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भारतीय नौसेना प्रमुख का अमेरिका दौरा शुरू, इंडो-पैसिफिक में समुद्री सहयोग और रक्षा साझेदारी को मिलेगी नई दिशा
एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी का यह दौरा भारत-अमेरिका के बीच नौसैनिक और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करेगा, जिसका उद्देश्य है — मुक्त, खुला और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थापना।
नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई ऊँचाइयों पर ले जाने के लिए भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी (Admiral Dinesh K. Tripathi) ने बुधवार से अपने एक सप्ताह के अमेरिका दौरे की शुरुआत की। यह दौरा दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग और समुद्री सुरक्षा साझेदारी को और गहराई देने पर केंद्रित है।
भारतीय नौसेना की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि —
“नौसेना प्रमुख का यह दौरा भारतीय नौसेना की उस प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है जो वह अमेरिकी नौसेना के साथ सहयोग को गहराई देने के लिए रखती है, ताकि मुक्त, खुला, समावेशी और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक का साझा दृष्टिकोण साकार हो सके।”
अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी की नई परिभाषा
भारत और अमेरिका दोनों देश इस समय ऐसे अंतरराष्ट्रीय तंत्र की वकालत कर रहे हैं जो शांति, समृद्धि और स्थिरता पर आधारित हो। यह दौर ऐसे समय में आया है जब चीन (China) इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने, सैन्य ठिकाने स्थापित करने और छोटे देशों पर दबाव डालने की कोशिश कर रहा है।

भारत और अमेरिका का सहयोग इस क्षेत्र में संतुलन और सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
10 वर्षीय रक्षा साझेदारी फ्रेमवर्क बना मील का पत्थर
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब हाल ही में 31 अक्टूबर को मलेशिया के कुआलालंपुर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके अमेरिकी समकक्ष पीट हेगसेथ के बीच ‘US-India Major Defence Partnership 2025’ नामक 10-वर्षीय ढांचा समझौता (Framework Agreement) साइन हुआ था।
यह समझौता ASEAN Defence Ministers’ Meeting Plus (ADMM-Plus) के दौरान हुआ और इसमें भविष्य के लिए संयुक्त दृष्टिकोण और नीति दिशा तय की गई है।
इस फ्रेमवर्क का उद्देश्य है —
- नौसेना सहयोग को नई गति देना
- ऑपरेशनल स्तर पर लिंक बढ़ाना
- सूचना साझाकरण और Maritime Domain Awareness को मजबूत करना
उच्चस्तरीय वार्ताएं और सहयोग पर फोकस
अपने अमेरिका प्रवास के दौरान एडमिरल त्रिपाठी एडमिरल सैमुअल जे. पापारो, कमांडर — US Indo-Pacific Command, और एडमिरल स्टीफन टी. कोहलर, कमांडर — US Pacific Fleet से मुलाकात करेंगे।
इन बैठकों में द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास, तकनीकी साझेदारी और उन्नत सैन्य उपकरणों के संयुक्त उपयोग पर चर्चा होगी।
भारतीय नौसेना के अनुसार,
“ये मुलाकातें मौजूदा समुद्री सहयोग की समीक्षा, ऑपरेशनल लिंक बढ़ाने और सूचना साझा करने की प्रणाली को मजबूत करने का अवसर प्रदान करेंगी।”
व्यापार और कूटनीति के बीच संतुलन
यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब भारत एक संवेदनशील कूटनीतिक संतुलन बना रहा है — एक ओर अमेरिका के साथ व्यापारिक और रणनीतिक रिश्तों को मज़बूत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर रूस के साथ पारंपरिक संबंध बनाए रखने की कोशिश भी जारी है।

सितंबर 16 को US Assistant Trade Representative ब्रेंडन लिंच की भारत यात्रा के बाद व्यापारिक वार्ताओं को दोबारा गति मिली थी। इसके बाद अमेरिकी राजदूत-नामित सर्जियो गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।
हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिया था कि अमेरिका भारत के निर्यातों पर लगाए गए 50% टैरिफ को घटा सकता है, क्योंकि भारत ने रूस से तेल आयात में कटौती की है — जो लंबे समय से दोनों देशों के बीच मतभेद का विषय रहा है।
इंडो-पैसिफिक में बढ़ेगा भारत का समुद्री प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि एडमिरल त्रिपाठी का यह दौरा भारत की ‘Act East Policy’ को और मजबूत करेगा। इससे Malabar Exercise, QUAD Cooperation और समुद्री सुरक्षा पर समन्वय को नई दिशा मिलेगी।
भारत और अमेरिका के बीच साझा नौसैनिक प्रशिक्षण और ड्रोन, पनडुब्बी रोधी तकनीक पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।
निष्कर्ष
भारत और अमेरिका के बीच यह नौसैनिक सहयोग केवल रक्षा साझेदारी तक सीमित नहीं — बल्कि यह उस भरोसे का प्रतीक है जो दोनों लोकतांत्रिक देश एक-दूसरे पर रखते हैं।
जैसा कि एडमिरल त्रिपाठी ने कहा,
“हमारा लक्ष्य सिर्फ़ समुद्र में सहयोग नहीं, बल्कि एक स्थायी, मुक्त और संतुलित इंडो-पैसिफिक का निर्माण है।”
