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रोहित शर्मा ने रन-आउट की घंटी पीछे छोड़ी, अद्भुत डाइव से बचा अपना विकेट
दूसरे ओडीआई में Rohit Sharma ने दिखाया कि अनुभव सिर्फ संख्या नहीं है — मैदान पर पसीना, पर दृढ़ता भी।
एडिलेड (ऑस्ट्रेलिया) — जब विरोधी तेज गेंदबाजों और फील्डिंग यूनिट ने भारत को शुरुआत में दवाब में लिया, उस वक्त रोहित शर्मा ने एक ऐसा पल दिया, जिसने साबित कर दिया कि क्रिकेट में गलती से बचना भी कला है। दूसरे गेम में India national cricket team बनाम Australia national cricket team, रोहित को तीसरे ओवर की शुरुआत में एक ऐसे रन-आउट के खतरे का सामना करना पड़ा, जिसमें अधिकांश बल्लेबाज हार मान लेते — लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
वो नाजुक पल
शुभमन गिल ने बैकवर्ड पॉइंट की दिशा में एक शॉट खेला, गेंद Mitchell Owen के पास जाती है जिन्होंने तुरंत सीधा थ्रो किया। रोहित बीच पिच में थे — स्थिति थी बेहद खतरनाक। मगर उन्होंने रनों का सपना नहीं छोड़ा। उन्होंने तेज़ी से मुड़कर डाइव मारी और बैट खोजकर अपने विकेट को बचाया।
उदाहरण-से सीख
सोचिए कि आप ऑफिस में किसी प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हों और समय कम हो, कोई गलती होने वाली हो, लेकिन आपने झट से संभाल लिया। रोहित ने इसी तरह दबाव में खुद को बचाया — न कि सिर्फ स्ट्राइक मारकर, बल्कि संघर्ष और सजगता से।

आगे की दिशा
– इस पारी में रोहित ने अपनी 59वीं हाफ-सेंचुरी भी बनाई।
– इसके पहले, उन्होंने एक और दुर्लभ रिकॉर्ड बनाया – ओपनर के रूप में भारतीय टीम के लिये दूसरे सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बने।
– इस रन-आउट बचाव ने टीम को एक पॉपुलर मोमेंट दिया, ताकि मैच के बीच में टीम का मनोबल बना रहे।
क्या यह सिर्फ एक पल था?
कल नहीं — यह संकेत है कि रोहित अभी “ठहराव” नहीं बल्कि “उठाव” के दौर में हैं। एक मार्केटिंग मैनेजर को लें जिसने लंबे समय से ट्रैफिक बढ़ाने की कोशिश कर रही हो, अचानक एक कैम्पेन से बूस्ट मिल जाए — उसी तरह, इस बचाव ने रोहित को नया आत्म-विश्वास दिया है।
टीम-इंडिया के लिए सकारात्मक संकेत
धैर्य, मानसिक हलचल, और फील्डिंग के दबाव में भी शांत रहने की काबिलियत — ये बातें भारतीय टीम को बड़े मुकाबलों में काम आएंगी। विशेषकर ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम के सामने।
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