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एक नकारात्मक बात पूरा दिन बिगाड़ सकती है Smriti Mandhana ने बताया पॉजिटिव रहने का आसान तरीका
Humans of Bombay पॉडकास्ट में स्मृति मंधाना ने शेयर किया फोकस बदलने और सकारात्मक सोच से मानसिक मजबूती पाने का मंत्र
कभी-कभी दिन भर में एक छोटी सी नकारात्मक बात इतनी भारी लगने लगती है कि बाकी सारी अच्छी चीज़ें पीछे छूट जाती हैं। लेकिन भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार खिलाड़ी Smriti Mandhana का मानना है कि अगर इंसान अपना नजरिया थोड़ा बदल ले, तो वही दिन बेहतर भी बन सकता है।
हाल ही में Humans of Bombay के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान स्मृति मंधाना ने खुलकर बताया कि किस तरह फोकस शिफ्ट करना मानसिक शांति और पॉजिटिविटी के लिए बेहद ज़रूरी है। उन्होंने कहा,
“एक नेगेटिव चीज़ जो होती है, वही पूरा दिन खराब कर देती है। जैसे मैच हार जाएं तो हम बस हार ही देखते हैं, लेकिन उस हार में भी कई पॉजिटिव बातें होती हैं।”
हार में भी छुपा होता है सबक
स्मृति के मुताबिक खेल ने उन्हें यह सिखाया है कि हर हार सिर्फ निराशा नहीं होती, बल्कि सीख भी देती है। अगर खिलाड़ी सिर्फ नतीजे पर अटक जाए, तो आगे बढ़ना मुश्किल हो जाता है।
“अगर दिन में एक बुरी बात हुई है, तो यह भी देखना चाहिए कि उसी दिन कितनी अच्छी बातें भी हुई हैं,” उन्होंने कहा।
फोकस बदलने की ताकत
स्मृति मानती हैं कि जब हम नकारात्मक से ध्यान हटाकर सकारात्मक चीज़ों पर ध्यान देते हैं, तो मन हल्का महसूस करता है। यह आदत धीरे-धीरे मानसिक मजबूती बनाती है — चाहे मैदान हो या ज़िंदगी।
इस सोच को मनोवैज्ञानिक नजरिए से समझाते हुए Dr Pavitra Shankar, जो Aakash Healthcare में एसोसिएट कंसल्टेंट (साइकेट्री) हैं, कहती हैं कि इसे “कॉग्निटिव रीफ्रेमिंग” कहा जाता है।
उनके अनुसार,

“जब हम अपने दिमाग को किसी स्थिति को अलग नजरिए से देखने के लिए ट्रेन करते हैं, तो तनाव अपने आप कम होने लगता है। पॉजिटिव सेल्फ-टॉक व्यक्ति को भावनात्मक रूप से मजबूत बनाता है।”
आम ज़िंदगी में कैसे अपनाएं यह तरीका
स्मृति मंधाना की यह बात सिर्फ खिलाड़ियों के लिए नहीं, बल्कि हर उस इंसान के लिए है जो रोज़मर्रा के तनाव से जूझता है।
- दिन के अंत में सिर्फ एक बुरी बात याद करने के बजाय तीन अच्छी बातें लिखें
- खुद से सकारात्मक भाषा में बात करें
- हर असफलता में सीख खोजने की कोशिश करें
आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में, स्मृति मंधाना का यह संदेश साफ है — नकारात्मकता से भागना नहीं, बल्कि फोकस बदलना सीखिए। हो सकता है, वही आपकी मुस्कान वापस ले आए।
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