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अजमेर दरगाह की सुरक्षा बढ़ाने के लिए राजस्थान सरकार ने पेश किया नया प्रस्ताव, CCTV लिंक और गेट विस्तार की योजना
राजस्थान सरकार ने ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की ऐतिहासिक दरगाह में सुरक्षा बढ़ाने के लिए कई अहम कदम सुझाए हैं — जिनमें एंट्री-एग्जिट गेट्स का विस्तार, CCTV कैमरों को राज्य कमांड सेंटर से जोड़ना और अतिक्रमण हटाना शामिल है।
राजस्थान सरकार ने 12वीं सदी के सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह, अजमेर शरीफ की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक नया प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है। इस प्रस्ताव में दरगाह के प्रवेश और निकास द्वारों का विस्तार, सभी CCTV कैमरों को राज्य के ‘अभय कमांड सेंटर’ से जोड़ना, और दरगाह परिसर के आसपास के अतिक्रमणों को हटाना शामिल है।
राजस्थान गृह विभाग के सचिव महेंद्र खींची ने बताया कि यह प्रस्ताव अजमेर कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, इंटेलिजेंस यूनिट, दरगाह कमेटी और अल्पसंख्यक मामलों के विभाग से हुई चर्चा के बाद तैयार किया गया है।
उन्होंने कहा, “यह योजना पूरे वर्ष तीर्थयात्रियों की सुरक्षित आवाजाही और इस ऐतिहासिक स्थल की बेहतर निगरानी और सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तैयार की गई है।”
दरगाह की सुरक्षा पर केंद्र सरकार की निगरानी
ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह का प्रबंधन केंद्र सरकार के अधीन दरगाह कमेटी के माध्यम से होता है। प्रस्ताव वर्तमान में केंद्रीय गृह मंत्रालय के विचाराधीन है।

₹96 करोड़ का विकास प्रस्ताव
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने दरगाह के विकास और सुरक्षा के लिए ₹96 करोड़ की राशि स्वीकृत करने का प्रस्ताव रखा है। इसमें सुरक्षा ढांचे के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं के सुधार पर भी ध्यान दिया जाएगा।
गेट्स के विस्तार की योजना
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, दरगाह में वर्तमान में आठ गेट्स हैं, जिनमें मुख्य निज़ाम गेट वर्ष 1915 में बनाया गया था।
उन्होंने कहा कि दो गेट्स का आकार भीड़ प्रबंधन के लिए पर्याप्त नहीं है, खासकर उर्स के दौरान जब लाखों श्रद्धालु भारत और विदेशों से आते हैं।
“किसी भी दिन भगदड़ जैसी स्थिति बन सकती है, इसलिए इन गेट्स के विस्तार और पुनर्निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया है।”
CCTV लिंक और हाई-टेक मॉनिटरिंग
राज्य सरकार ने प्रस्ताव दिया है कि दरगाह क्षेत्र के सभी CCTV कैमरों को अभय कमांड सेंटर से जोड़ा जाए। यह एक हाई-टेक कंट्रोल रूम है जो रीयल-टाइम वीडियो सर्विलांस, डेटा एनालिटिक्स, ट्रैफिक कंट्रोल और क्राउड मैनेजमेंट के लिए अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करता है।
खींची ने बताया, “CCTV लिंकिंग से सुरक्षा एजेंसियों को किसी भी संदिग्ध गतिविधि या आपात स्थिति पर तुरंत कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।”
अतिक्रमण हटाने और सफाई अभियान
अजमेर नगरपालिका ने दरगाह क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू कर दिया है। हाल ही में तारागढ़ फॉरेस्ट एरिया में चलाए गए अभियान में 250 से अधिक दुकानों को हटाया गया।
सरकार का मानना है कि ऐसे कदम न केवल सुरक्षा बल्कि तीर्थयात्रियों की आवाजाही को भी आसान बनाएंगे।
फायर ऑडिट और डिजिटल आईडी की योजना
प्रस्ताव में दरगाह क्षेत्र में ड्रेनेज सुधार, फायर ऑडिट, और दरगाह स्टाफ के लिए डिजिटल आईडी कार्ड जारी करने की भी सिफारिश की गई है।
इन डिजिटल आईडी को गृह विभाग के पोर्टल से जोड़ा जाएगा ताकि हर कर्मचारी का विवरण ऑनलाइन ट्रैक किया जा सके।

सुरक्षा बढ़ाने के पीछे पृष्ठभूमि
दरगाह सुरक्षा को लेकर यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब पिछले वर्षों में यहां कई विवाद और घटनाएं सामने आई हैं।
पिछले साल हिंदू सेना के नेता विश्णु गुप्ता ने दावा किया था कि दरगाह के नीचे एक प्राचीन मंदिर मौजूद है और उन्होंने पूजा के अधिकार की मांग की थी।
इसके अलावा, 2007 में दरगाह परिसर में हुए विस्फोट में तीन लोगों की मौत और 15 घायल हुए थे।
निष्कर्ष
राजस्थान सरकार का यह प्रस्ताव दरगाह क्षेत्र में आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
यदि केंद्र सरकार की मंजूरी मिलती है, तो अजमेर दरगाह न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सुरक्षा और सुविधा के मामले में भी देश के सबसे उन्नत तीर्थ स्थलों में शामिल हो जाएगी।
