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Shubman Gill को पोस्टर बॉय बनाने की जल्दबाज़ी पड़ी Team India पर भारी, Sanju Samson बने साइड इफेक्ट
T20 क्रिकेट में लगातार फ्लॉप हो रहे Shubman Gill, लेकिन भरोसा कायम; इस फैसले की कीमत Sanju Samson को चुकानी पड़ी
“जल्दबाज़ी का काम शैतान का”—यह कहावत भारतीय क्रिकेट के मौजूदा हालात पर बिल्कुल फिट बैठती है। Shubman Gill को इस पीढ़ी का चेहरा बनाने की कोशिश में शायद Team India के फैसले लेने वालों ने ज़रूरत से ज़्यादा जल्दबाज़ी दिखा दी है। नतीजा यह हुआ कि न सिर्फ Gill खुद T20 क्रिकेट में संघर्ष कर रहे हैं, बल्कि Sanju Samson जैसे खिलाड़ी भी इस प्रयोग के शिकार हो गए।
‘भारी नुकसान’ शब्द शायद कुछ ज़्यादा हो, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि T20 इंटरनेशनल में Gill की वापसी अब तक उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी है। सितंबर से अब तक खेली गई 15 पारियों में 263 रन, औसत 21.92 और स्ट्राइक रेट 115.56—ये आंकड़े उस खिलाड़ी के लिए चिंता का विषय हैं, जिसे भारतीय क्रिकेट का भविष्य बताया जा रहा है।
New Chandigarh में South Africa के खिलाफ दूसरे T20I में पहली ही गेंद पर आउट होना Gill के लिए एक और झटका साबित हुआ। यह सिर्फ एक विकेट नहीं था, बल्कि उस भरोसे पर सवाल था, जो टीम मैनेजमेंट लगातार दिखा रहा है।

पोस्टर बॉय की तलाश और बढ़ता दबाव
हर पीढ़ी को एक चेहरे की ज़रूरत होती है। भारतीय क्रिकेट में यह भूमिका पहले MS Dhoni, फिर Virat Kohli और उसके बाद Rohit Sharma ने निभाई। अब वही जिम्मेदारी Shubman Gill के कंधों पर डाल दी गई है। लेकिन सवाल यह है—क्या यह सब बहुत जल्दी नहीं हो गया?
Rohit Sharma के टेस्ट क्रिकेट से रिटायरमेंट के बाद Gill को सीधे Test captain बना दिया गया। कुछ ही महीनों में उन्हें वनडे सेटअप में भी नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंप दी गई। T20 फॉर्मेट में वह Suryakumar Yadav के डिप्टी के रूप में लौटे। संदेश साफ था—Gill को ऑल-फॉर्मेट लीडर के तौर पर तैयार किया जा रहा है।
Sanju Samson की कुर्बानी
Gill की इस वापसी की सबसे बड़ी कीमत Sanju Samson ने चुकाई। Abhishek Sharma–Sanju Samson की सफल ओपनिंग जोड़ी को तोड़ दिया गया ताकि Gill को ऊपर खिलाया जा सके। Samson को पहले नीचे भेजा गया, फिर पूरी तरह प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया गया।
यह तब हुआ, जब Samson ने अक्टूबर–नवंबर में सिर्फ 33 दिनों में 5 पारियों में 3 T20I शतक जड़े थे। इसके बावजूद, जब उन्हें अपनी पसंदीदा पोज़िशन से हटाया गया, तो उनका खेल बिगड़ा और आखिरकार उनकी जगह Jitesh Sharma को मौका मिल गया।
अगर Samson खुद को नाइंसाफ़ी का शिकार मानते हैं, तो इसमें कोई हैरानी नहीं होनी चाहिए—खासतौर पर तब, जब Gill लगातार मौके मिलने के बावजूद T20 में असर नहीं छोड़ पा रहे हैं।
क्लास बनाम फॉर्म का सवाल
कहते हैं, फॉर्म अस्थायी होती है, क्लास स्थायी—और Gill की क्लास पर कोई शक नहीं। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में रन बनाए हैं, खुद को साबित किया है। लेकिन लिमिटेड ओवर्स में उनका हालिया प्रदर्शन सवाल खड़े करता है।

Gill खुद मानसिक थकान की बात स्वीकार कर चुके हैं। लगातार दौरे, कप्तानी का दबाव और हर फॉर्मेट में बड़ी जिम्मेदारी—शायद यह सब बहुत कम समय में उनके ऊपर लाद दिया गया। नवंबर में आई उनकी गर्दन की चोट को भी इसी ओवरलोड से जोड़कर देखा जा रहा है।
अब आगे क्या?
सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या टीम मैनेजमेंट Gill के साथ सही कर रहा है? और क्या टीम के साथ भी?
स्पष्ट है कि भारतीय क्रिकेट में सभी खिलाड़ियों के लिए धैर्य का पैमाना एक जैसा नहीं है। Shubman Gill फिलहाल “फ्लेवर ऑफ द सीज़न” हैं, इसलिए उनके लिए इंतज़ार लंबा है।
Gill में टैलेंट की कोई कमी नहीं है और वह इस खराब दौर से निकल ही आएंगे। लेकिन उन्हें इतनी जल्दी हर फॉर्मेट का चेहरा बनाकर क्या हम उनका भला कर रहे हैं—या उल्टा, उनके ऊपर ऐसा बोझ डाल रहे हैं, जिसकी कीमत टीम और दूसरे खिलाड़ी चुका रहे हैं?
जैसा कि खुद Gautam Gambhir के शब्दों में कहें—इन सवालों के जवाब आज 140 करोड़ भारतीय जानना चाहते हैं।
