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Ramadan 2026 Moon Sighting in India 19 फरवरी से शुरू होगा रोजा जानिए 1447 हिजरी की पूरी जानकारी
Ramadan 2026 का आगाज़ कोलकाता में चांद दिखने के ऐलान के साथ, देशभर में 19 फरवरी से शुरू होगी इबादत और रोजे की रूहानी शुरुआत
Ramadan 2026 का इंतज़ार खत्म हो गया है। कोलकाता की मशहूर Masjid-e-Nakhoda से जुड़े मरकज़ी रूयत-ए-हिलाल कमेटी ने 18 फरवरी को 1447 हिजरी का चांद दिखाई देने की पुष्टि कर दी है। इस ऐलान के साथ ही यह साफ हो गया कि भारत में Ramadan 2026 का पहला रोजा 19 फरवरी, गुरुवार से रखा जाएगा।
हर साल की तरह इस बार भी चांद की पहली झलक ने दिलों में एक खास सुकून भर दिया। मस्जिदों में दुआएं गूंजने लगीं, घरों में सहरी की तैयारियां शुरू हो गईं और बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई इस पाक महीने के स्वागत में जुट गया।
चांद दिखने का ऐलान क्यों होता है खास?
इस्लामी कैलेंडर चांद के हिसाब से चलता है। इसलिए Ramadan 2026 की शुरुआत भी चांद दिखने पर निर्भर करती है। जैसे ही नए चांद की पुष्टि होती है, अगले दिन से रोजे शुरू हो जाते हैं।
कोलकाता में चांद की पुष्टि होते ही देश के कई हिस्सों में भी रमज़ान के आगाज़ का ऐलान कर दिया गया। अब पूरे भारत में मुसलमान 19 फरवरी से रोजा रखेंगे।
यह पल सिर्फ कैलेंडर बदलने का नहीं होता, बल्कि यह एक रूहानी सफर की शुरुआत का संकेत देता है।
रमज़ान का धार्मिक महत्व
Ramadan 2026 सिर्फ रोजा रखने का महीना नहीं है, बल्कि यह कुरआन की नाज़िल होने की याद भी दिलाता है। माना जाता है कि इसी महीने में पवित्र कुरआन पहली बार Muhammad पर नाज़िल हुआ था।
रमज़ान के आखिरी दस दिनों में आने वाली लैलतुल कद्र (शब-ए-कद्र) को सबसे पाक रात माना जाता है। यह वही रात है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह हजार महीनों से बेहतर है।
Ramadan 2026 में भी मुसलमान इस खास रात की तलाश में इबादत, तिलावत और दुआओं में मशगूल रहेंगे।

Ramadan 2026 का रोज़मर्रा का रूटीन
रमज़ान का महीना अपनी अलग ही रफ्तार लेकर आता है। सुबह से लेकर रात तक जीवन की दिनचर्या बदल जाती है।
सहरी (Suhoor)
फजर से पहले खाया जाने वाला खाना, जिससे दिनभर रोजा रखने की ताकत मिलती है।
रोजा
सुबह से सूर्यास्त तक बिना खाना-पानी के सब्र और परहेज़ के साथ इबादत करना।
इफ्तार
शाम को खजूर और पानी से रोजा खोलना सुन्नत माना जाता है। इसके बाद परिवार के साथ खाना और शुक्र अदा करना।
तरावीह
रात को मस्जिदों में खास नमाज़ अदा की जाती है, जिसमें कुरआन की तिलावत होती है।
Ramadan 2026 में भी यही रूहानी सिलसिला 29 या 30 दिनों तक जारी रहेगा।
रोजा सिर्फ भूखा रहना नहीं
अक्सर लोग समझते हैं कि रमज़ान का मतलब सिर्फ खाना-पानी से दूर रहना है, लेकिन असल मायने इससे कहीं ज्यादा गहरे हैं।

Ramadan 2026 सिखाएगा:
- सब्र (धैर्य)
- शुक्र (कृतज्ञता)
- जकात और सदका के जरिए दूसरों की मदद
- आत्मसंयम और बुरी आदतों से दूरी
यह महीना इंसान को अंदर से मजबूत बनाता है। गरीबों की भूख का एहसास कराता है और दिल में रहम पैदा करता है।
बाजारों और घरों में दिखने लगी रौनक
Ramadan 2026 के ऐलान के साथ ही बाजारों में भी रौनक बढ़ गई है। खजूर, फलों, सेवइयों और इफ्तार की चीजों की खरीदारी शुरू हो चुकी है। मस्जिदों में सफाई और सजावट का काम तेज हो गया है।
घरों में भी खास पकवानों की लिस्ट बन रही है और बच्चे नए कपड़ों की फरमाइश कर रहे हैं।
भावनाओं से जुड़ा है Ramadan 2026
जब चांद दिखाई देता है तो सिर्फ एक तारीख तय नहीं होती, बल्कि एक एहसास जागता है।
वो सहरी के अलार्म की आवाज, इफ्तार के वक्त अज़ान का इंतज़ार, तरावीह की नमाज़ में सुकून — ये सब मिलकर Ramadan 2026 को खास बना देते हैं।
यह महीना खुद से मिलने, अपनी कमियों को पहचानने और बेहतर इंसान बनने का मौका देता है।
आखिर में
Ramadan 2026 का पहला रोजा 19 फरवरी से शुरू होगा। यह महीना इबादत, मोहब्बत और इंसानियत का पैगाम लेकर आया है।
पूरे देश में मुसलमान इस पाक महीने का स्वागत “रमज़ान मुबारक” की दुआओं के साथ कर रहे हैं।
