “जब आपको लगता है कि आपकी मौजूदगी मायने नहीं रखती, तो वहां रुकना खुद से धोखा होता है।”

फैंस और क्रिकेट जगत की प्रतिक्रिया
Yuvraj Singh के इस खुलासे के बाद फैंस भावुक नजर आए। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने कहा कि उन्होंने भारतीय क्रिकेट को अनगिनत यादगार पल दिए, और उनके साथ ऐसा महसूस होना दुखद है।
क्रिकेट विशेषज्ञों का भी मानना है कि Yuvraj जैसे मैच-विनर खिलाड़ी को जिस सम्मान के साथ विदाई मिलनी चाहिए थी, वह शायद नहीं मिल पाई।
Yuvraj Singh की विरासत
छक्कों की बरसात हो या दबाव में खेली गई ऐतिहासिक पारियां—Yuvraj Singh हमेशा भारतीय क्रिकेट की आत्मा का हिस्सा रहेंगे। उनका संन्यास सिर्फ एक खिलाड़ी का जाना नहीं था, बल्कि उस दौर का अंत था, जिसमें जज़्बा और जंग की कहानी शामिल थी।
Yuvraj Singh का यह खुलासा बताता है कि क्रिकेट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि इंसानी भावनाओं की भी परीक्षा है।

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