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“पटौदी में भी इतना सिंपल खाना?”—सैफ अली खान ने बताया उनका डेली डाइट रूटीन, सब्ज़ी-रोटी से लेकर रात की मीट डिनर तक
सैफ अली खान ने बताया क्यों वह दिन में हल्का वेज खाना पसंद करते हैं और शाम को मीट—साथ ही खानदानी ‘रिच फूड’ से दूरी की असली वजह भी खोली।
बॉलीवुड के नवाब, सैफ अली खान, अक्सर अपनी फिल्मों, स्टाइल और पटौदी पैलेस की चर्चा में रहते हैं। लेकिन इस बार उन्होंने अपने भोजन की आदतों को लेकर एक ऐसा खुलासा किया है, जिसने फैन्स को हैरान कर दिया है।
कई लोग सोचते हैं कि पटौदी परिवार के खानपान में भरपूर रायता-कबाब, भारी ग्रेवी और शाही भोज का बोलबाला होगा। लेकिन सैफ का जवाब उल्टा निकला—“मैं बहुत सिंपल खाना खाता हूं, हम लोग फिट रहने के लिए साधारण भोजन करते हैं।”
सुबह—एग्स और टोस्ट, दोपहर—पूरी तरह शाकाहारी
सैफ ने बताया कि उनका दिन बेहद सरल नाश्ते से शुरू होता है—अंडे और टोस्ट।
दोपहर में वह पूरी तरह वेजिटेरियन खाना पसंद करते हैं—
“दाल, भिंडी, सब्ज़ी, गाजर-मटर और एक रोटी… यही मेरा रूटीन है।”
आजकल सोशल मीडिया पर सेलेब्स की डाइट के दर्जनों वीडियो वायरल रहते हैं—कोई सलाद पर जीता है, कोई स्मूदी पर। लेकिन सैफ ने इन सबको पीछे छोड़ते हुए एकदम देसी जवाब दिया—
“हम जो खाते हैं, वही हमारी फिटनेस का आधार है।”
रात में मीट—लेकिन सीमित, शाही दावतें नहीं
सैफ ने साफ कहा कि रात के भोजन में वह अक्सर मीट खाते हैं—
“मुझे डिनर में मांस पसंद है, लेकिन बहुत रिच खाना मुझे पसंद नहीं। बस कभी-कभी कबाब।”
उन्होंने यह भी कहा कि पटौदी जैसे रॉयल सेटिंग में भी वह और उनकी पत्नी करीना कपूर खान हल्का, नियंत्रित भोजन ही लेते हैं।
“हम खाने के लिए नहीं जीते… हमें फिट रहना होता है, इसलिए खाना बेहद बेसिक होता है।”
फिल्म सेट का खाना?—सैफ ने रखी दूरी
सैफ ने मज़ाकिया अंदाज़ में कहा—
“फिल्म यूनिट का खाना अगर फिट रहना है, तो नहीं खाना चाहिए। मैं अपना खाना घर से लेकर जाता हूं।”
आजकल कई युवा ऑफिस-कैंटीन और बाहर के खाने पर निर्भर रहते हैं। इस पर विशेषज्ञों ने भी चेतावनी दी है।
पोषण विशेषज्ञ की राय—वेज लंच और नॉन-वेज डिनर का नियम कोई कानून नहीं
डाइट एक्सपर्ट अश्लेशा जोशी के अनुसार—

दोपहर में वेज खाने से एनर्जी हल्की और स्थिर रहती है- नॉन-वेज पेट में देर से पचता है, इसलिए कुछ लोग इसे रात में लेते हैं
लेकिन यह कोई मेडिकल रूल नहीं—सब व्यक्ति की आदत और डाइजेशन पर निर्भर करता है।
उन्होंने कहा कि दिनभर का “कुल बैलेंस” ज्यादा मायने रखता है, जैसे—
- घर का खाना
- कम तेल
- सही मात्रा
- प्रोटीन, फाइबर और कार्ब का संयोजन
घर का खाना क्यों है सबसे सुरक्षित?
विशेषज्ञों के अनुसार, घर के खाने में—
- कम सोडियम
- कम चीनी
- कम अनहेल्दी फैट
होते हैं, जिससे मोटापा, हाई BP और डायबिटीज़ जैसी समस्याओं का खतरा कम होता है।
आजकल जब सोशल मीडिया “क्विनोआ बाउल” और “किटो स्नैक” जैसे शब्दों से भरा पड़ा है, सैफ का सरल संदेश बेहद प्रासंगिक है—
“सिंपल खाना, स्थिर शरीर—बस यही फॉर्मूला है।”
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