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सलमान खान ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया—AI से लेकर डांस मूव्स तक ‘पर्सनैलिटी राइट्स’ पर बड़ी लड़ाई शुरू!
‘दबंग’ स्टार ने कोर्ट में कहा—मेरी आवाज़, मेरा लुक, मेरे डांस मूव्स और मेरा स्टाइल… सब मेरी पहचान हैं, कोई भी बिना अनुमति इस्तेमाल नहीं कर सकता।
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान इन दिनों एक अनोखी कानूनी लड़ाई में नज़र आ रहे हैं। बुधवार को सलमान ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अपने ‘पर्सनैलिटी राइट्स’ की सुरक्षा की मांग की। उनकी शिकायत का मुख्य मुद्दा है—बिना अनुमति AI, डीपफेक्स, फैन-मेड वीडियो, मर्चेंडाइज़, और अन्य डिजिटल तरीकों से उनकी पहचान का गलत इस्तेमाल।
सलमान का कहना है कि उनकी पहचान केवल नाम या चेहरे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें उनके डांस स्टेप्स, डायलॉग डिलीवरी, स्क्रीन प्रेज़ेंस, फैंस के साथ जुड़ाव, खास अंदाज़, आवाज़ और बॉडी लैंग्वेज तक शामिल हैं। उन्होंने कोर्ट से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति या कंपनी को इन तत्वों का उपयोग उनकी मंजूरी के बिना करने से रोका जाए।
AI और डीपफेक्स का बढ़ता खतरा
पिछले एक साल में कई बड़े भारतीय सितारों—जैसे रणवीर सिंह, रश्मिका मंदाना और प्रियंका चोपड़ा—को AI आधारित फर्जी कंटेंट का सामना करना पड़ा है। कई बार ऐसा कंटेंट सोशल मीडिया पर वायरल हो जाता है और अभिनेता की छवि को नुकसान पहुंचाता है।
सलमान खान के मामले में भी ऐसी ही घटनाएं सामने आई थीं, जहाँ उनके दबंग डांस स्टेप्स, ‘भाईजान’ स्टाइल डायलॉग्स, या टाइगर लुक को AI टूल्स के ज़रिए रीक्रिएट कर पोस्ट किया गया था। फैंस तो इसे मज़ाक समझते हैं, लेकिन स्टार और उनकी टीम के लिए ये एक कानूनी और इमेज-संबंधी खतरा बन जाता है।
सलमान खान की याचिका में क्या कहा गया?
अभिनेता की ओर से दाखिल याचिका में दावा किया गया है कि उनकी ‘पर्सनैलिटी’ में शामिल हैं:
- नाम, उपनाम, हस्ताक्षर
- शारीरिक बनावट, आवाज़, चाल-ढाल
- अनूठे डांस मूव्स (जैसे ‘दबंग’ झटके, ‘ओ ओ जाने जाना’ स्टाइल)
- फैंस के साथ जुड़ने का तरीका
- स्क्रीन प्रेज़ेंस और स्टारडम से जुड़ी पहचान
याचिका में कहा गया कि ये सभी तत्व उन्हें दूसरों से अलग और विशिष्ट बनाते हैं, इसलिए इनका उपयोग किसी भी प्रकार के विज्ञापन, वीडियो, AI कंटेंट या इवेंट में बिना अनुमति गैर-कानूनी है।
क्यों बढ़ रही है पर्सनैलिटी राइट्स की मांग?
डिजिटल दौर में कई नामी-गिरामी कलाकार अपनी पहचान की सुरक्षा लेकर सतर्क हो गए हैं। पिछले महीनों में:

अमिताभ बच्चन- अनिल कपूर
- धनुष
जैसे स्टार भी कोर्ट में इसी तरह की याचिकाएँ दायर कर चुके हैं।
सलमान खान ने अब इस सूची में शामिल होकर यह संदेश दिया है कि डिजिटल युग में पहचान की चोरी सिर्फ गोपनीयता का मुद्दा नहीं, बल्कि सीधे करियर और ब्रांड वैल्यू पर हमला है।
फैंस पर क्या असर पड़ेगा?
दिलचस्प बात यह है कि सलमान की याचिका ‘फैन-आर्ट’ या ‘फन एडिट्स’ पर लागू होगी या नहीं, यह अदालत के आदेश पर निर्भर करेगा।
हालाँकि, प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मनोरंजन के उद्देश्य से बने साधारण फैन एडिट्स को कोर्ट छूट दे सकती है, पर:
- उनके नाम से फर्जी विज्ञापन
- AI आधारित ब्रांड प्रमोशन
- नकली मर्चेंडाइज़
- डीपफेक वीडियो
जैसी गतिविधियों पर सख्ती बढ़ सकती है।
कानूनी विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
मीडिया कानून विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में जल्द ही AI और सेलेब्रिटी पर्सनैलिटी राइट्स पर एक स्पष्ट कानून बनने की ज़रूरत है।
तकनीक जितनी तेज़ है, उतनी ही तेज़ी से वीडियो मॉर्फिंग, वॉइस क्लोनिंग और AI एक्टिंग भी बढ़ रही है। सलमान खान का केस इस दिशा में एक लैंडमार्क मामला बन सकता है।
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