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राम गोपाल वर्मा का बड़ा खुलासा: “अब मुझे अजय देवगन और मोहनलाल की ‘Company’ पसंद नहीं आती”
निर्देशक राम गोपाल वर्मा ने कहा — “अंडरवर्ल्ड की मेरी समझ अब कहीं ज़्यादा बढ़ चुकी है, इसलिए ‘Company’ आज वैसी नहीं लगती।”
मुंबई। बॉलीवुड के मशहूर निर्देशक राम गोपाल वर्मा (Ram Gopal Varma), जिन्हें अक्सर “आरजीवी” के नाम से जाना जाता है, ने अपने करियर की एक यादगार फिल्म ‘Company’ (2002) पर बड़ा बयान दिया है। वर्मा ने कहा कि जब उन्होंने हाल ही में इस फिल्म को दोबारा देखा, तो उन्हें अब यह उतनी प्रभावशाली नहीं लगी, जितनी उस वक्त लगती थी।
राम गोपाल वर्मा ने कहा, “मुझे अब ‘Company’ उतनी पसंद नहीं आती क्योंकि अंडरवर्ल्ड की मेरी समझ पहले से कहीं ज़्यादा बढ़ चुकी है। उस समय जो चीज़ें मुझे असली लगती थीं, आज वैसी नहीं लगतीं।”
‘Company’, जिसमें अजय देवगन (Ajay Devgn), मोहनलाल (Mohanlal) और विवेक ओबेरॉय (Vivek Oberoi) जैसे बड़े कलाकार थे, 2000 के दशक की सबसे चर्चित गैंगस्टर फिल्मों में से एक थी। फिल्म ने मुंबई के अंडरवर्ल्ड को एक रियलिस्टिक टच के साथ पर्दे पर पेश किया था।
वर्मा ने यह भी बताया कि अगर उन्हें मौका मिला, तो वे इस फिल्म को फिर से बनाना चाहेंगे। उन्होंने कहा, “अगर मुझे अपनी किसी फिल्म को दोबारा बनाने का मौका मिले, तो मैं ‘Company’ को फिर से बनाऊँगा — लेकिन आज की समझ के साथ। कहानी वही होगी, पर दृष्टिकोण बदल जाएगा।”
राम गोपाल वर्मा हिंदी सिनेमा के उन कुछ निर्देशकों में से हैं जिन्होंने गैंगस्टर और अंडरवर्ल्ड सिनेमा की परिभाषा बदल दी। उनकी फिल्मों — ‘शिवा’ (1989), ‘सत्या’ (1998), ‘कंपनी’ (2002), और ‘सरकार’ सीरीज़ — ने बॉलीवुड में क्राइम फिल्मों का एक नया दौर शुरू किया।

दिलचस्प बात यह है कि वर्मा की पहली फिल्म ‘शिवा’ जिसमें नागार्जुन (Nagarjuna) मुख्य भूमिका में थे, अब दोबारा रिलीज़ के लिए तैयार है। इस फिल्म को 35 साल बाद फिर बड़े पर्दे पर लाया जाएगा। वर्मा का कहना है कि उन्हें इस बार युवा दर्शकों की प्रतिक्रिया का इंतज़ार है, जो उस दौर की रॉ और रियल कहानी को नए नजरिए से देखेंगे।
वर्मा ने इंटरव्यू में आगे कहा कि “‘सत्या’ और ‘कंपनी’ जैसी फिल्मों ने उस दौर में जो प्रभाव डाला था, उसे अब भी याद किया जाता है, लेकिन मैं अब वही गलतियाँ दोबारा नहीं करना चाहूँगा जो तब की थीं। उस वक्त अंडरवर्ल्ड को मैं बाहरी दृष्टि से देखता था, अब अंदर से समझता हूँ।”
फिल्म समीक्षकों के अनुसार, राम गोपाल वर्मा की ‘Company’ ने न केवल अंडरवर्ल्ड सिनेमा को नई दिशा दी, बल्कि बाद में आई फिल्मों जैसे ‘Once Upon A Time In Mumbaai’ और ‘Shootout at Lokhandwala’ को भी प्रेरित किया।
अब जबकि वर्मा अपने करियर के नए चरण में हैं, उनका यह बयान यह साबित करता है कि सिनेमा के लिए उनकी दृष्टि आज भी उतनी ही निडर और प्रयोगात्मक है जितनी पहले थी।
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