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आख़िर आतंकवादी Ammonium Nitrate का ही इस्तेमाल क्यों करते हैं? दो बड़े धमाकों के बाद देश में डर और सवाल दोनों बढ़े…
दिल्ली रेड फोर्ट से लेकर श्रीनगर तक लगातार धमाकों में सामने आया एक ही नाम — Ammonium Nitrate, मगर यह साधारण-सा दिखने वाला रसायन इतना ख़तरनाक कैसे?
हाल के दिनों में देश ने दो बड़े धमाकों का दर्द झेला—पहला दिल्ली के ऐतिहासिक Red Fort परिसर में 10 नवंबर को और दूसरा श्रीनगर के Nowgam Police Station में 14 नवंबर की रात को। हैरानी की बात यह कि श्रीनगर वाला धमाका किसी आतंकी हमले के कारण नहीं, बल्कि वहीं जांच के लिए रखी गई बरामद विस्फोटक सामग्री के फट जाने से हुआ। दोनों ही मामलों में जांच एजेंसियों ने जिस रसायन का नाम सबसे पहले सामने किया, वह था—Ammonium Nitrate
लेकिन सवाल यह है कि आतंकवादी अक्सर इसी रसायन को क्यों चुनते हैं? एक साधारण-सी दिखने वाली सफेद क्रिस्टलीय पाउडर आखिर इतना घातक कैसे बन जाती है?
दिखने में खाद, ताकत में विस्फोटक — यही है Ammonium Nitrate का असली खतरा
Ammonium Nitrate मूल रूप से एक नाइट्रोजन-युक्त खाद है, जिसे देशभर में किसान बड़ी मात्रा में उपयोग करते हैं। खेती-किसानी में इसकी मांग अधिक होने से यह आसानी से उपलब्ध भी होता है। यही इसकी सबसे बड़ी समस्या है—आतंकियों को यह छिपकर मिल जाता है, और बिना शक के वे इसकी बड़ी मात्रा जमा कर लेते हैं।

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यह रसायन खुद से विस्फोट नहीं करता। लेकिन जब इसे
- फ्यूल ऑयल,
- डिटोनेटर,
- या किसी तेज़ गर्मी**
के संपर्क में लाया जाए, तो यह अचानक अत्यधिक ताकतवर विस्फोट में बदल जाता है।
इस खासियत के कारण यह खनन और निर्माण उद्योग में भी भारी तोड़-फोड़ वाले कामों में उपयोग होता है।
विस्फोट में क्या होता है? वैज्ञानिक कारण चौंकाते हैं
रसायन विज्ञान के मुताबिक, Ammonium Nitrate को गर्म करने पर यह बहुत तेजी से टूटता है और बड़ी मात्रा में गैस पैदा करता है, जो धमाके को और भी शक्तिशाली बनाती है।
यह रसायन टूटकर बनाता है:
- Nitrous Oxide (N2O)
- Water Vapor (H2O)
- उच्च तापमान पर:
- Nitrogen (N2)
- Oxygen (O2)
- NO2 (reddish-brown toxic gas)
NO2 ही वह गैस है जो धमाके के बाद हवा में लाल-भूरे रंग के बादल बनाती है।
यानी एक खाद दिखने वाला पदार्थ, सही तापमान और ऑर्गेनिक फ्यूल मिलते ही विनाशकारी बम बन जाता है।

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आतंकियों के लिए यह आसान विकल्प क्यों?
- आसान उपलब्धता – भारत जैसा कृषि प्रधान देश, जहाँ इसकी बड़ी मांग है।
- लाइसेंस की ढीली निगरानी – अन्य सैन्य-स्तर के विस्फोटकों की तुलना में इस पर कम प्रतिबंध।
- साधारण वाहनों से ट्रांसपोर्ट संभव – कार, टैक्सी, या छोटे ट्रक तक इसका भार ले जा सकते हैं।
- कम शंका और ज्यादा मात्रा में संग्रह – दिखने में खाद जैसा, इसलिए शक कम होता है।
इन कारणों से आतंकवादी इसे बार-बार चुनते रहे हैं, जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए लगातार चिंता का विषय है।
2012 का कानून — कितना प्रभावी?
भारत सरकार ने 2012 में Ammonium Nitrate Rules लागू किए, जिनके अनुसार
- इसे खुले में बेचना मना है,
- केवल पैक्ड फॉर्म में मिलना चाहिए,
- भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर स्टोरेज जरूरी है,
- ऊँची दीवारें, फायर एक्सटिंग्विशर अनिवार्य हैं,
- इसके इम्पोर्ट और एक्सपोर्ट भी सीमित पोर्ट्स से ही हो सकते हैं।
लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि कानून बनाना काफी नहीं, कड़ाई से पालन ज़रूरी है।
कई बार दोहरे उपयोग (Dual Use) वाले रसायनों पर निगरानी कठिन हो जाती है, क्योंकि वही पदार्थ खेती में मदद भी करता है और गलत हाथों में जाते ही खतरनाक हथियार बन जाता है।
समाधान क्या है?
विशेषज्ञों के अनुसार:
- आधुनिक ट्रैकिंग सिस्टम
- AI आधारित निगरानी
- डीलरों पर सख्त लाइसेंस जांच
- लोगों को जागरूक करना
- संदिग्ध स्टॉक पर तुरंत रिपोर्टिंग
ये कदम ही ऐसे हादसों को रोक सकते हैं।
हाल के धमाकों ने साफ कर दिया है कि दिखने में साधारण वस्तुएँ भी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भारी खतरा बन सकती हैं। यह सिर्फ रसायन नहीं—लापरवाही और कमज़ोर निगरानी का मिश्रण भी किसी बर्बादी की वजह बन सकता है।
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