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10-10 रुपये जोड़कर रचा गया इंसानियत का इतिहास, ‘राजू बिहारी’ ने जरूरतमंदों को बांटे 500 कंबल

महंगाई और ठंड के बीच मानवता की मिसाल बने राजू बिहारी, छोटे सिक्कों से खड़ा किया बड़ा काम

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10 रुपये से 500 कंबल: राजू बिहारी की इंसानियत ने जीता दिल
जरूरतमंदों को कंबल बांटते हुए राजू बिहारी, छोटे योगदान से बड़ी मदद की मिसाल

जब देशभर में ठंड का कहर बढ़ता जा रहा है और सड़कों पर रहने वाले गरीबों के लिए रातें और भी मुश्किल होती जा रही हैं, ऐसे समय में इंसानियत की एक प्रेरक कहानी सामने आई है। यह कहानी है राजू बिहारी की, जिन्होंने 10-10 रुपये जोड़कर जरूरतमंदों के लिए 500 कंबलों का इंतजाम कर दिखाया।

राजू बिहारी का कहना है कि उनके इस अभियान की शुरुआत किसी बड़े फंड या संस्था से नहीं, बल्कि आम लोगों की छोटी-छोटी मदद से हुई। उन्होंने लोगों से सिर्फ इतना कहा—“अगर आप एक बार चाय छोड़ सकते हैं, तो 10 रुपये भी किसी की ठंड दूर कर सकते हैं।” यही सोच धीरे-धीरे एक बड़े अभियान में बदल गई।

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राजू बताते हैं कि उन्होंने मोहल्लों, दुकानों, दोस्तों और जान-पहचान वालों से छोटे सिक्के इकट्ठा किए। किसी ने 10 दिए, किसी ने 20, तो किसी ने 50 रुपये। इन छोटे योगदानों से ही सैकड़ों कंबल खरीदे गए, जिन्हें ठंड से कांप रहे बुजुर्गों, बच्चों और बेसहारा लोगों तक पहुंचाया गया।

10 रुपये से 500 कंबल: राजू बिहारी की इंसानियत ने जीता दिल


कंबल बांटते वक्त कई ऐसे पल आए, जिन्होंने राजू को भावुक कर दिया। एक बुजुर्ग महिला ने कंबल लेते हुए सिर्फ इतना कहा—“बेटा, आज ठंड से जान बच गई।” राजू कहते हैं कि यही शब्द उनकी सबसे बड़ी कमाई हैं।

इस पहल की खास बात यह रही कि इसमें न कोई बड़ा प्रचार था, न सोशल मीडिया का शोर। यह पूरी तरह भरोसे और इंसानियत पर टिका हुआ प्रयास था। आज जब समाज में अक्सर स्वार्थ की बातें होती हैं, तब राजू बिहारी की यह पहल यह याद दिलाती है कि बदलाव बड़े पैसों से नहीं, बल्कि बड़ी सोच से आता है।

राजू का मानना है कि अगर हर व्यक्ति थोड़ा-सा भी आगे आए, तो कोई भी गरीब ठंड में बिना सहारे नहीं सोएगा। वह आगे भी इस अभियान को जारी रखने की योजना बना रहे हैं।