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वोडाफोन आइडिया को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, सरकार को AGR बकाया पर पुनर्विचार की अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वोडाफोन आइडिया के AGR बकाया मामले पर पुनर्विचार सरकार के नीति क्षेत्राधिकार में आता है, क्योंकि केंद्र ने कंपनी में 49% हिस्सेदारी ली है।
देश की बड़ी टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया लिमिटेड (Vodafone Idea Ltd) को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली। अदालत ने केंद्र सरकार को कंपनी के एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) बकाया मामले पर पुनर्विचार की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद कंपनी के शेयरों में तेज उछाल देखने को मिला।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा — यह नीति का विषय है
मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ की अनुपस्थिति में, न्यायमूर्ति बी. आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वोडाफोन आइडिया के AGR बकाया का मामला केंद्र सरकार के नीति क्षेत्राधिकार में आता है।
पीठ ने कहा —
“हम स्पष्ट करते हैं कि यह मामला संघ सरकार की नीति के दायरे में आता है। इसमें सरकार को पुनर्विचार करने से रोका नहीं जा सकता।”
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए केंद्र सरकार को आवश्यक नीति निर्णय लेने की छूट दे दी।

केंद्र की 49% हिस्सेदारी
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार ने कंपनी में 49% इक्विटी हिस्सेदारी ली है, जो आंशिक रूप से बकाया के बदले में की गई है।
उन्होंने कहा —
“कंपनी के लगभग 20 करोड़ उपभोक्ता हैं। इन्हीं उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने यह निर्णय लिया था। अगर कंपनी बंद होती, तो लाखों ग्राहकों पर असर पड़ता।”
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह आदेश इसलिए दिया जा रहा है क्योंकि केंद्र सरकार ने उपभोक्ताओं के हित में कंपनी में इक्विटी निवेश किया है।
AGR विवाद क्या है?
AGR (Adjusted Gross Revenue) दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली वह प्रणाली है, जिसके जरिए टेलीकॉम कंपनियों से लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क वसूला जाता है।
टेलीकॉम कंपनियों का मानना था कि AGR की गणना केवल उनके “कोर टेलीकॉम रेवेन्यू” पर होनी चाहिए। लेकिन DoT का कहना था कि इसमें गैर-टेलीकॉम आय, जैसे किराया, ब्याज और संपत्ति की बिक्री से होने वाली आय को भी शामिल किया जाना चाहिए।
2019 में सुप्रीम कोर्ट ने DoT के पक्ष में फैसला दिया
अक्टूबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने DoT की व्याख्या को सही ठहराया और कहा कि कंपनियों को पूरी देनदारी का भुगतान करना होगा।
मार्च 2020 में अदालत ने वोडाफोन आइडिया की बकाया राशि को वित्त वर्ष 2017 तक के लिए अंतिम रूप दे दिया था और किसी भी पुनर्मूल्यांकन या स्व-मूल्यांकन पर रोक लगा दी थी।
वोडाफोन आइडिया की मौजूदा स्थिति
वर्तमान में वोडाफोन आइडिया पर लगभग 83,400 करोड़ INR के AGR बकाया हैं। कुल देनदारी, जिसमें ब्याज, पेनल्टी, लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम शुल्क शामिल हैं, 2 लाख करोड़ INR के करीब है।
कंपनी ने पहले भी सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी कि वह ब्याज और जुर्माने में राहत दे, लेकिन मई 2025 में अदालत ने यह याचिका खारिज कर दी थी।

“बिना राहत के FY26 के बाद चलना मुश्किल”
वोडाफोन आइडिया ने अपने पक्ष में दलील दी थी कि AGR बकाया का बोझ इतना भारी है कि यदि सरकार से राहत नहीं मिली तो कंपनी वित्त वर्ष 2026 के बाद संचालन जारी नहीं रख पाएगी।
बाजार में सकारात्मक संकेत
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सोमवार को वोडाफोन आइडिया के शेयरों में उछाल देखा गया। निवेशकों ने इसे कंपनी के पुनरुद्धार की दिशा में एक अहम कदम माना। विश्लेषकों का कहना है कि अगर केंद्र सरकार राहत का रास्ता निकालती है तो इससे न केवल कंपनी को बल्कि पूरे टेलीकॉम सेक्टर को स्थिरता मिलेगी।
उपभोक्ताओं के हित में कदम
अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यह अनुमति केवल इसलिए दी जा रही है क्योंकि केंद्र सरकार ने उपभोक्ताओं के हित में कंपनी में पूंजी निवेश किया है। इस निर्णय से अब सरकार को AGR बकाया की पुनर्गणना या राहत नीति पर पुनर्विचार करने का अधिकार मिल गया है।
