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जब Sachin Tendulkar ने दिया मुंबई को मंत्र: रणजी क्वार्टर-फाइनल से पहले ड्रेसिंग रूम में उतरा ‘मास्टर ब्लास्टर’ का जादू

कर्नाटक के खिलाफ बड़े मुकाबले से पहले सचिन तेंदुलकर ने मुंबई खिलाड़ियों से मुलाकात कर बढ़ाया हौसला, 42 बार की चैंपियन टीम में दिखा अलग जोश।

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रणजी क्वार्टर-फाइनल से पहले सचिन तेंदुलकर ने बढ़ाया मुंबई का हौसला | Dainik Diary
रणजी क्वार्टर-फाइनल से पहले मुंबई टीम से बातचीत करते सचिन तेंदुलकर – अनुभव और प्रेरणा का खास पल।

रणजी ट्रॉफी के क्वार्टर-फाइनल जैसे बड़े मुकाबले से पहले अगर ड्रेसिंग रूम में सचिन तेंदुलकर खुद आकर खिलाड़ियों से बात करें, तो माहौल अपने आप बदल जाता है। बुधवार को कुछ ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला, जब मास्टर ब्लास्टर ने मुंबई रणजी टीम के खिलाड़ियों से मुलाकात की और उन्हें आने वाले अहम मुकाबले के लिए प्रेरित किया।

मुंबई टीम, जो अब तक रिकॉर्ड 42 बार रणजी ट्रॉफी जीत चुकी है, इस बार क्वार्टर-फाइनल में कर्नाटक जैसी मजबूत टीम से भिड़ने जा रही है। ऐसे में सचिन का यह दौरा सिर्फ औपचारिक मुलाकात नहीं था, बल्कि अनुभव, आत्मविश्वास और विरासत का एक जीवंत पाठ था।

सूत्रों के मुताबिक, सचिन ने खिलाड़ियों से खुलकर बातचीत की। उन्होंने न तो लंबा भाषण दिया और न ही किसी पर अतिरिक्त दबाव डाला। उन्होंने बस इतना कहा कि “बड़े मैचों में स्कोरबोर्ड से ज्यादा अपने प्रोसेस पर भरोसा रखना ज़रूरी होता है।” यह वही सोच है जिसने उन्हें दशकों तक दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ों में शामिल रखा।

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एक सीनियर खिलाड़ी ने बताया कि सचिन ने युवा खिलाड़ियों को यह समझाया कि रणजी ट्रॉफी सिर्फ एक घरेलू टूर्नामेंट नहीं, बल्कि भारत की टेस्ट टीम तक पहुंचने की सबसे मजबूत सीढ़ी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे कोई छात्र बोर्ड परीक्षा से पहले घबराने की बजाय अपनी तैयारी पर भरोसा करता है, वैसे ही मैदान पर भी डर को जगह नहीं देनी चाहिए।

मुंबई बनाम कर्नाटक की भिड़ंत को हमेशा से रणजी ट्रॉफी का क्लासिक मुकाबला माना जाता रहा है। दोनों टीमों के पास अनुभव और टैलेंट की कोई कमी नहीं है। ऐसे में सचिन की मौजूदगी ने मुंबई कैंप में एक अलग तरह की ऊर्जा भर दी।

रणजी क्वार्टर-फाइनल से पहले सचिन तेंदुलकर ने बढ़ाया मुंबई का हौसला | Dainik Diary


खास बात यह रही कि सचिन ने सिर्फ बल्लेबाज़ों से नहीं, बल्कि गेंदबाज़ों और ऑल-राउंडर्स से भी बात की। उन्होंने बताया कि कैसे घरेलू क्रिकेट में निरंतरता ही सबसे बड़ा हथियार होती है। उनके शब्दों में, “एक अच्छा स्पेल या एक जिम्मेदार पारी पूरे मैच की दिशा बदल सकती है।”

यह मुलाकात मुंबई टीम के लिए एक रिमाइंडर की तरह थी — कि वे सिर्फ एक टीम नहीं, बल्कि एक परंपरा का हिस्सा हैं। जब कोई खिलाड़ी मुंबई की जर्सी पहनता है, तो उसके कंधों पर सिर्फ वर्तमान नहीं, बल्कि दशकों की विरासत भी होती है।

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सचिन की यह प्रेरणा मैदान पर भी नज़र आएगी। लेकिन इतना तय है कि क्वार्टर-फाइनल से पहले मुंबई टीम को जो मानसिक मजबूती मिली है, वह किसी भी रणनीति से कम नहीं।