MMA
संग्राम सिंह ने अर्जेंटीना में रचा इतिहास, फ्रेंच फाइटर ने कहा था ‘इस उम्र में हड्डियां जुड़ती नहीं’ जवाब मिला 1 मिनट 45 सेकंड में
अर्जेंटीना की धरती पर MMA जीतने वाले पहले भारतीय बने संग्राम सिंह — 16 साल छोटे फ्रेंच फाइटर को चित किया, प्लेन के टॉयलेट में 400-500 पुश-अप्स करके की थी तैयारी
नई दिल्ली। कुछ लोग उम्र से लड़ते हैं, कुछ लोग उम्र को ही हरा देते हैं। भारतीय पहलवान और MMA फाइटर संग्राम सिंह उन्हीं में से एक हैं। 5 अप्रैल 2026 को अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स शहर के Tigre Sports Club स्टेडियम में संग्राम सिंह ने वो कर दिखाया जो आज तक कोई भारतीय नहीं कर सका था — अर्जेंटीना की धरती पर MMA फाइट जीती। और वो भी सिर्फ 1 मिनट 45 सेकंड में।
जिस फ्रेंच फाइटर Florian Coudier को उन्होंने हराया, वो संग्राम से पूरे 16 साल छोटा था। मैच से पहले विरोधी खेमे से ताना भी आया था — “इस उम्र में हड्डियां जुड़ती नहीं।” संग्राम ने जवाब शब्दों से नहीं, दाँव से दिया।
तीन देश, तीन जीत — हैट्रिक पूरी
यह जीत संग्राम सिंह की MMA में तीसरी जीत है। इससे पहले वो जॉर्जिया की राजधानी Tbilisi और नीदरलैंड्स के Amsterdam में भी जीत चुके हैं। तीन अलग-अलग देशों में तीन जीत — यानी हैट्रिक। और हर बार वो अकेले भारत का नाम लेकर उतरे, अकेले जीतकर लौटे।
मिट्टी की कुश्ती से MMA तक का सफर
संग्राम सिंह बताते हैं कि उनकी ताकत का असली राज़ 30-32 साल की कुश्ती की मेहनत है। उन्होंने कहा — “मैं बहुत खुशनसीब हूँ कि मैंने मिट्टी की कुश्ती से शुरुआत की, फिर देश के लिए मैट पर खेला। एक वक्त था जब खेल में पैसे नहीं थे तो प्रोफेशनल रेसलिंग में आ गया। Commonwealth Heavyweight Champion बना, दुनिया का बेस्ट प्रोफेशनल रेसलर बना।”

और MMA के बारे में उनका कहना था — “MMA में 70-80% wrestling है। तो kick, punch या दूसरी technique छोड़ दो, मैं wrestling की technique use करता हूँ — जैसे उठाना, गिराना, grip करना। इसीलिए यह बाउट 1 मिनट 40-45 सेकंड में खत्म हो गया।”
यह वही बात है जो कभी महान पहलवान दारा सिंह कहा करते थे — “मिट्टी में जो सीखा, वो कभी नहीं भूला।” संग्राम उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
जब मैच में लगी चोट, तब दिमाग ने काम किया
संग्राम बताते हैं कि मैच की शुरुआत आसान नहीं थी। उन्होंने कहा — “जब मैच शुरू हुआ तो मैंने उसे punch करने की कोशिश की। उसकी 2-3 kick मुझे बहुत लगी, ribs और knee पर लगी।” लेकिन संग्राम ने घबराने की बजाय सोचा। उन्होंने भाँप लिया कि विरोधी की punching technique कमज़ोर है और उसका background wrestling का है। बस फिर क्या — “मैंने wrestling technique के हिसाब से, उसी की ताकत से, कर लिया।”
यही होती है असली चैंपियन की सोच। चोट खाकर भी दिमाग शांत रखना और मौका देखकर वार करना।
17 घंटे की उड़ान में भी नहीं रुकी ट्रेनिंग
जो बात सबसे ज़्यादा हैरान करती है वो है संग्राम की तैयारी का तरीका। अर्जेंटीना जाने के लिए उनका सफर बेहद लंबा था — दिल्ली से न्यूयॉर्क करीब 17-18 घंटे, फिर वहाँ 10-12 घंटे, और उसके बाद न्यूयॉर्क से ब्यूनस आयर्स 10-11 घंटे।
लेकिन संग्राम ने एक पल भी बर्बाद नहीं किया। उन्होंने बताया — “मैं plane में workout कर रहा था, toilet में जाता था, 400-500 push-ups करता था, अपनी seat पर बैठकर pranayam किया।” न्यूयॉर्क में रुकने के दौरान भी उन्होंने वर्कआउट जारी रखा।
जिस उम्र में लोग लंबी फ्लाइट के बाद आराम ढूंढते हैं, संग्राम उस वक्त पसीना बहा रहे थे। शायद यही फर्क होता है एक साधारण खिलाड़ी और एक चैंपियन में।
भारत को मिला एक नया गर्व
आज जब भारत क्रिकेट और बैडमिंटन के परे दूसरे खेलों में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है, संग्राम सिंह जैसे फाइटर उस राह को आसान कर रहे हैं। अर्जेंटीना में तिरंगा फहराना कोई छोटी बात नहीं — यह उन तमाम पहलवानों के लिए एक संदेश है जो सोचते हैं कि उम्र ढलने के बाद सपने भी ढल जाते हैं।
संग्राम सिंह ने साबित कर दिया — जब इरादा पक्का हो, तो हड्डियां नहीं, हौसला बोलता है।