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विवेक अग्निहोत्री का जॉन अब्राहम पर तंज कश्मीर फाइल्स टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद

जॉन अब्राहम ने कहा था कि वे कश्मीर फाइल्स जैसी फिल्में नहीं बनाएंगे जिस पर विवेक अग्निहोत्री ने दिया करारा जवाब

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विवेक अग्निहोत्री जॉन अब्राहम कश्मीर फाइल्स विवाद ने छेड़ी गरमागरम बहस
कश्मीर फाइल्स पर जॉन अब्राहम की टिप्पणी से भड़के विवेक अग्निहोत्री

बॉलीवुड में फिल्मों के साथ-साथ विचारों की टक्कर भी अक्सर सुर्खियों में रहती है। हाल ही में ऐसा ही विवाद सामने आया है जब जॉन अब्राहम ने एक इंटरव्यू में कहा कि वे कभी भी “कश्मीर फाइल्स” जैसी फिल्में नहीं बनाएंगे क्योंकि इस तरह की फिल्में लोगों को “हाइपर-पॉलिटिकल माहौल में प्रभावित करने का काम करती हैं”

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जॉन के इस बयान पर निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा—
“वो प्रोटीन खा सकते हैं, बाइक चला सकते हैं, लेकिन फिल्मों के गंभीर विषयों में उन्हें दखल नहीं देना चाहिए।”

गौरतलब है कि विवेक और जॉन ने साथ में 2007 में बनी फिल्म “धन धना धन गोल” में काम किया था। उस वक्त दोनों के रिश्ते अच्छे बताए जाते थे, लेकिन मौजूदा बयानबाजी ने माहौल को गरमा दिया है।

द बंगाल फाइल्स पर नज़रें

इस पूरे विवाद के बीच विवेक अग्निहोत्री अपनी नई फिल्म “द बंगाल फाइल्स” पर फोकस कर रहे हैं। यह फिल्म 16 अगस्त 1946 के कलकत्ता दंगों की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जो ऑल इंडिया मुस्लिम लीग के “डायरेक्ट एक्शन डे” की मांग के बाद भड़के थे। यह फिल्म उनकी “फाइल्स ट्रिलॉजी” का तीसरा हिस्सा है। इससे पहले वे “द ताशकंद फाइल्स” (2019) और “द कश्मीर फाइल्स” (2022) बना चुके हैं, जिन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला।

जॉन अब्राहम की सोच और विवाद

जॉन अब्राहम अपनी फिल्मों में एक्शन और मसाला एंटरटेनमेंट के लिए जाने जाते हैं। उनका मानना है कि सिनेमा को राजनीति से दूर रहना चाहिए और दर्शकों को सिर्फ मनोरंजन देना चाहिए। लेकिन विवेक अग्निहोत्री जैसे फिल्मकारों का मानना है कि सिनेमा समाज का आईना है और इससे बड़े मुद्दों को उठाना ज़रूरी है।

दर्शकों की प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर इस विवाद को लेकर फैंस बंट गए हैं। कुछ लोग विवेक अग्निहोत्री के समर्थन में हैं तो कुछ जॉन अब्राहम के पक्ष में। एक यूज़र ने लिखा—“जॉन को राजनीति से जुड़े मुद्दों पर बोलने से बचना चाहिए क्योंकि उनकी फिल्में खुद ज्यादा गहराई वाली नहीं होतीं।” वहीं, कुछ का कहना है—“विवेक हर किसी पर हमला करने के बजाय अपनी फिल्म पर ध्यान दें।”

निष्कर्ष

फिल्मी दुनिया में विचारों का मतभेद नया नहीं है। लेकिन जब बहस समाज और राजनीति जैसे संवेदनशील विषयों से जुड़ी हो, तो यह और भी गंभीर हो जाती है। आने वाले वक्त में देखना दिलचस्प होगा कि “द बंगाल फाइल्स” इस विवाद के बीच कितना प्रभाव छोड़ पाती है।

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