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कतर का गैस कारखाना तबाह, अगले 5 साल तक दुनिया को LNG की किल्लत भारत समेत इन देशों पर पड़ेगी सबसे भारी मार

ईरान के हमले ने दुनिया के सबसे बड़े LNG प्लांट को किया क्षतिग्रस्त — यूरोप में गैस 35% महंगी, भारत में रसोई गैस का संकट गहराया

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कतर का LNG प्लांट तबाह, 5 साल तक संकट — भारत समेत इन देशों पर असर | Dainik Diary
कतर के रास लफ्फान में स्थित दुनिया का सबसे बड़ा LNG प्लांट ईरानी हमलों में क्षतिग्रस्त हुआ — 3 से 5 साल तक मरम्मत का अनुमान, भारत समेत दर्जनों देशों की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में।

दोहा/नई दिल्ली। सोचिए एक मिनट के लिए — अगर आपके घर की रसोई गैस अचानक दोगुनी महंगी हो जाए, तो क्या होगा? यही नहीं, अगर वह मिलनी ही बंद हो जाए? यह काल्पनिक सवाल नहीं है। मध्यपूर्व में जो जंग चल रही है, उसने दुनिया को उसी दहलीज़ पर ला खड़ा किया है।

ईरान के हमलों ने कतर के रास लफ्फान औद्योगिक शहर में स्थित दुनिया के सबसे बड़े LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) प्लांट को भारी नुकसान पहुँचाया है। और इसके नतीजे सिर्फ कतर तक नहीं रुकने वाले।

1,50,000 करोड़ का सालाना नुकसान — सिर्फ एक देश को

QatarEnergy के CEO साद अल-काबी ने बताया कि ईरानी हमलों ने कतर की LNG निर्यात क्षमता का 17 प्रतिशत नष्ट कर दिया है। इससे सालाना करीब 20 अरब डॉलर (लगभग 1.67 लाख करोड़ रुपये) का नुकसान होगा। उन्होंने यह भी कहा कि कतर के 14 में से 2 LNG ट्रेन और 2 में से एक गैस-टू-लिक्विड सुविधा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई है — और इनकी मरम्मत में 3 से 5 साल लग सकते हैं।

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यह ऐसे समझिए जैसे किसी शहर की पूरी बिजली आपूर्ति एक झटके में बंद हो जाए — और ट्रांसफार्मर ऐसे टूटे हों कि नए बनाने में पाँच साल लगें।

इटली, बेल्जियम, दक्षिण कोरिया, चीन — सबको झटका

QatarEnergy के CEO ने बताया कि कंपनी को इटली, बेल्जियम, दक्षिण कोरिया और चीन को होने वाली LNG आपूर्ति पर लंबे समय के लिए “फोर्स मेज़र” (अनुबंध तोड़ने की मजबूरी) घोषित करनी पड़ सकती है।

भारत और चीन सबसे ज़्यादा चिंतित

एनर्जी रिसर्च फर्म Rystad के अनुसार, कतरी LNG पर सबसे ज़्यादा निर्भर एशियाई देश — खासकर चीन और भारत — इस संकट से सबसे गहरे प्रभावित हुए हैं। LNG टैंकर आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है, और कच्चे तेल के टैंकर भी बमुश्किल एक-दो रोज़ाना चल रहे हैं।

भारत के लिए यह सीधे रसोई गैस और बिजली की कीमतों से जुड़ा मामला है।

यूरोप में गैस कीमतें आसमान पर

ईरान के हमले के बाद यूरोपीय गैस की कीमतें एक रात में 35 प्रतिशत तक उछल गईं, और ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 10 प्रतिशत तक बढ़ी। यूरोप में लोग पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे हैं — और अब यह झटका और भी गहरा हो गया है।

हीलियम, खाद, नाफ्था — सब कुछ प्रभावित

LNG के अलावा भी नुकसान कम नहीं है। कतर का कंडेंसेट निर्यात 24 प्रतिशत, LPG 13 प्रतिशत, हीलियम 14 प्रतिशत और नाफ्था व सल्फर दोनों 6-6 प्रतिशत तक गिर जाएंगे।

कतर का LNG प्लांट तबाह, 5 साल तक संकट — भारत समेत इन देशों पर असर | Dainik Diary


हीलियम? वो गैस जो सिर्फ गुब्बारों में नहीं भरी जाती — बल्कि MRI मशीनों, सेमीकंडक्टर चिप्स और अंतरिक्ष उपकरणों में भी लगती है। अगर यह नहीं मिली तो अस्पतालों से लेकर स्मार्टफोन तक सब कुछ महंगा होगा।

“सपने में भी नहीं सोचा था यह होगा”

QatarEnergy के CEO ने बेबाकी से कहा, “मैंने कभी अपने सबसे बुरे सपने में भी नहीं सोचा था कि कतर पर — एक मुस्लिम भाई देश द्वारा — रमज़ान के पाक महीने में इस तरह हमला होगा।” यह भावना बताती है कि यह झटका सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि भरोसे का भी है।

30 साल की साख एक झटके में

1996 से लेकर अब तक कतर ने कभी अपना LNG निर्यात नहीं रोका था — जापान से बेल्जियम तक, बांग्लादेश से चीन तक, दो दर्जन से ज़्यादा देशों को बिना एक दिन की रुकावट के गैस पहुँचाता रहा। लेकिन पहली बार इस युद्ध ने उस अटूट भरोसे की दीवार में दरार डाल दी।

भारत क्या करे?

भारत में LPG की किल्लत अभी से महसूस होने लगी है। रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान युद्ध की वजह से LPG आपूर्ति संकट में फँसे भारतीय रेस्तरां और ढाबों पर सीधा असर पड़ रहा है। सरकार को अभी से वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करनी होगी — अमेरिकी LNG एक विकल्प हो सकता है, लेकिन वह सस्ता नहीं पड़ेगा।

यह जंग सिर्फ मध्यपूर्व की नहीं रही — यह अब हर उस घर की जंग बन गई है जहाँ गैस चूल्हे पर खाना पकता है।