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Syria Homs Mosque Blast: Friday Prayers के दौरान धमाका, Ahmed Khalil बोले “लोग घर से निकलने में डर रहे हैं”

Homs में अलावी बहुल इलाके को बनाया गया निशाना, 8 की मौत 18 घायल

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Syria Homs Mosque Blast: Friday Prayers के दौरान धमाका, Ahmed Khalil बोले “लोग घर से निकलने में डर रहे हैं”
Homs, Syria में मस्जिद धमाके के बाद घटनास्थल पर मौजूद सुरक्षा बल और राहत टीमें

सीरिया के Homs शहर से शुक्रवार को एक बेहद दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। जुमे की नमाज़ के दौरान एक मस्जिद में हुए जोरदार धमाके में कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 18 अन्य घायल बताए जा रहे हैं। यह हमला उस इलाके में हुआ है जहां अलावी समुदाय की आबादी अधिक है, जो सीरिया में एक अल्पसंख्यक समुदाय माना जाता है।

स्थानीय समय के अनुसार, जैसे ही नमाज़ चल रही थी, उसी दौरान मस्जिद के भीतर अचानक विस्फोट हुआ। धमाके की आवाज़ इतनी तेज़ थी कि आसपास के घरों की खिड़कियां तक कांप उठीं। कुछ ही पलों में पूरा इलाका चीख-पुकार, अफरा-तफरी और डर के माहौल में बदल गया।

सीरिया के गृह मंत्रालय ने इस घटना को “terrorist explosion” बताया है। मंत्रालय के अनुसार, मस्जिद को जानबूझकर निशाना बनाया गया ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को नुकसान पहुंचाया जा सके। राज्य समाचार एजेंसी AFP के मुताबिक, शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि विस्फोटक सामग्री पहले से मस्जिद के अंदर लगाई गई थी

Syria Homs Mosque Blast: Friday Prayers के दौरान धमाका, Ahmed Khalil बोले “लोग घर से निकलने में डर रहे हैं”


घटना के बाद मस्जिद और आसपास के पूरे क्षेत्र को सील कर दिया गया। सुरक्षा बलों ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। हमले के बाद इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है।

इस भयावह मंजर के चश्मदीद Ahmed Khalil ने बताया,

“हमने एक बहुत तेज धमाका सुना। उसके बाद हर तरफ अफरा-तफरी मच गई। लोग घर से बाहर निकलने में डर रहे हैं और लगातार एंबुलेंस की आवाजें सुनाई दे रही हैं।”

सीरिया के विदेश मंत्रालय ने भी इस हमले की कड़ी निंदा की है। अपने बयान में मंत्रालय ने कहा कि यह हमला मानवीय और नैतिक मूल्यों पर सीधा प्रहार है और इसका मकसद सीरिया में अस्थिरता फैलाना तथा आम लोगों के हौसले को तोड़ना है।

गौर करने वाली बात यह है कि बीते एक साल में यह किसी धार्मिक स्थल पर हुआ दूसरा बड़ा हमला है। इससे पहले जून महीने में Damascus के एक चर्च में हुए आत्मघाती हमले में 25 लोगों की जान चली गई थी। इन घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सीरिया में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित हो पाई है।

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