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गोवा में दर्दनाक सड़क हादसा: सेपक टकरॉ फेडरेशन के अध्यक्ष और अंतरराष्ट्रीय रेफरी की मौत
टूर्नामेंट और राष्ट्रीय कैंप में हिस्सा लेने पहुंचे थे दोनों अधिकारी, NH-66 पर टैंकर की टक्कर से हुई मौत, खेल जगत में शोक की लहर
गोवा के बांबोलीम इलाके में मंगलवार तड़के एक भयावह सड़क हादसे में सेपक टकरॉ फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र सिंह दहिया और अंतरराष्ट्रीय रेफरी अंकित कुमार बल्याण की मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ जब एक टैंकर ट्रक अनियंत्रित होकर उनकी कार से जा टकराया। पुलिस के अनुसार, हादसा सुबह करीब 1 बजे NH-66 पर हुआ जब टैंकर की स्टीयरिंग लॉक हो जाने के कारण वह डिवाइडर तोड़ते हुए सामने से आ रही कार पर चढ़ गया।
टक्कर इतनी ज़बरदस्त थी कि कार पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गई। दोनों घायलों को तत्काल गोवा मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
खेल जगत में शोक की लहर
42 वर्षीय योगेंद्र सिंह दहिया दिल्ली के नांगलोई इलाके के रहने वाले थे और देश में सेपक टकरॉ खेल को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे थे। वहीं, 34 वर्षीय अंकित कुमार बल्याण उत्तर प्रदेश के बागपत ज़िले के निवासी थे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त रेफरी थे।
दोनों अधिकारी गोवा में 35वें सीनियर नेशनल सेपक टकरॉ चैम्पियनशिप और भारतीय टीम के राष्ट्रीय कैंप के लिए पहुँचे थे। फेडरेशन के कोषाध्यक्ष किशोर कुमार ने कहा,
“यह खेल जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। दहिया जी ने अपना पूरा जीवन सेपक टकरॉ के विकास के लिए समर्पित कर दिया था। अंकित बल्याण कैंप में असिस्टेंट कोच के रूप में कार्यरत थे। उनका यूं अचानक चले जाना बेहद दुखद है।”

पुलिस ने की गिरफ्तारी
गोवा पुलिस ने टैंकर चालक राहुल सरवडे (महाराष्ट्र निवासी) को गिरफ्तार कर लिया है। उसके खिलाफ BNS की धारा 281 (लापरवाही से वाहन चलाना) और 105 (गैर इरादतन हत्या) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
एफआईआर के अनुसार, चालक ने “लापरवाही और लापरवाह गति” से वाहन चलाया जिससे यह हादसा हुआ।
सेपक टकरॉ — भारत का उभरता खेल
सेपक टकरॉ, जो फुटबॉल और वॉलीबॉल के मिश्रण जैसा खेल है, एशिया में खासा लोकप्रिय है। भारत ने 2018 के एशियाई खेलों में इस खेल में इतिहास रचते हुए पुरुष रेगू टीम के जरिए पहला कांस्य पदक जीता था।
मार्च 2025 में पटना में आयोजित सेपक टकरॉ वर्ल्ड कप में भारतीय पुरुष टीम ने गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया था।
योगेंद्र सिंह दहिया और अंकित बल्याण की इस खेल में भूमिका को देखते हुए खिलाड़ियों और कोचों ने सोशल मीडिया पर गहरा शोक व्यक्त किया। कई राष्ट्रीय खिलाड़ियों ने लिखा,
“भारत ने दो सच्चे योद्धा खो दिए — जिन्होंने सेपक टकरॉ को गाँव-गाँव पहुँचाया।”
एक प्रेरणा, जो हमेशा जिंदा रहेगी
दहिया न केवल दिल्ली सेपक टकरॉ एसोसिएशन के अध्यक्ष थे, बल्कि उन्होंने स्कूल स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक इस खेल को पहचान दिलाने में अहम योगदान दिया। वहीं, अंकित बल्याण युवा रेफरीज़ और कोचों के लिए एक प्रेरणा बने हुए थे।
उनकी असामयिक मौत ने यह सवाल फिर खड़ा कर दिया है कि राजमार्गों पर भारी वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर और सख्ती क्यों नहीं बरती जाती।
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