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“25 साल बाद लोग पूछेंगे—शाहरुख खान कौन? विवेक ओबेरॉय का बड़ा बयान, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस”
कैंसर पीड़ित बच्चों से मिली सीख ने बदल दी विवेक ओबेरॉय की सोच, कहा—फिल्मी शोहरत की उम्र बहुत छोटी होती है।
बॉलीवुड अभिनेता विवेक ओबेरॉय एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार किसी विवाद या फिल्म को लेकर नहीं, बल्कि एक गहरी सोच की वजह से। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि आने वाले सालों में शायद लोग पूछें—
“शाहरुख खान कौन?”
और इसी एक लाइन ने सोशल मीडिया को दो हिस्सों में बांट दिया है।
लेकिन इस लाइन का पूरा मतलब समझने से पहले यह समझना जरूरी है कि विवेक असल में फेम की अस्थायी प्रकृति के बारे में बात कर रहे थे, न कि किसी की तुलना या अवमानना कर रहे थे।
कैंसर से लड़ते बच्चों ने बदली जिंदगी
विवेक बताते हैं कि उनकी मां उन्हें बचपन से ही कैंसर पीड़ित बच्चों से मिलने अस्पताल ले जाती थीं। वहां पहुँचकर उन्हें एहसास हुआ कि असली सफलता क्या होती है।
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उन्होंने कहा कि जब वे बच्चों से मिलते, उनके साथ हंसते-बोलते, या छोटी-छोटी मदद करते—तो उनके अपने संघर्ष बहुत छोटे लगने लगते थे।
विवेक ने यह भी बताया कि कई बार उन्होंने इलाज के लिए आर्थिक मदद की, और डॉक्टरों ने कहा कि सही समय पर पैसा मिल गया, इसलिए बच्चा बच गया।
लेकिन विवेक का जवाब इससे भी गहरा था—
“मैंने कुछ नहीं किया, मैं सिर्फ ईश्वर का माध्यम था।”
“2050 में लोग पूछ सकते हैं—शाहरुख खान कौन?”
इस बयान के संदर्भ में विवेक ने कहा कि इतिहास एक दिन हर किसी को मिटा देता है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा—
आज के कई युवा रणबीर कपूर को जानते हैं, लेकिन यह नहीं जानते कि वह महान अभिनेता राज कपूर के पोते हैं।

इसी तरह, आने वाले 25 साल बाद शायद नई पीढ़ी यह जाने भी न जाने कि शाहरुख खान कौन थे—जिसे आज किंग ऑफ बॉलीवुड कहा जाता है।
विवेक का मकसद किसी स्टार को छोटा दिखाना नहीं, बल्कि यह बताना था कि
“फेम टिकती नहीं, इंसानियत टिकती है।”
सोशल मीडिया पर दो धड़े बन गए
जैसे ही यह बयान वायरल हुआ, सोशल मीडिया पर दो तरह की प्रतिक्रियाएँ आने लगीं—
- कुछ लोग कह रहे हैं कि विवेक की बात सच्ची और कड़वी है।
- कुछ का मानना है कि शाहरुख जैसे मेगास्टार का नाम लेना सही नहीं था।
हालांकि विवेक ने किसी पर निशाना नहीं साधा, बल्कि जीवन की गहराई समझाने की कोशिश की।
नई पीढ़ी, नए सितारे
आज Instagram—जहां हर दिन नए चेहरे वायरल होते हैं—और OTT की दुनिया में 25 साल बहुत बड़ा समय है।
नई पीढ़ी अपने आइकन खुद चुनती है, और पुराने स्टार सिर्फ इतिहास की किताबों में रह जाते हैं।
विवेक का कहना है कि कलाकारों को यह समझना चाहिए कि
शोहरत एक मेहमान है, लेकिन अच्छे काम और दया स्थायी हैं।
