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MGNREGA के नाम बदलने पर Shashi Tharoor बोले ‘बेकार की बहस’, कहा– Gandhi के विचारों से टकराव नहीं
VB-G RAM G Bill 2025 को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच Congress सांसद Shashi Tharoor ने विवाद को बताया ‘दुर्भाग्यपूर्ण’
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी MGNREGA के नाम और ढांचे में बदलाव को लेकर चल रही सियासी बहस के बीच Congress सांसद Shashi Tharoor ने अपनी अलग राय रखी है। Tharoor ने इस पूरे विवाद को “unfortunate” यानी दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि जिस तरह से इस मुद्दे को पेश किया जा रहा है, वही असली समस्या है, न कि नाम बदलना।
केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित Viksit Bharat – Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) या VB-G RAM G Bill 2025 को लेकर विपक्ष ने तीखा हमला बोला है। इस बिल के तहत मौजूदा MGNREGA को हटाकर एक नया ग्रामीण रोजगार ढांचा लाने की योजना है, जिसे सरकार अपने Viksit Bharat @2047 विजन से जोड़ रही है।
इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए Shashi Tharoor ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि इस मुद्दे को गांधी जी की विरासत के खिलाफ दिखाना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि जिन अवधारणाओं को आमने-सामने खड़ा किया जा रहा है, वे कभी एक-दूसरे की विरोधी नहीं रहीं।
Tharoor ने अपने पोस्ट में लिखा कि Gram Swaraj और Ram Rajya की अवधारणाएं महात्मा गांधी की सोच के दो मजबूत स्तंभ थीं। उनके मुताबिक, इन दोनों के बीच किसी तरह का टकराव दिखाना गांधी जी के विचारों की गहरी समझ की अनदेखी है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि गांधी जी का पूरा जीवन इसी संतुलन का प्रतीक था, यहां तक कि उनके अंतिम शब्दों में भी “Ram” का नाम शामिल था।
उन्होंने चेतावनी दी कि जहां कोई वास्तविक विभाजन नहीं है, वहां राजनीतिक बहस के जरिए खाई पैदा करना दुर्भाग्यपूर्ण है। Tharoor के अनुसार, नाम बदलने से ज्यादा जरूरी यह देखना है कि नई योजना जमीनी स्तर पर ग्रामीण भारत को कितना सशक्त करती है।
MGNREGA में बदलाव पर सियासी संग्राम
Shashi Tharoor का यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब Congress और अन्य विपक्षी दल Prime Minister Narendra Modi की अगुवाई वाली केंद्र सरकार पर MGNREGA को कमजोर करने का आरोप लगा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि यह योजना महज नाम बदलने का मामला नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों की सुरक्षा से जुड़ा सवाल है।
प्रस्तावित नए कानून के तहत हर ग्रामीण परिवार को साल में 125 दिनों का वैधानिक रोजगार देने का वादा किया गया है। हालांकि, इसमें फंडिंग और प्रशासन से जुड़े कई बड़े बदलाव भी शामिल हैं। राज्यों पर ज्यादा खर्च का बोझ डाला जाएगा और योजना के संचालन के लिए नए केंद्रीय और राज्य स्तरीय काउंसिल बनाने का प्रस्ताव है।

Congress लाइन से अलग दिखे Shashi Tharoor
इस पूरे घटनाक्रम में Shashi Tharoor का रुख उनकी ही पार्टी Congress की आधिकारिक लाइन से अलग नजर आ रहा है। हाल के दिनों में Tharoor की पार्टी बैठकों से गैरहाजिरी भी चर्चा में रही है।
बीते सप्ताह वह Congress Lok Sabha MPs की उस बैठक में शामिल नहीं हुए, जिसकी अध्यक्षता Rahul Gandhi कर रहे थे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, Tharoor ने पहले ही अपनी अनुपलब्धता की जानकारी दे दी थी। उसी दिन उनकी तस्वीरें Kolkata में सामने आईं, जहां वह Prabha Khaitan Foundation के एक कार्यक्रम में शामिल हुए और महिलाओं के अधिकारों पर बोले।
इसके अलावा, वह नवंबर के अंत में हुई Congress Working Committee से जुड़ी बैठक में भी शामिल नहीं हुए थे। हाल के महीनों में उनकी मौजूदगी उन कार्यक्रमों में ज्यादा दिखी है, जहां कई वरिष्ठ विपक्षी नेता मौजूद नहीं थे, जैसे Prime Minister Narendra Modi का एक व्याख्यान और President Droupadi Murmu द्वारा Russian President Vladimir Putin के सम्मान में दिया गया राजकीय भोज।
इन सबके बीच, MGNREGA विवाद पर Shashi Tharoor की टिप्पणी ने न सिर्फ सरकार बनाम विपक्ष की बहस को नया मोड़ दिया है, बल्कि Congress के भीतर भी अलग-अलग सुरों को उजागर कर दिया है।
