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2025 में बॉक्स ऑफिस के दो चेहरे: Saiyaara की खामोश मोहब्बत और Dhurandhar का शोर मचाता तूफान
एक ने Gen Z के दिल जीते, दूसरे ने थिएटर हिलाए — Saiyaara और Dhurandhar ने बदली 2025 की बॉलीवुड कहानी
अगर 2025 के हिंदी सिनेमा को एक शब्द में समेटना हो, तो वह शब्द होगा — विरोधाभास। इस साल बॉक्स ऑफिस पर दो ऐसी फिल्में छाईं, जिनका आपस में कोई मेल नहीं था। न कहानी में, न टोन में और न ही प्रस्तुति में। फिर भी दोनों ने अपने-अपने तरीके से रिकॉर्ड तोड़े और यह साबित कर दिया कि दर्शक अब सिर्फ एक ही तरह की फिल्मों में विश्वास नहीं करते।
एक तरफ थी Saiyaara, जो भावनाओं, संगीत और सादगी के सहारे दिलों तक पहुंची। दूसरी ओर थी Dhurandhar, जिसने बड़े सितारों, हाई-ऑक्टेन ड्रामा और थिएटर-फर्स्ट अनुभव के दम पर सिनेमाघरों में तूफान ला दिया।
इन दोनों फिल्मों ने मिलकर 2025 को ऐसा साल बना दिया, जहां कोमल एहसास और ज़ोरदार शोर — दोनों के लिए जगह थी।
Saiyaara: जब शोर नहीं, एहसास बिके
18 जुलाई को रिलीज़ हुई Saiyaara किसी बड़े प्रचार अभियान के साथ नहीं आई। न रियलिटी शोज़, न शहर-दर-शहर प्रमोशन। फिल्म ने अपनी कहानी और संगीत पर भरोसा किया।
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निर्देशक Mohit Suri की इस फिल्म में नए चेहरे थे, लेकिन भावनाएं बिल्कुल पुरानी — प्यार, टूटन, इंतज़ार और अधूरापन। Saiyaara ने खास तौर पर Gen Z दर्शकों के साथ गहरा रिश्ता बनाया। सोशल मीडिया पर इसके गाने रील्स का हिस्सा बने और डायलॉग्स मैसेज की भाषा।
यह फिल्म इस बात का उदाहरण बनी कि अगर कहानी सच्ची हो, तो बिना शोर के भी लंबी रेस जीती जा सकती है।
Dhurandhar: बड़े पर्दे के लिए बना धमाका
इसके ठीक उलट, 5 दिसंबर को रिलीज़ हुई Dhurandhar एक ऐसी फिल्म थी, जिसे थिएटर में देखने के लिए ही बनाया गया था। बड़े सेट्स, दमदार बैकग्राउंड स्कोर और पाकिस्तान में जासूसी व गैंग वॉर के इर्द-गिर्द घूमती कहानी — हर फ्रेम में भव्यता थी।
फिल्म में Ranveer Singh की मौजूदगी ने दर्शकों को खींचा, जबकि निर्देशन की कमान संभाली Aditya Dhar ने। Dhurandhar ने पहले दिन से ही यह साफ कर दिया कि यह फिल्म मोबाइल स्क्रीन के लिए नहीं, बल्कि थिएटर की कुर्सी पर बैठकर ताली बजाने के लिए है।

जहां Saiyaara ने दिल छुआ, वहीं Dhurandhar ने नसों में जोश भर दिया।
बॉक्स ऑफिस ने क्या सिखाया?
2025 का सबसे बड़ा सबक यही रहा कि दर्शक अब एक जैसे कंटेंट से ऊब चुके हैं। उन्हें कभी सुकून चाहिए, कभी रोमांच। Saiyaara और Dhurandhar ने यह साबित किया कि बॉक्स ऑफिस पर सफलता का कोई एक फॉर्मूला नहीं होता।
एक फिल्म ने भावनाओं के सहारे लंबी कमाई की, तो दूसरी ने शुरुआती दिनों में ज़बरदस्त ओपनिंग लेकर रिकॉर्ड बनाए। दोनों का रास्ता अलग था, लेकिन मंज़िल एक — कामयाबी।
सिनेमा का बदलता स्वाद
इन दोनों फिल्मों की सफलता ने फिल्ममेकर्स के लिए भी एक साफ संदेश छोड़ा है। अब या तो सिर्फ बड़े सितारे काफी नहीं, या सिर्फ सादगी। दर्शक वही देखेंगे जो उन्हें कुछ महसूस कराए — चाहे वह प्यार का दर्द हो या देशभक्ति और सस्पेंस से भरा रोमांच।
2025 इसलिए याद रखा जाएगा क्योंकि इस साल सिनेमा ने एक साथ दो आवाज़ों में बात की — एक धीमी, दूसरी ज़ोरदार — और दोनों को ही सुना गया।

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