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रोहित शर्मा और विराट कोहली को सम्मान दीजिए; गौतम गंभीर और अजीत आगरकर के सामने इससे बड़े सवाल खड़े हैं

टीम इंडिया की टेस्ट गिरावट, स्पिन के खिलाफ संघर्ष और टीम-बिल्डिंग की कमी जैसे मुद्दों को छोड़कर बहस सिर्फ रোহित-विराट के भविष्य पर—यह न टीम के लिए ज़रूरी है और न ही सम्मानजनक।

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रोहित शर्मा और विराट कोहली पर अनावश्यक चर्चा—जबकि भारतीय क्रिकेट के सामने असली चुनौतियां कहीं और हैं
रोहित शर्मा और विराट कोहली पर अनावश्यक चर्चा—जबकि भारतीय क्रिकेट के सामने असली चुनौतियां कहीं और हैं

भारतीय क्रिकेट में मुद्दे बदलने की रफ्तार कमाल की है। कुछ दिन पहले तक हर कोई टीम इंडिया की दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज़ हार पर नाराज़ था।
अब चर्चा का केंद्र बदल चुका है—पूरा देश सिर्फ दो खिलाड़ियों के भविष्य पर बहस कर रहा है:
रोहित शर्मा और विराट कोहली

जितने लोग स्टेडियम में नहीं होते, उससे ज़्यादा सोशल मीडिया पर विशेषज्ञ बन जाते हैं—बॉडी लैंग्वेज से लेकर लिप-रीडिंग तक। लेकिन इस बहस ने असली समस्याओं पर से ध्यान हटा दिया है—टीम की कमजोरियां, चयन गड़बड़ियां, और टेस्ट क्रिकेट में लगातार गिरता प्रदर्शन।


रेकॉर्ड पर रेकॉर्ड, क्लास में कोई कमी नहीं—फिर इतनी जल्दी क्यों?

दूसरे सप्ताह मई 2025 में जब विराट कोहली ने रवि शास्त्री युग के बाद टेस्ट से विदाई ली और उसके बाद रोहित शर्मा भी, तभी से ये चर्चा शुरू हो गई कि क्या दोनों अगले 50-ओवर विश्व कप 2027 में खेलेंगे या नहीं।

रोहित शर्मा और विराट कोहली पर अनावश्यक चर्चा—जबकि भारतीय क्रिकेट के सामने असली चुनौतियां कहीं और हैं


लेकिन सवाल उठता है—क्यों अभी? क्यों इतनी जल्दबाज़ी?

भारत की टीम में कई अहम चिंताएं हैं—

  • क्या जसप्रीत बुमराह अगला विश्व कप तक फिट रहेंगे?
  • क्या हार्दिक पंड्या का चोटों का इतिहास टीम प्लानिंग में बाधा बनेगा?
  • स्पिन के खिलाफ संघर्ष कैसे सुधरेगा?

लेकिन इन मुद्दों पर बात कम और रिटायरमेंट की अफवाहों पर बात ज़्यादा हो रही है।


Gautam Gambhir की एक्टिव मौजूदगी—और बढ़ती चर्चाएं

भारत के हेड कोच गौतम गंभीर—जो अपने स्पष्ट और तीखे बयानों के लिए जाने जाते हैं—लगातार चर्चा में बने हुए हैं।

उनके दौर में भारत ने घर में लगातार दूसरी टेस्ट सीरीज़ गंवाई है, और यहीं से कई सवाल खड़े हो गए हैं।
लेकिन सोशल मीडिया की सनसनी और टीवी कैमरों की ओवर-एनालिसिस ने फोकस को गलत मुद्दों की ओर मोड़ दिया है।

गंभीर जितनी बार “140 करोड़ भारतीयों का भावनात्मक जुड़ाव” और “जज्बा-जनून” की बातें करते हैं, उतना ही जरूरी है कि वे टीम के दीर्घकालिक विज़न को भी सामने रखें।


रिटायरमेंट चर्चा बंद कीजिए—रोहित-विराट अभी भी भारतीय क्रिकेट की रीढ़ हैं

क्रिकेट को करीब से फॉलो करने वाले सभी जानते हैं कि—

रोहित शर्मा:

  • हल्का, तेज़, फिट और प्राइम फॉर्म में
  • स्ट्राइक-रेट, नेतृत्व और मैच टेम्पो पर मजबूत पकड़
  • अभी भी किसी भी गेंदबाज़ी अटैक की धज्जियां उड़ाने में सक्षम

विराट कोहली:

  • ऑस्ट्रेलिया में 0 पर आउट होने के बाद जोरदार वापसी
  • हाल ही में लगाया 52वां अंतरराष्ट्रीय शतक
  • रनिंग-बिटवीन-विकेट्स में वही पुराना जुनून
  • दुनिया के सबसे फिट क्रिकेटरों में से एक

दोनों के प्रदर्शन यह स्पष्ट करते हैं—
यह बहस कि वे दो साल बाद खेलेंगे या नहीं—पूरी तरह अनावश्यक है।


असली मुद्दे क्या हैं, जिन पर गंभीर और आगरकर को ध्यान देना चाहिए?

1. स्पिन के खिलाफ टीम की कमजोरी—सबसे बड़ा खतरा

भारत ने घर में दो सीरीज़ हारी हैं—यह संकेत है कि बल्लेबाज स्पिन के खिलाफ लगातार लड़खड़ा रहे हैं।

2. टेस्ट क्रिकेट के लिए एक स्थायी कोर तैयार करना

हर सीरीज़ में नए बदलाव टीम को अस्थिर कर रहे हैं।
गंभीर और अजीत आगरकर को एक स्पष्ट कोर टीम तैयार करनी होगी।

3. टीम की टेम्परामेंटल और तकनीकी समस्याएं

छोटी, इस्तेमाल वाली पिचों पर भी टीम लड़खड़ा रही है।
इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

4. अगले 9 महीने तक कोई टेस्ट नहीं—क्या तैयारी ठप हो जाएगी?

दक्षिण अफ्रीका सीरीज़ को भुलाकर आगे बढ़ जाना सबसे बड़ी गलती होगी।

रोहित शर्मा और विराट कोहली पर अनावश्यक चर्चा—जबकि भारतीय क्रिकेट के सामने असली चुनौतियां कहीं और हैं

IPL 2026 के बाद ही स्थितियां स्पष्ट होंगी

यह तय है कि भारत अगले 6 महीनों तक कोई ODI नहीं खेलेगा।
इसलिए अभी रिटायरमेंट, चयन और भविष्य की चर्चा सिर्फ अनावश्यक विवाद पैदा कर रही है।

सही समय IPL 2026 होगा, जब:

  • T20 विश्व कप खत्म हो जाएगा
  • खिलाड़ियों की फॉर्म साफ दिखेगी
  • टीम संयोजन का बेहतर आकलन हो पाएगा

निष्कर्ष: रिटायरमेंट की अफवाहों से बड़ा है भारतीय क्रिकेट का भविष्य

रोहित शर्मा और विराट कोहली—दोनों भारतीय क्रिकेट की सबसे प्रतिष्ठित हस्तियां हैं।
उनके योगदान पर सवाल उठाना या उन्हें समय से पहले रिटायरमेंट की ओर धकेलना—यह

खेल के प्रति असम्मान है, और टीम के लिए भी हानिकारक।

भारतीय क्रिकेट के सामने चुनौतियां गहरी हैं—
पर उनका समाधान इन दो महान खिलाड़ियों पर अनावश्यक बहस नहीं है।