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35 की उम्र में गेंदबाज़ी का बोझ? मार्क वुड ने खुद जताई चिंता—एडिलेड टेस्ट में वापसी पर बड़ा सवाल
घुटने की चोट, दर्द की इंजेक्शन थेरेपी और फिटनेस स्ट्रगल… इंग्लिश पेसर ने माना—“अब शरीर पहले जैसा साथ नहीं दे रहा”
इंग्लैंड के तेज़ गेंदबाज़ मार्क वुड एक बार फिर अपनी फिटनेस को लेकर चिंता में हैं। 90 मील प्रति घंटे (145 किमी/घंटा) की रफ्तार से गेंद फेंकने वाले यह पेसर अब 35 की उम्र में महसूस कर रहे हैं कि उनका शरीर पहले जैसा “रिस्पॉन्ड” नहीं कर रहा। इसी वजह से उन्होंने एडिलेड टेस्ट (17 दिसंबर) में अपनी उपलब्धता पर गंभीर संदेह जताया है।
वुड, जिन्हें चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के दौरान घुटने की चोट के चलते बाहर होना पड़ा था, हाल ही में पर्थ में 15 महीने बाद टेस्ट क्रिकेट में लौटे। लेकिन वहां भी 11 ओवर गेंदबाजी के बाद उनका पुराना घुटने का दर्द वापस उभर आया।
ब्रिस्बेन पहुंचने के बाद से वुड को घुटने का ब्रेस पहनना पड़ रहा है और डॉक्टरों की निगरानी में दर्द को कंट्रोल करने के लिए पेनकिलिंग इंजेक्शन लगाए गए हैं।
वुड बोले—“शायद अब शरीर तेज़ी नहीं संभाल पा रहा…”
चैनल 7 से बात करते हुए वुड ने कहा—
“मैं हमेशा टीम के लिए तेज़ गेंदबाजी करता रहा हूं, लेकिन लगता है उम्र अब असर दिखा रही है। शरीर उतना नहीं संभाल पा रहा जितना पहले करता था। फिर भी मैं कोशिश जारी रखूंगा।”
वुड के मुताबिक उनकी प्राथमिकता अभी सिर्फ इतना है कि वे दिन-प्रतिदिन दर्द के साथ खुद को संभाल सकें, और धीरे-धीरे रनिंग व ट्रेनिंग दोबारा शुरू करें।
उन्होंने साफ कहा—
“एडिलेड टेस्ट की उम्मीदें कम हैं। अधिक संभावना यही है कि अगर सब ठीक रहा तो मेलबर्न या सिडनी टेस्ट तक वापसी करूं।”

मानसिक दबाव ज्यादा, शारीरिक कम—वुड का खुलासा
वुड ने यह भी स्वीकार किया कि चोट का दर्द जितना तकलीफदेह है, उससे अधिक मुश्किल है “फिर से शून्य से शुरुआत करने का मानसिक संघर्ष”।
“बार-बार चोट लगना और फिर उसी जोश के साथ वापस लौटना… यह मानसिक रूप से बहुत थका देता है।”
स्टोक्स ने दिया भरोसा—“वुड टीम के लिए सब कुछ करेंगे”
इंग्लैंड के टेस्ट कप्तान बेन स्टोक्स ने कहा कि वुड अब भी टीम प्लान का अहम हिस्सा हैं।
स्टोक्स बोले—
“मार्क पूरी कोशिश करेंगे कि इस सीरीज़ में खेल सकें। हम अभी समय को लेकर आशावादी हैं।”
इंग्लैंड की गेंदबाज़ी पर असर
वुड की अनुपस्थिति इंग्लैंड के लिए एक बड़ा झटका है, खासकर तब जब स्टार पेसर जेम्स एंडरसन पहले ही लिमिटेड शेड्यूल पर चल रहे हैं और नई पीढ़ी के पेसरों पर अभी निरंतरता का दबाव है।
टीम मैनेजमेंट मानता है कि वुड की गति और अनुभव ऑस्ट्रेलिया की तेज़ पिचों पर गेमचेंजर साबित हो सकते थे। लेकिन मौजूदा हालात में इंग्लैंड को अपनी प्लानिंग फिर से तैयार करनी पड़ सकती है।
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