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क्या Islamabad बनेगा दुनिया की सबसे बड़ी जंग का अंत? Trump ने Sharif का invite share कर दिया सबकुछ साफ
Pakistan के PM Shehbaz Sharif ने US-Iran वार्ता की मेज़बानी की पेशकश की और Donald Trump ने एक घंटे के भीतर उसे Truth Social पर share कर दिया — दुनिया को जवाब मिल गया।
यह महज एक सोशल मीडिया पोस्ट नहीं था। यह एक कूटनीतिक संकेत था — और दुनिया ने उसे समझ लिया।
मंगलवार की शाम Pakistan के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने X पर लिखा कि Pakistan, US और Iran के बीच “सार्थक और निर्णायक बातचीत” कराने के लिए मेज़बानी करने को तैयार है और इसे एक “सम्मान” बताया। अभी उनकी उंगलियां कीबोर्ड से उठी भी नहीं थीं कि ठीक एक घंटे के भीतर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने उस पोस्ट का screenshot लेकर अपने Truth Social अकाउंट पर चिपका दिया।
राजनीति में इतना बड़ा इशारा काफी होता है।
यह Trump के लिए भी एक बड़ा U-turn था — वही Trump जो बार-बार कह रहे थे कि अमेरिका यह जंग “पहले ही जीत चुका है।” लेकिन अब वही Trump Pakistan को बातचीत का मंच बनाने पर राज़ी दिख रहे हैं।
JD Vance का Islamabad दौरा — इसी हफ्ते?
अमेरिकी मीडिया संस्था Axios ने रिपोर्ट दी है कि Trump के दो सबसे भरोसेमंद लोग — उनके करीबी दोस्त Steve Witkoff और दामाद Jared Kushner — इसी हफ्ते Islamabad में Iran के प्रतिनिधिमंडल से मिल सकते हैं। और सबसे बड़ी खबर यह है कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance भी इन वार्ताओं में शामिल हो सकते हैं।
अगर ऐसा हुआ, तो Pakistan की कूटनीतिक ताकत का यह सबसे बड़ा प्रदर्शन होगा।
Iran ने पहले मज़ाक उड़ाया, फिर माना
Iran के विदेश मंत्रालय ने शुरुआत में Trump के उस दावे को हल्के में लिया जिसमें उन्होंने कहा था कि back-channel बातचीत पहले से चल रही है। लेकिन बाद में Iran की सरकारी समाचार एजेंसी के हवाले से माना गया कि कुछ “मित्र देशों” ने उन्हें संदेश भेजे हैं जिनमें बातचीत की अमेरिकी इच्छा का ज़िक्र था।
Tehran की तरफ से अब तक यह साफ नहीं है कि Islamabad में वार्ता हुई तो Iran का प्रतिनिधित्व कौन करेगा। हालांकि हलकों में Parliament Speaker Mohammad Bagher Ghalibaf का नाम सबसे ज़्यादा चल रहा है — भले ही उनका सार्वजनिक रवैया अभी भी काफी सख्त बना हुआ है।
Pakistan के विदेश मंत्री Ishaq Dar ने बताया कि वे Iran के विदेश मंत्री Abbas Araghchi के साथ लगातार संपर्क में हैं। PM Sharif ने खुद Iran के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian से फोन पर बात की।
पर्दे के पीछे — Field Marshal Asim Munir
इस पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प किरदार शायद वो है जो सामने नहीं आ रहा।
Pakistan के Army Chief Field Marshal Asim Munir की इस पूरे घटनाक्रम में अहम भूमिका बताई जा रही है। Pakistan के पूर्व राजदूत Imran Ali Chaudhry ने एक TV चैनल को बताया कि Munir ने Witkoff और Kushner से करीब ढाई हफ्ते पहले मुलाकात की थी — यानी तब जब यह जंग अपने शुरुआती दौर में थी। हालांकि Munir की तरफ से इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
यह कोई पहली बार नहीं है कि Pakistan, Trump की विदेश नीति में केंद्र में आया हो। May 2025 में India-Pakistan सैन्य टकराव को Trump उन “आठ जंगों” में गिनते हैं जो उन्होंने खत्म कराईं। भले ही India कहता है कि ceasefire Pakistan की गुज़ारिश पर हुई — Pakistan ने बड़े आराम से Trump को credit दे दिया। Munir और Sharif ने तो Trump के लिए Nobel Peace Prize की भी वकालत की।
Modi को Trump का फोन — India ने क्या कहा?
इस पूरे घटनाक्रम के बीच Trump ने भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi को भी फोन किया। Modi ने सोशल मीडिया पर लिखा — “Trump से बात हुई, West Asia की स्थिति पर उपयोगी विचार-विमर्श हुआ। भारत de-escalation और जल्द शांति बहाली का समर्थन करता है। Strait of Hormuz का खुला और सुरक्षित रहना पूरी दुनिया के हित में है।”
Modi ने पिछले सप्ताहांत Iran के राष्ट्रपति Pezeshkian से भी बात की थी, और Gulf देशों के नेताओं से भी — जहाँ अमेरिकी सैन्य अड्डे हैं और जो Iran के हमलों की ज़द में आए हैं।

लेकिन विपक्षी नेता Rahul Gandhi ने इस पर कटाक्ष किया — “हमारी विदेश नीति, PM Modi की निजी विदेश नीति बन गई है। नतीजा सबके सामने है — दुनिया इसे मज़ाक समझती है।”
दुनिया कर रही है मध्यस्थता की कोशिश
Pakistan के अलावा Saudi Arabia, Egypt और Turkey भी सक्रिय रूप से मध्यस्थता में जुटे हैं। Qatar ने भी कहा कि वह “सभी कूटनीतिक प्रयासों” का समर्थन करता है। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio शुक्रवार को France में G7 देशों के अपने समकक्षों से मिलेंगे — जंग शुरू होने के बाद उनकी यह पहली विदेश यात्रा होगी।
जंग अभी रुकी नहीं है
शांति की तमाम कोशिशों के बीच Iran और Israel ने मंगलवार को एक बार फिर एक-दूसरे पर हमले किए। Israel के रक्षा मंत्री ने कहा कि अभियान “पूरी तीव्रता” से जारी रहेगा, जबकि एक अन्य मंत्री ने Trump की बातों को “धीरे-धीरे” लेने की सलाह दी। Iran ने भी जवाबी धमकी दी — “आँख के बदले आँख नहीं, आँख के बदले सिर।”
Israel के PM Benjamin Netanyahu ने अपने करीबी Ron Dermer को किसी भी US-Iran वार्ता पर पैनी नज़र रखने का काम सौंपा है ताकि Israel के हित सुरक्षित रहें।
विशेषज्ञ अभी भी सतर्क हैं। Paris स्थित Jean-Jaures Foundation के Middle East विशेषज्ञ David Khalfa ने AFP से कहा — “मुझे बेहद संदेह है। भरोसा पूरी तरह टूट चुका है और दोनों पक्षों की स्थितियाँ पहले से कहीं ज़्यादा दूर हैं।”
फिर भी, उम्मीद की एक किरण Islamabad की तरफ से आ रही है — और दुनिया उसे देख रही है।
