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ट्रंप की ईरान से पीछे हटने की असली कहानी: पाकिस्तान बना मध्यस्थ, Hegseth पर ठीकरा फोड़ने की तैयारी, और $100 मिलियन का रहस्यमय सौदा जो युद्धविराम से पहले हुआ…
अमेरिका-ईरान युद्ध के चौथे हफ्ते में जो नहीं दिख रहा वो ज़्यादा खतरनाक है — कौन है असली ज़िम्मेदार, कहाँ होगी बातचीत, और किसने करोड़ों कमाए ट्रंप के ऐलान से पहले?
युद्ध के मैदान पर गोले बरस रहे हैं। कूटनीति के गलियारों में फुसफुसाहटें चल रही हैं। और वॉशिंगटन के सत्ता के गलियारों में एक और खेल शुरू हो चुका है — यह तय करने का खेल कि इस युद्ध की ज़िम्मेदारी किसके सिर पर डाली जाए।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 28 फरवरी को जो युद्ध “तेज़ और निर्णायक” बताया था — वो अब अपने चौथे हफ्ते में है। न तेज़ है, न निर्णायक। और अब जो सवाल उठ रहे हैं, वो सिर्फ युद्धभूमि के नहीं — बल्कि व्हाइट हाउस के अंदर के हैं।
Hegseth पर निशाना: ट्रंप ने खुद दिया संकेत
सोमवार की रात टेनेसी में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने अपने रक्षा सचिव पीट हेग्सेथ की ओर इशारा करते हुए कहा — “Pete, मुझे लगता है तुम पहले बोले थे और कहा था — ‘Let’s do it’, क्योंकि हम उन्हें परमाणु हथियार नहीं रखने दे सकते।”
यह बयान उतना सरल नहीं जितना दिखता है। राजनीतिक विश्लेषक इसे एक सुनियोजित संकेत मान रहे हैं — कि अगर यह युद्ध और उलझा, तो हेग्सेथ को बलि का बकरा बनाया जा सकता है। वॉशिंगटन में इस तरह के संकेत कभी बेमतलब नहीं होते।
यह बयान उसी दिन आया जब ट्रंप ने ईरान की ऊर्जा संरचना पर हमले की धमकी को पाँच दिन के लिए टाल दिया था। साथ ही यह भी कहा कि उनके दूत — जिनमें दामाद जेरेड कुशनर और करोबारी दोस्त स्टीव विटकॉफ शामिल हैं — एक “सम्मानित” ईरानी नेता से बातचीत कर रहे हैं। हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि यह सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई नहीं हैं।
अगले ही वाक्य में ट्रंप ने कहा कि वो और अयातुल्ला मिलकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य को नियंत्रित कर सकते हैं। यह बयान दुनिया भर के कूटनीतिक हलकों में गूँज रहा है।
पाकिस्तान: मध्यस्थता की बड़ी भूमिका में
इस पूरे संकट में सबसे चौंकाने वाला नाम है — पाकिस्तान।
रविवार को पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने ट्रंप से सीधी बात की। अगले दिन प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से फोन पर बातचीत की।
फाइनेंशियल टाइम्स और Axios ने रिपोर्ट किया कि मिस्र, पाकिस्तान और तुर्किए के वरिष्ठ अधिकारियों ने अमेरिकी दूत विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के बीच संदेश पहुँचाने का काम किया।
सऊदी अरब, तुर्किए, मिस्र और पाकिस्तान मिलकर एक अनौपचारिक समूह “STEP” बना रहे हैं जो दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम की संभावना तलाश रहा है।
सबसे बड़ी खबर यह है कि इस्लामाबाद को संभावित वार्ता की मेज़बानी मिल सकती है — जिसमें उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विटकॉफ और कुशनर की टीम ईरानी अधिकारियों से मिल सकती है।
पाकिस्तान विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर आंद्राबी ने अखबार Dawn को बताया — “अगर पक्ष चाहें, तो इस्लामाबाद हमेशा वार्ता की मेज़बानी के लिए तैयार है।”
भारत भी पीछे नहीं
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सप्ताहांत में ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान से फोन पर बात की — हालाँकि किसी मध्यस्थता के प्रस्ताव का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया। मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलआटी ने विटकॉफ के साथ “संभावित वार्ता” पर चर्चा की — और तुर्किए, पाकिस्तान, ओमान, सऊदी अरब, यूएई, फ्रांस और साइप्रस के विदेश मंत्रियों से भी बात की।
ईरान का इनकार — पर अंदर से इशारे कुछ और
ईरान आधिकारिक तौर पर किसी भी बातचीत से इनकार कर रहा है। संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ — जो खुद IRGC के पूर्व कमांडर हैं — ने कहा कि सोमवार तक कोई बातचीत नहीं हुई। उन्होंने यहाँ तक आरोप लगाया कि ट्रंप के बयान तेल और वित्तीय बाज़ारों को प्रभावित करने के लिए थे।
लेकिन पर्दे के पीछे की तस्वीर अलग है। CBS News ने ईरानी विदेश मंत्रालय के एक अनाम वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया कि तेहरान को “मध्यस्थों के ज़रिए अमेरिका की बातें मिली हैं और उनकी समीक्षा की जा रही है।”
विदेश मंत्री अराघची ने सोमवार से अज़रबैजान, मिस्र, ओमान, पाकिस्तान, रूस, दक्षिण कोरिया, तुर्किए और तुर्कमेनिस्तान के अपने समकक्षों से बातचीत की है — यह कूटनीतिक सक्रियता खुद एक संकेत है।
$100 मिलियन का रहस्यमय सौदा
अब आते हैं उस हिस्से पर जो इस पूरी कहानी का सबसे विस्फोटक पहलू है।
ट्रंप के Truth Social पर ऐलान से ठीक पहले — कि अमेरिका ईरान से बात कर रहा है और ऊर्जा ढाँचे पर हमले रोक रहा है — अमेरिकी बाज़ारों में दो बड़े सौदे हुए।
पहला: शेयर बाज़ार में $1.5 अरब के सौदे लगाए गए — यह दाँव लगाया गया कि बाज़ार ऊपर जाएगा। और वो ऊपर गया। S&P 500 फ्यूचर्स 2.5% से ज़्यादा उछले।
दूसरा: $192 मिलियन के तेल फ्यूचर्स बेचे गए — यह दाँव लगाया गया कि तेल की कीमतें गिरेंगी। और वो गिरीं। सिर्फ तेल के सौदे से अनुमानित $100 मिलियन से ज़्यादा का मुनाफा हुआ।

NDTV की रिपोर्ट के अनुसार इन सौदों की टाइमिंग ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं — क्या अंदरूनी जानकारी लीक हुई? क्या किसी ने ट्रंप के ऐलान से पहले ही जान लिया था कि क्या होने वाला है?
ईरानी संसद के सदस्य गालिबाफ का आरोप — कि ट्रंप के बयान बाज़ार को प्रभावित करने के लिए थे — इस संदर्भ में और भी वज़नदार लगता है।
अमेरिका के अंदर से भी उठी आवाज़
यह युद्ध सिर्फ बाहर से नहीं, अंदर से भी ट्रंप प्रशासन को हिला रहा है। पिछले हफ्ते जो केंट ने इस्तीफा दिया — और कहा कि यह युद्ध इज़राइल और उसके अमेरिकी “लॉबी” के दबाव में शुरू किया गया।
ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य इस्माइल कौसारी ने Fars News Agency से कहा — “ट्रंप, नेतन्याहू और उनके जैसे लोग स्वाभाविक रूप से झूठे हैं। उनकी फितरत है फूट डालना। हमें सावधानी से सोचना होगा।”
मानवीय संकट: आँकड़े जो दिल दहला दें
इन सभी राजनीतिक और वित्तीय उठापटक के बीच — एक कड़वी सच्चाई है जो नहीं बदली।
ईरान में 1,500 से अधिक मौतें। लेबनान में 1,000 से अधिक — जहाँ इज़राइल हिज़्बुल्लाह को निशाना बनाने का दावा कर रहा है। इज़राइल में 15 और अमेरिकी सैनिक 13। लेबनान और ईरान में लाखों लोग विस्थापित।
AP ने मंगलवार को यह आँकड़े जारी किए — और जब तक यह लेख आप पढ़ रहे हैं, यह संख्या बदल चुकी होगी।
असली सवाल यह है
क्या ट्रंप सच में पीछे हट रहे हैं? क्या पाकिस्तान की मध्यस्थता काम करेगी? क्या हेग्सेथ को बलि का बकरा बनाया जाएगा? और वो $100 मिलियन — किसकी जेब में गए?
अगले पाँच दिन — जो ट्रंप ने ईरान को दिए हैं — इन सवालों के जवाब देंगे। या शायद और सवाल खड़े करेंगे।
